बिहार में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बड़ी मजबूती, हाजीपुर में 17.25 करोड़ की लागत से बनेगी आधुनिक फूड प्रोसेसिंग यूनिट

पटना। बिहार के औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। राज्य में खाद्य प्रसंस्करण और विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत बनाने के उद्देश्य से हाजीपुर के औद्योगिक क्षेत्र गोरौल फेज-1 में एक अत्याधुनिक खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित की जाएगी। इस परियोजना के तहत लगभग 17.25 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जिससे न केवल राज्य के औद्योगिक ढांचे को मजबूती मिलेगी बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

बिहार सरकार के उद्योग विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार Moogy Foods Private Limited को वैशाली जिले के हाजीपुर स्थित औद्योगिक क्षेत्र गोरौल फेज-1 में आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना को राज्य के खाद्य उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निवेश से बिहार खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है।

यह स्वीकृति बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (BIADA) की परियोजना समाशोधन समिति (PCC) की बैठक में दी गई। बैठक की अध्यक्षता उद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध निदेशक, बियाडा एवं आएडा कुंदन कुमार ने की। बैठक के दौरान राज्य के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि और प्लग एंड प्ले शेड्स के आवंटन से जुड़े कई प्रस्तावों की समीक्षा की गई। इसी क्रम में Moogy Foods Private Limited के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई।

बिहार में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बड़ी मजबूती, हाजीपुर में 17.25 करोड़ की लागत से बनेगी आधुनिक फूड प्रोसेसिंग यूनिट

प्रस्तावित इकाई लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी। इस यूनिट में मुख्य रूप से कुरकुरे, पफ्स और अन्य रेडी-टू-ईट स्नैक उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। तेजी से बदलती उपभोक्ता मांग और पैकेज्ड फूड सेक्टर के विस्तार को देखते हुए इस परियोजना को बेहद संभावनाशील माना जा रहा है। रेडी-टू-ईट स्नैक उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, ऐसे में बिहार में इस तरह की आधुनिक इकाई की स्थापना निवेश और बाजार दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार खाद्य प्रसंस्करण उद्योग कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले राज्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। बिहार कृषि प्रधान राज्य होने के कारण यहां कृषि उत्पादों का बेहतर मूल्य संवर्धन किया जा सकता है। यदि स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयों की संख्या बढ़ती है, तो किसानों को भी बेहतर बाजार उपलब्ध हो सकता है और कृषि आधारित उद्योगों का विस्तार संभव होगा।

इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ रोजगार सृजन के रूप में सामने आएगा। अनुमान है कि इस इकाई के शुरू होने से लगभग 200 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। स्थानीय युवाओं के लिए यह बड़ी राहत साबित हो सकती है, क्योंकि इससे रोजगार के साथ कौशल विकास के अवसर भी बढ़ेंगे। निर्माण, उत्पादन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं मजबूत होंगी।

औद्योगिक विकास का प्रभाव केवल रोजगार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी व्यापक सकारात्मक बदलाव आते हैं। नई इकाइयों के स्थापित होने से आसपास छोटे व्यवसाय, परिवहन सेवाएं, वेयरहाउसिंग और अन्य सहायक गतिविधियां भी बढ़ती हैं। इससे क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों में तेजी आती है।

बिहार की उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने इस परियोजना को राज्य के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को औद्योगिक विकास का प्रमुख आधार बनाने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। उनके अनुसार इस प्रकार की परियोजनाएं स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ-साथ बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग केवल औद्योगिक विकास का माध्यम नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी साधन भी है। जब स्थानीय स्तर पर उत्पादन और प्रसंस्करण बढ़ता है, तो किसानों, व्यापारियों और उद्योगों के बीच एक मजबूत आर्थिक श्रृंखला तैयार होती है। इससे राज्य की समग्र आर्थिक स्थिति को भी मजबूती मिलती है।

श्रेयसी सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि बिहार को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का अग्रणी केंद्र बनाने के लिए सरकार निवेशकों को हर संभव सहयोग प्रदान कर रही है। निवेशक-अनुकूल नीतियां, बेहतर बुनियादी ढांचा और तेज स्वीकृति प्रक्रिया राज्य को उद्योगों के लिए आकर्षक गंतव्य बना रही हैं।

उद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध निदेशक कुंदन कुमार ने कहा कि बिहार में निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उद्योग स्थापित करने की प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, सरल और तेज बनाया गया है ताकि निवेशकों को अनावश्यक प्रशासनिक बाधाओं का सामना न करना पड़े।

उन्होंने कहा कि बेहतर आधारभूत संरचना किसी भी औद्योगिक विकास की रीढ़ होती है। सड़क, बिजली, पानी, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक भूमि की उपलब्धता जैसे पहलुओं पर सरकार लगातार काम कर रही है। इसका परिणाम यह है कि अब बिहार में निजी निवेशकों की रुचि तेजी से बढ़ रही है।

हाल के वर्षों में बिहार सरकार ने औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए कई नीतिगत सुधार किए हैं। विशेष रूप से खाद्य प्रसंस्करण, टेक्सटाइल, लॉजिस्टिक्स और विनिर्माण क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के प्रयास तेज हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गति बनी रही तो आने वाले वर्षों में बिहार पूर्वी भारत का प्रमुख औद्योगिक केंद्र बन सकता है।

हाजीपुर और वैशाली क्षेत्र का चयन भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजधानी पटना के निकट होने, बेहतर सड़क संपर्क और बाजार पहुंच के कारण यह क्षेत्र उद्योगों के लिए उपयुक्त माना जाता है। इससे तैयार उत्पादों की आपूर्ति बिहार के साथ-साथ अन्य राज्यों तक भी आसानी से की जा सकेगी।

कुल मिलाकर हाजीपुर के गोरौल फेज-1 में स्थापित होने जा रही Moogy Foods की यह अत्याधुनिक खाद्य प्रसंस्करण इकाई बिहार के औद्योगिक परिदृश्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है। 17.25 करोड़ रुपये का निवेश, आधुनिक उत्पादन प्रणाली और 200 रोजगार के अवसर राज्य के विकास को नई दिशा दे सकते हैं। आने वाले समय में इस तरह की और परियोजनाएं बिहार को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के मानचित्र पर मजबूत पहचान दिला सकती हैं।

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