भरत तिवारी एनकाउंटर पर अश्विनी चौबे का बड़ा हमला, बोले- फर्जी मुठभेड़ के दोषी पुलिसकर्मियों को भेजें जेल

भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर बिहार की सियासत लगातार गर्माती जा रही है। इस मामले ने अब राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर गंभीर बहस छेड़ दी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने इस घटना को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह फर्जी एनकाउंटर करार दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि पुलिस चाहती तो भरत तिवारी को जीवित गिरफ्तार किया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उनके बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है।

पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान अश्विनी चौबे ने कहा कि यह घटना केवल एक व्यक्ति की मौत का मामला नहीं है, बल्कि कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप हैं, तो कानून के तहत उसे गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया जाना चाहिए। किसी भी परिस्थिति में ऐसी कार्रवाई स्वीकार्य नहीं हो सकती जिसमें निष्पक्ष जांच से पहले ही किसी की जान चली जाए।

अश्विनी चौबे ने घटना में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि जिन अधिकारियों या जवानों ने इस कथित फर्जी एनकाउंटर को अंजाम दिया, उनके हथियार तत्काल जब्त किए जाने चाहिए और उन्हें सीधे जेल भेजा जाना चाहिए। उनके अनुसार, यदि दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो इससे जनता का कानून पर भरोसा कमजोर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को मिले अधिकार जनता की सुरक्षा के लिए हैं, न कि शक्ति के दुरुपयोग के लिए।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने भरत तिवारी के व्यक्तित्व को लेकर भी महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने दावा किया कि भरत तिवारी किसी संगठित आपराधिक गतिविधि से जुड़े व्यक्ति नहीं थे, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहने वाले व्यक्ति थे। चौबे ने कहा कि भरत तिवारी अपने इलाके में गंदे पानी और जनस्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार आवाज उठा रहे थे। स्थानीय स्तर पर वे लोगों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने का काम कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि भरत तिवारी जिस मुद्दे के लिए संघर्ष कर रहे थे, उस विषय की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। चौबे ने कहा कि यह केवल एनकाउंटर की जांच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन जनहित के मुद्दों को भी समझना होगा जिनके लिए भरत तिवारी आवाज उठा रहे थे। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि भरत तिवारी का खून व्यर्थ नहीं जाएगा और जिस मुद्दे को लेकर वे लड़ रहे थे, उस लड़ाई को अब वे स्वयं आगे बढ़ाएंगे।

पीड़ित परिवार की स्थिति का जिक्र करते हुए अश्विनी चौबे ने सरकार से तत्काल राहत उपलब्ध कराने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि बारिश का मौसम शुरू हो चुका है और ऐसे समय में प्रभावित परिवार को बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि परिवार को टेंट, राशन और अन्य आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए ताकि वे कठिन परिस्थिति में संभल सकें।

इस पूरे मामले को सामाजिक और राजनीतिक नजरिए से जोड़ते हुए चौबे ने विपक्षी दलों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि अब तक विपक्ष के बड़े नेता पीड़ित परिवार से मिलने क्यों नहीं पहुंचे। उनके अनुसार, यदि किसी भी नागरिक के साथ अन्याय होता है, तो सभी राजनीतिक दलों को बिना भेदभाव उसके समर्थन में खड़ा होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई नेता केवल चुनिंदा मामलों में सक्रिय होते हैं और बाकी मामलों में चुप्पी साध लेते हैं।

अश्विनी चौबे ने एक संवेदनशील टिप्पणी करते हुए कहा कि भरत तिवारी एक गरीब ब्राह्मण परिवार से आते थे और संभवतः यही वजह है कि कई बड़े नेता उनके परिवार से मिलने नहीं पहुंचे। हालांकि इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। कई विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयान सामाजिक विभाजन को भी प्रभावित कर सकते हैं।

उन्होंने केंद्रीय मंत्री के बयान पर भी असहमति जताई। चौबे ने कहा कि मांझी द्वारा इस मामले पर दिया गया बयान जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाता। उनके अनुसार, घटना के समय मांझी दिल्ली में थे और संभवतः उन्हें पूरी जानकारी नहीं थी। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यात्मक स्थिति समझना जरूरी है।

हालांकि चौबे ने राज्य सरकार की मंशा को लेकर सकारात्मक टिप्पणी भी की। उन्होंने कहा कि सरकार अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। यही कारण है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित स्तर पर न्यायिक जांच की घोषणा की गई। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जांच कराने का निर्णय यह दिखाता है कि घटना को दबाने का प्रयास नहीं किया जा रहा।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध नजर आने के कारण उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। यह कदम बताता है कि प्रशासन मामले को गंभीरता से ले रहा है। हालांकि चौबे ने जोर दिया कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं होगा; दोष सिद्ध होने पर कठोर कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित होनी चाहिए।

अश्विनी चौबे ने अंत में अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखने की बात दोहराई। उन्होंने अपने आगामी राजनीतिक कार्यक्रम की घोषणा करते हुए बताया कि 26 जून को वे एक दिवसीय मौन उपवास करेंगे। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम देश को आपातकाल के दौर की याद दिलाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के संदेश के लिए आयोजित किया जाएगा।

भरत तिवारी एनकाउंटर अब केवल एक पुलिस कार्रवाई का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून, मानवाधिकार और राजनीतिक जवाबदेही से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में न्यायिक जांच की दिशा और रिपोर्ट पर सभी की नजर रहेगी। फिलहाल, अश्विनी चौबे के तीखे बयान ने इस मामले को और अधिक राजनीतिक केंद्र में ला दिया है।

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