लोदीपुर उर्दू मध्य विद्यालय की जमीन पर विवाद गहराया, ग्रामीणों का हंगामा, स्कूल पर ताला लगने की आशंका

भागलपुर। भागलपुर जिले के लोदीपुर थाना क्षेत्र स्थित उर्दू मध्य विद्यालय इन दिनों जमीन विवाद को लेकर सुर्खियों में है। विद्यालय की भूमि पर मालिकाना हक को लेकर ग्रामीणों और विद्यालय प्रबंधन के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि परिसर के आसपास तनावपूर्ण स्थिति बन गई। शिक्षकों और ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। विवाद ने अब गंभीर रूप ले लिया है और ग्रामीणों का कहना है कि यदि जमीन का मामला जल्द नहीं सुलझा, तो कभी भी विद्यालय में ताला लग सकता है, जिससे सैकड़ों छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।

यह पूरा मामला लोदीपुर मैदान के समीप स्थित उर्दू मध्य विद्यालय की जमीन से जुड़ा है। विवाद का केंद्र 20 डिसमिल भूमि है, जिस पर विद्यालय प्रबंधन और स्थानीय ग्रामीण अपना-अपना दावा कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय की जमीन पर अवैध रूप से मकान निर्माण किया जा रहा है, जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि जिस जमीन पर निर्माण हो रहा है वह उनकी निजी संपत्ति है।

विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक मो. अनबर सदाब ने बताया कि यह विवाद नया नहीं है बल्कि लंबे समय से चला आ रहा है। उनके अनुसार वर्ष 2025 में विद्यालय के पूर्व प्रधानाध्यापक गौस रब्बानी के कार्यकाल के दौरान भी इस जमीन को लेकर चर्चा हुई थी। उस समय ग्रामीणों द्वारा दावा किया गया था कि विद्यालय के नाम से 20 डिसमिल जमीन दर्ज है। वर्तमान विवाद उसी दावे से जुड़ा हुआ है।

प्रधानाध्यापक ने बताया कि स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि विद्यालय की भूमि पर मो. सदाब अंसारी द्वारा मकान बनाया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ी और मामला सार्वजनिक विवाद में बदल गया। विद्यालय प्रशासन का कहना है कि जमीन संबंधी रिकॉर्ड की स्पष्ट जांच आवश्यक है ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

स्थानीय बुजुर्ग ग्रामीण मो. इजहार अंसारी ने विवाद के ऐतिहासिक पक्ष को सामने रखते हुए कहा कि वर्ष 1961 में ततारपुर के दो लोगों ने 20 डिसमिल जमीन विद्यालय के लिए दान में दी थी। उनके अनुसार उस समय लोदीपुर पंचायत के सरपंच मो. यासीन थे। आरोप है कि बाद में वर्ष 1965 में उक्त जमीन का सर्वे उनके नाम पर करवा लिया गया, जिससे विवाद की नींव पड़ी।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि विद्यालय के लिए दान की गई जमीन निजी नाम पर दर्ज हो गई, तो यह गंभीर प्रशासनिक और कानूनी प्रश्न है। उनका आरोप है कि वर्षों से इस मुद्दे की अनदेखी होती रही, जिसके कारण अब मामला विस्फोटक रूप ले चुका है।

लोदीपुर पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि मो. तस्लीम ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि विद्यालय की 20 डिसमिल जमीन विद्यालय परिसर से लेकर पंचायत भवन तक फैली हुई है। उनके अनुसार यह जमीन पूर्व सरपंच के परिवार द्वारा ही विद्यालय के उपयोग के लिए उपलब्ध कराई गई थी। उन्होंने कहा कि जमीन के वास्तविक रिकॉर्ड की जांच के बिना निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

विद्यालय के पूर्व छात्र मो. नाजीम रजा ने भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर निर्माण कार्य चल रहा है, वह केवल विद्यालय की जमीन ही नहीं बल्कि कब्रिस्तान क्षेत्र से भी जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार निर्माण कार्य प्रारंभिक चरण से ही विवादित था और स्थानीय लोग शुरुआत से ही इसका विरोध कर रहे थे।

उन्होंने बताया कि जब मकान निर्माण की नींव डाली जा रही थी, तभी ग्रामीणों ने आपत्ति जताई थी। लेकिन निर्माण कार्य रुकने के बजाय आगे बढ़ता गया और अब स्थिति ऐसी हो गई है कि भवन का स्ट्रक्चर तैयार होने लगा है। इससे ग्रामीणों में रोष और बढ़ गया है।

ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि यह साबित हो जाता है कि विवादित भूमि विद्यालय की है, तो उसे तुरंत विद्यालय को वापस सौंपा जाए। दूसरी ओर यदि प्रशासन इस मुद्दे पर स्पष्ट निर्णय नहीं लेता, तो ग्रामीण आंदोलन तेज कर सकते हैं। कुछ ग्रामीणों ने यहां तक कहा कि यदि न्याय नहीं मिला तो विद्यालय पर ताला लगाने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।

हालांकि दूसरे पक्ष ने सभी आरोपों को खारिज किया है। पूर्व सरपंच मो. यासीन के पौत्र मो. सदाब ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे सभी आरोप बेबुनियाद और निराधार हैं। उनका कहना है कि उनके दादा के नाम पर कुल 1 एकड़ 58 डिसमिल जमीन दर्ज है और विवादित क्षेत्र उसी संपत्ति का हिस्सा है।

मो. सदाब ने दावा किया कि विद्यालय की जमीन का रसीद भी उनके दादा के नाम से ही कटता रहा है। उनके अनुसार सारी संपत्ति वैध रूप से उनके परिवार की है और वे अपनी निजी जमीन पर ही मकान निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग व्यक्तिगत कारणों से उन्हें निशाना बना रहे हैं।

विवाद बढ़ने की सूचना मिलते ही लोदीपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत कराने की कोशिश की और ग्रामीणों को समझा-बुझाकर स्थिति नियंत्रित की। फिलहाल इलाके में शांति बनी हुई है, लेकिन तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में भूमि अभिलेख, रजिस्ट्रेशन दस्तावेज, दानपत्र और राजस्व रिकॉर्ड सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य होते हैं। यदि जमीन वास्तव में विद्यालय के नाम पर दान की गई थी, तो प्रशासन को तत्काल रिकॉर्ड की जांच कर स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।

यह मामला केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे छात्रों का भविष्य भी जुड़ा हुआ है। यदि विद्यालय की जमीन पर मालिकाना विवाद गहराता है, तो स्कूल संचालन पर असर पड़ सकता है। इससे पढ़ाई कर रहे छात्रों की शिक्षा बाधित होने का खतरा है।

कुल मिलाकर लोदीपुर उर्दू मध्य विद्यालय का यह भूमि विवाद अब प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। एक ओर ग्रामीण विद्यालय की जमीन बचाने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दूसरा पक्ष निजी स्वामित्व का दावा कर रहा है। अब सभी की नजर जिला प्रशासन की जांच और कानूनी कार्रवाई पर टिकी है। उम्मीद की जा रही है कि निष्पक्ष जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।

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