
पटना: विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के संस्थापक और पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने बिहार में बढ़ती कथित फर्जी एनकाउंटर की घटनाओं को लेकर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कानून के शासन की जगह पुलिसिया मनमानी को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।
भरत तिवारी एनकाउंटर को बताया गंभीर मामला
मुकेश सहनी ने कहा कि भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर आज पूरे बिहार और देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने कहा कि यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी कई गरीब, पिछड़े और दलित परिवारों के लोग पुलिस कार्रवाई के शिकार हुए हैं।
उन्होंने दावा किया कि मुजफ्फरपुर में निषाद समाज के पप्पू सहनी का एनकाउंटर भी संदिग्ध था और उस मामले में समय रहते निष्पक्ष जांच होती तो आज हालात अलग होते।
“सजा देने का अधिकार सिर्फ न्यायालय को”
वीआईपी प्रमुख ने कहा कि चाहे मामला तिवारी का हो, सहनी का हो, यादव का हो या अब्दुल का, हर मामले में समाज को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए।
उन्होंने कहा:
“अगर कोई व्यक्ति दोषी है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन किसी को सजा देने का अधिकार केवल न्यायालय को है। पुलिस या सरकार को नहीं।”
सरकार पर भेदभाव का आरोप
मुकेश सहनी ने आरोप लगाया कि सरकार हर मामले में समान संवेदनशीलता नहीं दिखाती और कई बार जाति एवं सामाजिक आधार पर प्रतिक्रिया देती है।
उन्होंने कहा कि यदि पिछड़े, दलित और गरीब वर्गों के मामलों में भी उतनी ही गंभीरता दिखाई जाती, जितनी चर्चित मामलों में दिखाई जा रही है, तो जनता का भरोसा और मजबूत होता।
उत्तर प्रदेश का भी किया जिक्र
सहनी ने कहा कि ऐसी घटनाएं केवल बिहार तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां भी बड़ी संख्या में एनकाउंटर की घटनाएं सामने आती रही हैं और इस विषय पर समाज को जागरूक रहने की आवश्यकता है।
जनता से की एकजुट होने की अपील
मुकेश सहनी ने कहा कि समाज को संगठित और जागरूक होना होगा ताकि सरकार और प्रशासन जनता के प्रति जवाबदेह बने रहें। उन्होंने दावा किया कि अन्याय, दमन और सत्ता के अहंकार के खिलाफ जनता भविष्य में लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी।
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। इससे पहले कई सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक हस्तियों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।


