मोहर्रम को लेकर भागलपुर प्रशासन अलर्ट, संवेदनशील इलाकों में ड्रोन और CCTV से होगी निगरानी

मोहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और दुर्घटनामुक्त तरीके से संपन्न कराने के लिए भागलपुर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। पर्व के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने तथा विधि-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर व्यापक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसी क्रम में भागलपुर समाहरणालय स्थित समीक्षा भवन में जिला दंडाधिकारी अलंकृता पांडे और वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव की संयुक्त अध्यक्षता में प्रतिनियुक्त दंडाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों की विस्तृत ब्रीफिंग आयोजित की गई।

बैठक में मोहर्रम जुलूस के दौरान सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण, बिजली आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाएं, आपदा प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था से जुड़े सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि किसी भी स्थिति में लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और प्रत्येक विभाग को अपनी जिम्मेदारी पूरी सतर्कता के साथ निभानी होगी।

जिला दंडाधिकारी ने ब्रीफिंग के दौरान बिजली विभाग के सभी कनीय अभियंताओं को निर्देश दिया कि वे संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचलाधिकारी के लगातार संपर्क में रहें। उन्होंने कहा कि मोहर्रम जुलूस के समय जरूरत के अनुसार बिजली आपूर्ति को नियंत्रित किया जाए ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना की संभावना न रहे और आम लोगों को भी अनावश्यक परेशानी न हो।

उन्होंने विशेष रूप से ताजिया मार्गों पर गुजरने वाले बिजली तारों की जांच करने का निर्देश दिया। प्रशासन का मानना है कि कई स्थानों पर ऊंचे ताजिया और नीचे लटके बिजली तार दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। इसलिए पहले से सभी संवेदनशील मार्गों की जांच कर आवश्यक सुधार करने को कहा गया है।

जिलाधिकारी ने कहा कि मोहर्रम पर्व पूरी तरह घटना और दुर्घटनामुक्त संपन्न हो, इसके लिए सभी अधिकारी सक्रिय और सजग रहें। उन्होंने अग्निशमन विभाग को अपने सभी फायर टेंडर और उपकरण रेडी मोड में रखने का निर्देश दिया ताकि आग लगने या किसी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

सुरक्षा निगरानी को मजबूत बनाने के लिए प्रशासन ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेने का निर्णय लिया है। जिलाधिकारी ने , शाहजहां, सराय, और अन्य प्रमुख संवेदनशील स्थलों पर CCTV तथा ड्रोन कैमरों से निगरानी रखने के निर्देश दिए। प्रशासन का मानना है कि रियल टाइम निगरानी से भीड़ नियंत्रण और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत नजर रखी जा सकेगी।

ड्रोन निगरानी विशेष रूप से उन क्षेत्रों में उपयोगी होगी जहां भीड़ अधिक रहती है या संकरी गलियों के कारण जमीन से निगरानी कठिन होती है। पुलिस अधिकारी लगातार लाइव फीड के माध्यम से हालात पर नजर रख सकेंगे और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत बल भेजा जा सकेगा।

जिलाधिकारी ने सभी जुलूस आयोजकों को निर्देश दिया कि प्रत्येक जुलूस के साथ एक वीडियोग्राफर अनिवार्य रूप से मौजूद रहे। इस व्यवस्था का उद्देश्य पूरे जुलूस की रिकॉर्डिंग सुनिश्चित करना है ताकि किसी विवाद, झड़प या कानून-व्यवस्था से जुड़े मामले में वीडियो रिकॉर्ड उपयोगी साबित हो सके।

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी प्रशासन ने विशेष तैयारी की है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि महत्वपूर्ण स्थलों पर एंबुलेंस पूरी तरह सक्रिय अवस्था में तैनात रहें। प्रत्येक एंबुलेंस में प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ, ऑक्सीजन सिलेंडर और आवश्यक प्राथमिक चिकित्सा सामग्री उपलब्ध होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि एंबुलेंस चालकों के मोबाइल नंबर स्थानीय दंडाधिकारी और पुलिस अधिकारियों के पास उपलब्ध रहें, ताकि जरूरत पड़ते ही तत्काल संपर्क स्थापित कर मरीज को अस्पताल भेजा जा सके। भीड़भाड़ वाले आयोजनों में त्वरित चिकित्सा सहायता जीवनरक्षक साबित हो सकती है।

बैठक में आपदा प्रबंधन से जुड़ी तैयारियों की भी समीक्षा की गई। अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन ने जानकारी दी कि सहजांगी स्थित तालाब पर एसडीआरएफ की दो टीमें तैनात की गई हैं। इन टीमों में 12 जवान, 8 गोताखोर और 8 आपदा मित्र शामिल हैं।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि इसी प्रकार जहां भी आवश्यकता हो, संबंधित अंचलाधिकारी अतिरिक्त गोताखोर और आपदा मित्रों की तैनाती सुनिश्चित करें। विशेषकर जलाशयों, तालाबों और घाटों के आसपास सुरक्षा बढ़ाने पर जोर दिया गया है, ताकि डूबने जैसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

विधि-व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए जिलाधिकारी ने तीनों अनुमंडल दंडाधिकारियों को बाउंड डाउन की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। प्रशासन मानता है कि संवेदनशील व्यक्तियों की पहचान कर पहले से कानूनी कार्रवाई करना शांति व्यवस्था बनाए रखने में प्रभावी कदम साबित हो सकता है।

सभी अंचलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में ताजिया की ऊंचाई पहले से मापने के निर्देश दिए गए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जुलूस के दौरान ऊंचे ताजिया बिजली तारों या अन्य संरचनाओं से न टकराएं। यह एहतियाती कदम संभावित हादसों को रोकने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जिलाधिकारी ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया कि छोटे साउंड बॉक्स में बजाए जाने वाले पेन ड्राइव की भी जांच की जाए। प्रशासन चाहता है कि किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक या भड़काऊ सामग्री सार्वजनिक रूप से प्रसारित न हो, जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो।

उन्होंने जिला नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे सक्रिय रखने का भी निर्देश दिया। नियंत्रण कक्ष के माध्यम से पूरे जिले से लगातार सूचना एकत्र की जाएगी और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित समन्वय स्थापित किया जाएगा। इससे प्रशासनिक प्रतिक्रिया समय कम होगा।

बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव और पुलिस अधीक्षक नवगछिया वैभव शर्मा ने भी अधिकारियों को विस्तृत ब्रीफिंग दी। पुलिस अधिकारियों ने संवेदनशील इलाकों की पहचान, अतिरिक्त बल की तैनाती और पेट्रोलिंग रणनीति पर चर्चा की।

बैठक में नगर पुलिस अधीक्षक अतुलेश झा, नगर आयुक्त किसलय कुशवाहा, अपर समाहर्ता दिनेश राम, संयुक्त निदेशक नागेंद्र कुमार गुप्ता, सिविल सर्जन डॉक्टर अशोक प्रसाद सहित सभी संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

कुल मिलाकर, मोहर्रम को लेकर भागलपुर प्रशासन ने बहुस्तरीय सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था तैयार की है। ड्रोन और CCTV निगरानी, एंबुलेंस तैनाती, SDRF टीम, बिजली तारों की जांच और नियंत्रण कक्ष की सक्रियता यह दर्शाती है कि प्रशासन पर्व को पूरी तरह शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए हर स्तर पर गंभीरता से काम कर रहा है।

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