बिहार में कौशल विकास को नई रफ्तार, युवाओं के रोजगार पर सरकार का बड़ा फोकस

पटना। बिहार में युवाओं को रोजगार से जोड़ने और कौशल विकास कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग की ओर से बिहार कौशल विकास मिशन की समीक्षात्मक बैठक में राज्यभर में चल रही प्रशिक्षण योजनाओं, रोजगारोन्मुखी कार्यक्रमों और भविष्य की रणनीतियों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में स्पष्ट संदेश दिया गया कि मिशन के तहत संचालित सभी योजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध, पारदर्शी और परिणाम आधारित तरीके से सुनिश्चित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर मिल सकें।

22 जून 2026 को आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग के मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने की। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने कौशल प्रशिक्षण योजनाओं की वर्तमान स्थिति, प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं की संख्या और आगामी कार्ययोजनाओं की विस्तार से जानकारी साझा की। समीक्षा के दौरान विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि बदलती औद्योगिक जरूरतों और वैश्विक रोजगार बाजार के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लगातार अपडेट किया जाए।

बैठक में विभागीय सचिव डॉ. कौशल किशोर ने बिहार कौशल विकास मिशन के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत कुल तीन नई निविदाएं जारी की गई हैं। इन निविदाओं का उद्देश्य ऐसे विशेष वर्गों तक कौशल प्रशिक्षण पहुंचाना है, जिन्हें मुख्यधारा के रोजगार अवसरों से जोड़ने की अधिक आवश्यकता है।

उन्होंने जानकारी दी कि दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर समुदाय और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से उबर चुके अभ्यर्थियों के लिए विशेष कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं। इन वर्गों के लिए एजेंसियों के चयन की प्रक्रिया जारी है। सरकार का लक्ष्य है कि समाज के प्रत्येक वर्ग को कौशल विकास योजनाओं का समान लाभ मिले और रोजगार के अवसरों में समावेशिता सुनिश्चित हो।

बैठक में एक अनोखे और नए प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। बिहार संग्रहालय के प्रस्ताव के आधार पर “म्यूजियम टूर गाइड” नामक नया कौशल पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना बनाई गई है। यह पाठ्यक्रम बिहार संग्रहालय परिसर में संचालित किया जाएगा। इसके लिए संग्रहालय को सरकारी प्रशिक्षण प्रदाता के रूप में पंजीकृत करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस पहल से पर्यटन, संस्कृति और सेवा क्षेत्र में युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर खुल सकते हैं।

सरकार का मानना है कि कौशल विकास केवल पारंपरिक तकनीकी प्रशिक्षण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन क्षेत्रों तक भी विस्तार होना चाहिए जहां नई संभावनाएं तेजी से उभर रही हैं। पर्यटन, डिजिटल सेवाएं, आतिथ्य और सांस्कृतिक प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।

बैठक में डोमेन स्किलिंग योजना पर भी विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि 23 नए विभागों में प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए विभागवार सेक्टर आधारित जॉब रोल की सूची तैयार कर ली गई है। साथ ही परियोजना प्रबंधन इकाई से कर्मियों को नामित किया गया है, जो विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण संबंधी परामर्श उपलब्ध कराएंगे।

इन प्रस्तावित कार्यशालाओं का उद्देश्य विभागों को प्रक्रियाओं, जिम्मेदारियों, वित्तीय प्रावधानों और नियोजन संबंधी आवश्यकताओं के बारे में प्रशिक्षित करना है। इससे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संचालन में स्पष्टता आएगी और योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव होगा।

बैठक में विदेशी भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम की प्रगति भी समीक्षा का प्रमुख हिस्सा रही। बिहार कौशल विकास मिशन राज्य के युवाओं की वैश्विक रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण दे रहा है। वर्तमान में जर्मन, अंग्रेजी, जापानी और अरबी भाषाओं में कुल 111 अभ्यर्थियों का नामांकन हो चुका है।

अधिकारियों ने बताया कि जर्मन भाषा में 30, अंग्रेजी में 30, जापानी में 30 और अरबी में 21 विद्यार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त कोरियन भाषा प्रशिक्षण शुरू करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। जल्द ही पटना सिटी स्थित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में एक नया भाषा केंद्र शुरू किया जाएगा।

इस नए केंद्र में अंग्रेजी, कोरियन, जापानी, जर्मन और अरबी भाषाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी भाषा कौशल युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय नौकरी बाजार के द्वार खोल सकता है, विशेषकर आईटी, मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर और सेवा क्षेत्र में।

बैठक में सरकार-से-सरकार साझेदारी के मॉडल पर भी चर्चा हुई। बिहार कौशल विकास मिशन और के बीच सहयोग के तहत प्रशिक्षण पद्धति, पाठ्यक्रम निर्माण और मूल्यांकन प्रणाली में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बिहार में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता और संस्थागत क्षमता को मजबूत बनाना है।

शिक्षार्थी-केंद्रित और प्रायोगिक प्रशिक्षण मॉडल को लागू करने के लिए राज्य के सभी 152 सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों से एक-एक प्रशिक्षक को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। कुल 152 प्रशिक्षकों को आधुनिक प्रशिक्षण तकनीकों और औद्योगिक मानकों के अनुरूप प्रशिक्षित किया गया है। इससे भविष्य में विद्यार्थियों को बेहतर गुणवत्ता की ट्रेनिंग मिलने की उम्मीद है।

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना की प्रगति की भी जानकारी दी गई। साथ ही प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS), राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना (NAPS) और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर विस्तृत चर्चा हुई। इन योजनाओं का उद्देश्य युवाओं को प्रशिक्षण के साथ-साथ उद्योगों से जोड़कर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी योजनाओं की निगरानी मजबूत की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रशिक्षण का सीधा लाभ युवाओं को रोजगार के रूप में मिले। उन्होंने कहा कि केवल प्रशिक्षण देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि रोजगार से जोड़ना अंतिम लक्ष्य होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बिहार की युवा आबादी राज्य की सबसे बड़ी ताकत है। यदि युवाओं को सही कौशल, आधुनिक प्रशिक्षण और रोजगार अवसर उपलब्ध कराए जाएं, तो राज्य की आर्थिक प्रगति को नई गति मिल सकती है। सरकार इसी लक्ष्य के साथ योजनाओं को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में जुटी है।

बैठक में अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हेमंत कुमार सिंह, मिशन निदेशक मनीष शंकर सहित बिहार कौशल विकास मिशन के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने मिशन की प्रगति और भविष्य की रणनीतियों पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

कुल मिलाकर बिहार कौशल विकास मिशन की यह समीक्षा बैठक राज्य के युवाओं के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। नए प्रशिक्षण कार्यक्रम, विदेशी भाषा कोर्स, समावेशी कौशल विकास और रोजगार आधारित योजनाओं के जरिए सरकार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मजबूत कदम उठा रही है। यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो आने वाले वर्षों में बिहार रोजगार और कौशल विकास के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है।

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