मोहर्रम को लेकर भागलपुर में शांति समिति की बैठक, संवेदनशील इलाकों में बढ़ेगी निगरानी

मोहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से भागलपुर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में भागलपुर समाहरणालय स्थित समीक्षा भवन में जिला शांति समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला दंडाधिकारी अलंकृता पांडे ने की, जबकि वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव भी बैठक में मौजूद रहे। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस बार मोहर्रम के दौरान सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण, सफाई व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाएं और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी पर विशेष फोकस रहेगा।

बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा जिला शांति समिति के सदस्य, विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि और संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। पुलिस अधीक्षक नवगछिया वैभव शर्मा ऑनलाइन माध्यम से बैठक से जुड़े। इसके अलावा नगर पुलिस अधीक्षक अतुलेश झा और नगर आयुक्त किसलय कुशवाहा भी मौजूद रहे। बैठक में मोहर्रम पर्व के आयोजन से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई और समिति सदस्यों ने अपने सुझाव प्रशासन के सामने रखे।

शांति समिति के सदस्यों ने जानकारी दी कि भागलपुर में 24 जून से मोहर्रम पर्व की औपचारिक शुरुआत हो जाएगी। 24 जून की रात से चौकी निकाली जाएगी, जबकि 26 जून को सुन्नी समुदाय द्वारा विभिन्न स्थानों से अखाड़ा निकाला जाएगा। यह जुलूस सराय और तक पहुंचेगा और दोपहर करीब 3 बजे तक वापस अपने-अपने स्थानों पर लौट आएगा।

इसके बाद 27 जून 2026, शुक्रवार को शिया समुदाय द्वारा जुलूस निकाला जाएगा। यह जुलूस कोतवाली, इमामबाड़ा और ततारपुर होते हुए सहजांगी कर्बला तक पहुंचेगा। प्रशासन ने इन मार्गों को संवेदनशील श्रेणी में रखते हुए विशेष सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है।

बैठक में शांति समिति के सदस्यों ने सुझाव दिया कि जुलूस मार्गों पर साफ-सफाई, पेयजल और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने खास तौर पर भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में एंबुलेंस की उपलब्धता और बिजली के लटकते तारों को तत्काल ठीक कराने की मांग उठाई। समिति सदस्यों ने कहा कि पूर्व में कई बार ऐसे छोटे-छोटे कारण दुर्घटना का कारण बनते रहे हैं, इसलिए इस बार पहले से सतर्कता जरूरी है।

सदस्यों ने प्रशासन से अनुरोध किया कि , सहजांगी, सराय और किला घाट जैसे प्रमुख स्थलों पर CCTV या वीडियोग्राफर की व्यवस्था की जाए। प्रशासन ने इस सुझाव को गंभीरता से लेते हुए कहा कि निगरानी तंत्र को मजबूत बनाया जाएगा ताकि किसी भी असामान्य गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

बैठक में यह भी बताया गया कि परबत्ती काली स्थान मार्ग अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। हसनचक, मुर्गियाचक, नरगा और साहिबगंज के अखाड़े इसी मार्ग से होकर गुजरते हैं। भीड़ और मार्ग की संरचना को देखते हुए यहां अतिरिक्त पुलिस बल और दंडाधिकारियों की तैनाती की जाएगी।

जिला दंडाधिकारी अलंकृता पांडे ने शांति समिति को संबोधित करते हुए कहा कि भागलपुर की सबसे बड़ी ताकत यहां की सक्रिय सिविल सोसाइटी है। उन्होंने कहा कि समिति के सुझावों से स्पष्ट है कि समाज के जिम्मेदार लोग शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए गंभीर हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रशासन और समाज मिलकर मोहर्रम को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराएंगे।

जिलाधिकारी ने ताजिया की ऊंचाई पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि कई बार अत्यधिक ऊंचे ताजिया बिजली तारों से टकराने का खतरा पैदा कर देते हैं। इसलिए सभी आयोजक पहले से ऊंचाई का आकलन कर लें और सुरक्षा मानकों का पालन करें।

उन्होंने यह भी कहा कि कई वरिष्ठ लोग चाहते हैं कि त्योहार बिना पुलिस हस्तक्षेप के संपन्न हो, लेकिन बदलते सामाजिक माहौल में सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक हो गई है। उन्होंने कहा कि कई बार युवा वर्ग भावनात्मक या उत्तेजित होकर सामाजिक सौहार्द की सीमाएं लांघ जाता है, जिससे माहौल बिगड़ सकता है। यही कारण है कि प्रशासन पुलिस और दंडाधिकारी की पर्याप्त तैनाती करता है।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि प्रत्येक अखाड़े में खलीफा की उपस्थिति सुनिश्चित हो। इसके साथ 10 से 12 जिम्मेदार बुजुर्ग लोगों की सूची तैयार की जाए और उनका नाम व आधार कार्ड संबंधित थाना में जमा रहे। इससे जरूरत पड़ने पर प्रशासन तुरंत संपर्क स्थापित कर सकेगा।

स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया कि एंबुलेंस ऐसी रणनीतिक जगहों पर खड़ी की जाए जहां जरूरत पड़ने पर वह आसानी से निकल सके। उन्होंने कहा कि यदि एंबुलेंस भीड़ में फंस जाए तो आपातकालीन सहायता प्रभावित हो सकती है।

सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों, अंचलाधिकारियों, अनुमंडल दंडाधिकारियों और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों को लगातार क्षेत्र में भ्रमणशील रहने के निर्देश दिए गए। प्रशासन चाहता है कि जमीनी स्तर पर अधिकारी सक्रिय रहें और छोटी समस्या को भी बड़ा बनने से पहले नियंत्रित कर लें।

बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता को जुलूस मार्ग पर लटकते तारों को तुरंत ठीक कराने का निर्देश दिया गया। साथ ही पहलाम स्थल के आसपास मौजूद तालाबों और बड़े नालों की बैरिकेडिंग कराने को कहा गया ताकि दुर्घटनाओं से बचाव हो सके।

वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव ने शांति समिति को संबोधित करते हुए कहा कि समिति द्वारा दिए गए सभी सुझावों को संबंधित विभागों ने नोट कर लिया है। उन्होंने ताजिया कमेटियों से अपील की कि अखाड़ों में कोई भी व्यक्ति घातक हथियार लेकर न चले।

एसएसपी ने कहा कि अखाड़ों के साथ बुजुर्ग लोगों की मौजूदगी व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि डीजे बजाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। साथ ही अखाड़ों के बीच पर्याप्त दूरी बनाए रखने और पहलाम के दौरान गैप रखने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने कहा कि त्योहार खुशी और भाईचारे का प्रतीक होना चाहिए। लेकिन यदि कोई जानबूझकर माहौल खराब करने की कोशिश करेगा तो कानून उसके खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करेगा।

कुल मिलाकर, मोहर्रम को लेकर भागलपुर प्रशासन पूरी तरह सतर्क दिखाई दे रहा है। सुरक्षा व्यवस्था, संवेदनशील इलाकों की निगरानी, स्वास्थ्य सेवाएं, बिजली प्रबंधन और शांति समिति के सहयोग के साथ प्रशासन का प्रयास है कि पर्व सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हो और जिले में शांति बनी रहे।

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