पटना में ‘जॉब माफिया’ का बड़ा खेल बेनकाब! बैंकिंग परीक्षा पास कराने और सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी, 5 गिरफ्तार

पटना: बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और फर्जीवाड़े के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच पटना पुलिस ने एक बड़े कथित जॉब रैकेट का पर्दाफाश किया है। दानापुर इलाके में छापेमारी कर पुलिस ने ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जो बैंकिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सेटिंग कराने तथा सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से लाखों रुपये की वसूली करता था। इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस के अनुसार गिरोह अभ्यर्थियों और उनके परिजनों को सरकारी नौकरी का झांसा देकर मोटी रकम वसूलता था। इसके बदले में उम्मीदवारों से उनके मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र और हस्ताक्षर किए हुए ब्लैंक चेक भी अपने पास रख लेता था।

गुप्त सूचना पर हुई कार्रवाई

दानापुर पुलिस को सूचना मिली थी कि एक अपार्टमेंट में कुछ लोग प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता और सरकारी नौकरी दिलाने का दावा कर युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी की और सबसे पहले एक आरोपी को हिरासत में लिया।

पूछताछ के दौरान मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने चार अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया।

पहले एक आरोपी पकड़ा, फिर खुल गया पूरा नेटवर्क

दानापुर के एएसपी शिवम धाकड़ ने बताया कि पुलिस ने सबसे पहले शाहपुर थाना क्षेत्र के उसरी शिकारपुर निवासी प्रवीण शंकर उर्फ गोलू को गिरफ्तार किया।

उसके कब्जे से 22 ब्लैंक चेक और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए। इसके बाद उससे हुई पूछताछ के आधार पर पुलिस ने गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंच बनाई।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

पुलिस ने जिन पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें:

  • प्रवीण शंकर उर्फ गोलू (उसरी शिकारपुर, शाहपुर)
  • करण कुमार (इब्राहिमपुर, बिहटा)
  • राज कुमार (दीघा)
  • अमित चौधरी (मुगलपुरा, खाजेकलां)
  • मनोज कुमार (फुलवारीशरीफ)

शामिल हैं।

छापेमारी में क्या-क्या मिला?

पुलिस ने आरोपियों के पास से:

  • 22 ब्लैंक चेक
  • 11 एटीएम कार्ड
  • 8 मोबाइल फोन
  • एडमिट कार्ड
  • मार्कशीट
  • शैक्षणिक प्रमाण पत्र
  • अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज

बरामद किए हैं।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल किस प्रकार की धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा था।

लाखों रुपये की होती थी डील

एएसपी शिवम धाकड़ के अनुसार यह गिरोह प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता की गारंटी देने का दावा करता था।

अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों को भरोसा दिलाया जाता था कि उनकी सरकारी नौकरी पक्की करा दी जाएगी। इसके बदले प्रति उम्मीदवार लाखों रुपये की डील तय होती थी।

ब्लैंक चेक और मूल प्रमाण पत्र रखते थे बंधक

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह बकाया रकम की सुरक्षा के लिए उम्मीदवारों के मूल शैक्षणिक दस्तावेज और हस्ताक्षर किए हुए ब्लैंक चेक अपने पास रख लेता था।

इस तरह अभ्यर्थियों और उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव बनाकर रकम वसूली जाती थी।

प्रतियोगी छात्रों को बनाया जा रहा था निशाना

पुलिस का मानना है कि गिरोह खासतौर पर उन युवाओं को निशाना बनाता था जो बैंकिंग, रेलवे, पुलिस और अन्य सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे थे।

बढ़ती बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं में कड़ी प्रतिस्पर्धा का फायदा उठाकर यह गिरोह युवाओं को आसान तरीके से नौकरी दिलाने का लालच देता था।

रूपसपुर थाना में दर्ज हुआ मामला

पूरे मामले में रूपसपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह कितने समय से सक्रिय था और अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बना चुका है।

परीक्षा माफियाओं पर लगातार कार्रवाई

गौरतलब है कि बिहार में हाल के दिनों में परीक्षा माफिया और सॉल्वर गैंग के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है।

हाल ही में:

  • नीट-यूजी पुनर्परीक्षा में डमी कैंडिडेट मामले में 30 गिरफ्तारियां हुईं।
  • बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा में भी फर्जी अभ्यर्थियों और सॉल्वर गैंग के कई मामले सामने आए।
  • अब पटना में नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे इस कथित गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है।

पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क की जांच जारी है और जल्द ही इससे जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

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