
पटना/भोजपुर, 23 जून 2026। भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में अब बड़ा संवैधानिक हस्तक्षेप देखने को मिला है। बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए बिहार के मुख्य सचिव, डीजीपी और भोजपुर के एसपी को तलब किया है। आयोग ने इस पूरे मामले पर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर पूरे बिहार में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज है तथा पुलिस कार्रवाई पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
13 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
जानकारी के अनुसार भोजपुर जिले से जुड़े मानवाधिकार मामलों के अधिवक्ता एस. के. झा द्वारा इस मामले में याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य के शीर्ष अधिकारियों से जवाब मांगा।
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनंत मनोहर बदर इस मामले की अगली समीक्षा 13 जुलाई 2026 को करेंगे। माना जा रहा है कि इस सुनवाई में कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।
राष्ट्रीय और राज्य दोनों आयोगों में याचिका
मानवाधिकार अधिवक्ता एस. के. झा ने इस मामले को लेकर दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं—
- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), नई दिल्ली
- बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग, पटना
याचिका में मांग की गई है कि एनकाउंटर में शामिल सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए और पूरे मामले की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए।
साथ ही पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की भी मांग उठाई गई है।
मानवाधिकार आयोग ने रखी पैनी नजर
अधिवक्ता एस. के. झा ने आयोग की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि आयोग मानवाधिकार संरक्षण को लेकर गंभीर है।
उन्होंने कहा कि आयोग की निगरानी से जांच अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी होने की उम्मीद है।
पहले ही कई पुलिसकर्मी हो चुके हैं सस्पेंड
गौरतलब है कि भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की मौत पुलिस एनकाउंटर के दौरान हुई थी।
इस मामले में बिहार पुलिस के लॉ एंड ऑर्डर एडीजी ने पहले ही पुलिस की चूक स्वीकार की है।
उनके अनुसार एनकाउंटर से पहले 16 जून को पुलिस टीम भरत तिवारी से बातचीत करने गई थी, लेकिन स्थिति को सही तरीके से हैंडल नहीं किया गया।
लापरवाही सामने आने के बाद—
- शाहपुर SHO
- 2 सब-इंस्पेक्टर
- 1 एएसआई
- 1 कॉन्स्टेबल
को निलंबित किया जा चुका है।
सियासत भी गरमाई
भरत तिवारी एनकाउंटर अब राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता ने इस मामले पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि भरत तिवारी एक बेगुनाह व्यक्ति थे और उनके साथ साजिश हुई।
उन्होंने कहा कि इस मामले में शामिल सभी दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर
मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि—
क्या न्यायिक और मानवाधिकार जांच भरत तिवारी एनकाउंटर की पूरी सच्चाई सामने ला पाएगी?
फिलहाल पूरे बिहार की नजर अब आयोग की अगली सुनवाई और अधिकारियों की रिपोर्ट पर टिकी हुई है।


