कटिहार में म्यूटेशन के नाम पर घूसखोरी का आरोप, राजस्व कर्मचारी का रिश्वत लेते वीडियो वायरल

बिहार के कटिहार जिले में जमीन म्यूटेशन के नाम पर कथित घूसखोरी का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। आजमनगर अंचल कार्यालय में तैनात एक राजस्व कर्मचारी पर जमीन म्यूटेशन कराने के बदले मोटी अवैध रकम लेने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले ने तब तूल पकड़ लिया जब 39 सेकंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसमें कथित तौर पर राजस्व कर्मचारी को नोटों की गड्डी लेते हुए देखा जा रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच की बात कही है।

कटिहार के आजमनगर अंचल से जुड़े इस मामले में पीड़ित जमीन मालिक संजीव कुमार ने वायरल वीडियो की पुष्टि की है। संजीव कुमार का आरोप है कि संबंधित राजस्व कर्मचारी सुनील कुमार ठाकुर लंबे समय से जमीन म्यूटेशन के नाम पर उनसे अवैध पैसे वसूलता रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई बार मोटी रकम देने के बावजूद उनका म्यूटेशन कार्य पूरा नहीं किया गया, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण आवेदन रद्द कर दिया गया।

पीड़ित के अनुसार, जमीन म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए उन्हें बार-बार अंचल कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े। हर बार उनसे अलग-अलग कारण बताकर पैसे की मांग की गई। संजीव कुमार ने आरोप लगाया कि पहले भी उन्होंने लगभग 40 हजार रुपये दिए थे। इसके बाद एक अन्य चरण में करीब 15 हजार रुपये और देने पड़े। बावजूद इसके म्यूटेशन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

संजीव कुमार का कहना है कि जब पिछली बार भी उनका म्यूटेशन आवेदन निरस्त हो गया, तब राजस्व कर्मचारी ने उन्हें सलाह दी कि जमीन को किसी दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर कराकर दोबारा आवेदन करें। पीड़ित ने आरोप लगाया कि कर्मचारी के कहने पर उन्होंने अतिरिक्त खर्च कर जमीन को दूसरे नाम से ट्रांसफर कराया, ताकि प्रक्रिया आगे बढ़ सके।

हालांकि आरोप है कि इसके बाद भी राजस्व कर्मचारी ने उनसे रिश्वत की मांग बंद नहीं की। संजीव कुमार के मुताबिक कर्मचारी ने दबाव बनाते हुए कहा कि यदि जल्द पैसे नहीं दिए गए तो इस बार भी म्यूटेशन आवेदन रिजेक्ट हो सकता है। इस चेतावनी के बाद पीड़ित पर आर्थिक दबाव और बढ़ गया।

पीड़ित ने बताया कि मजबूरी में उन्हें अपने माल-मवेशी तक बेचने पड़े ताकि रिश्वत की रकम जुटाई जा सके। संजीव कुमार के अनुसार, इस बार उन्होंने लगभग 21 हजार रुपये का भुगतान किया। लेकिन लगातार हो रही वसूली और कथित उत्पीड़न से परेशान होकर उन्होंने सबूत जुटाने का फैसला किया।

संजीव कुमार ने दावा किया कि इस बार उन्होंने चुपके से पूरा घटनाक्रम रिकॉर्ड करवाया। इसी दौरान कथित रूप से रिश्वत की रकम लेते हुए राजस्व कर्मचारी का वीडियो बना लिया गया। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और मामला सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया।

वायरल वीडियो में कथित तौर पर राजस्व कर्मचारी नोटों की गड्डी लेते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि वीडियो की आधिकारिक फोरेंसिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। आम लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह प्रशासनिक भ्रष्टाचार का गंभीर उदाहरण है।

यह मामला आजमनगर अंचल के पिंढाल पंचायत से जुड़ा बताया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जमीन म्यूटेशन से जुड़े मामलों में लंबे समय से देरी और अनियमितताओं की शिकायतें मिलती रही हैं। कई लोगों का आरोप है कि बिना अवैध भुगतान के सरकारी प्रक्रिया पूरी कराना कठिन हो जाता है।

जमीन म्यूटेशन ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है क्योंकि इसी के आधार पर भूमि स्वामित्व रिकॉर्ड अपडेट होता है। यदि इस प्रक्रिया में भ्रष्टाचार प्रवेश कर जाए तो आम नागरिकों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी उठानी पड़ती है।

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कटिहार के जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने सख्त रुख अपनाने का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है और किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

डीएम आशुतोष द्विवेदी ने कहा कि वायरल वीडियो और शिकायत की गंभीरता को देखते हुए पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि प्रशासन लगातार शिकायतों पर नजर रखता है और किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। उनके बयान के बाद यह संकेत मिला है कि जिला प्रशासन मामले को दबाने के बजाय निष्पक्ष जांच की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

इस मामले ने एक बार फिर सरकारी दफ्तरों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस तेज कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भूमि रिकॉर्ड, ऑनलाइन आवेदन ट्रैकिंग और पारदर्शी मॉनिटरिंग सिस्टम भ्रष्टाचार कम करने में मदद कर सकते हैं। यदि नागरिकों को हर चरण की जानकारी ऑनलाइन मिले तो रिश्वतखोरी की गुंजाइश कम हो सकती है।

स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो जनता का प्रशासन पर भरोसा कमजोर होगा। कई लोगों ने यह भी मांग की कि जमीन संबंधित सेवाओं को पूरी तरह ऑनलाइन और समयबद्ध बनाया जाए।

कुल मिलाकर, कटिहार में सामने आया यह कथित घूसखोरी मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक ओर पीड़ित द्वारा लगातार रिश्वत देने और वीडियो के जरिए सबूत सामने लाने का दावा है, तो दूसरी ओर जिला प्रशासन जांच के बाद कार्रवाई की बात कह रहा है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है कि वायरल वीडियो की सच्चाई क्या सामने आती है और क्या आरोपियों पर वास्तव में कड़ी कार्रवाई होती है।

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