बिहार के 3.96 लाख किसानों को बड़ी राहत, 200 करोड़ से अधिक कृषि अनुदान राशि खातों में ट्रांसफर

पटना। बिहार सरकार ने प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को बड़ी राहत देते हुए कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत 3.96 लाख से अधिक किसानों के बैंक खातों में 200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे ट्रांसफर कर दी है। यह सहायता राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से किसानों तक पहुंचाई गई, जिससे प्रभावित परिवारों को खेती दोबारा शुरू करने और आर्थिक नुकसान से उबरने में मदद मिलेगी। राज्य सरकार की इस पहल को किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत पैकेज माना जा रहा है।

सोमवार को पटना स्थित लोक सेवक आवास के संकल्प सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ऑनलाइन माध्यम से अनुदान राशि का हस्तांतरण किया। यह सहायता रबी सीजन 2025-26 के दौरान मार्च 2026 में आई प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के लिए जारी की गई है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हर परिस्थिति में किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है और किसी भी प्राकृतिक संकट में उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन का असर कृषि क्षेत्र पर तेजी से देखने को मिला है। असामयिक वर्षा, आंधी-तूफान और ओलावृष्टि जैसी घटनाएं किसानों की मेहनत पर भारी पड़ रही हैं। ऐसी परिस्थितियों में सरकार की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वह प्रभावित किसानों को समय पर राहत उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि यह अनुदान केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि किसानों के आत्मविश्वास को पुनर्स्थापित करने का माध्यम भी है।

बिहार के 3.96 लाख किसानों को बड़ी राहत, 200 करोड़ से अधिक कृषि अनुदान राशि खातों में ट्रांसफर

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 के तीसरे और चौथे सप्ताह में राज्य के कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि हुई थी। इस प्राकृतिक आपदा के कारण रबी फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा। प्रशासनिक सर्वेक्षण में 13 जिलों में 33 प्रतिशत से अधिक फसल क्षति की पुष्टि हुई। प्रभावित जिलों में सहरसा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, मधेपुरा, अररिया, बेगूसराय, पूर्णिया, दरभंगा, किशनगंज, खगड़िया, मधुबनी, सुपौल और भागलपुर शामिल हैं।

इन जिलों के किसानों ने गेहूं, मक्का, दलहन और अन्य रबी फसलों में भारी नुकसान झेला। कई जगहों पर कटाई से ठीक पहले हुई बारिश और ओलावृष्टि ने तैयार फसलों को बर्बाद कर दिया। इससे किसानों की आय पर गंभीर असर पड़ा और बड़ी संख्या में किसान आर्थिक संकट का सामना करने लगे।

राज्य सरकार ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए त्वरित राहत प्रक्रिया शुरू की। आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा कृषि इनपुट अनुदान के लिए 200 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए। इसके बाद कृषि विभाग की मांग पर अतिरिक्त 60.71 करोड़ रुपये की राशि भी स्वीकृत की गई। इस तरह प्रभावित किसानों की सहायता के लिए कुल 260.71 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि इनपुट अनुदान योजना का उद्देश्य केवल तत्काल राहत देना नहीं है, बल्कि किसानों को अगली फसल की तैयारी के लिए संसाधन उपलब्ध कराना भी है। खेती में बीज, उर्वरक, सिंचाई और श्रम जैसी लागतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में प्राकृतिक आपदा के बाद मिलने वाली वित्तीय सहायता किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है। खेती को टिकाऊ और जोखिम मुक्त बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों, सिंचाई व्यवस्था और बीमा योजनाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उनका कहना था कि कृषि क्षेत्र की मजबूती बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के कल्याण को प्राथमिकता दी जा रही है। किसान सम्मान निधि और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी योजनाओं से किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। उन्होंने अधिक से अधिक किसानों से फसल बीमा योजना से जुड़ने की अपील की, ताकि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा मिल सके।

उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार मिलकर किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को आधुनिक बनाने और आपदा से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए निरंतर काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य केवल राहत देना नहीं बल्कि किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना भी है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर अनुदान राशि मिलने से प्रभावित किसानों को दोहरा लाभ होगा। एक ओर वे पिछली फसल के नुकसान की भरपाई कर सकेंगे, वहीं दूसरी ओर आगामी खेती के लिए आवश्यक संसाधन जुटा पाएंगे। इससे ग्रामीण बाजारों में भी नकदी प्रवाह बढ़ेगा, जिसका सकारात्मक प्रभाव स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में किसानों की आर्थिक स्थिरता सीधे ग्रामीण विकास से जुड़ी होती है। जब किसान मजबूत होते हैं तो बाजार, परिवहन, कृषि उपकरण और स्थानीय रोजगार जैसे कई क्षेत्रों में गतिविधियां तेज होती हैं। इसलिए ऐसी सहायता योजनाओं का प्रभाव केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे ग्रामीण तंत्र को प्रभावित करता है।

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सादा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल और अन्य विभागीय अधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

कुल मिलाकर बिहार सरकार द्वारा 3.96 लाख से अधिक किसानों के खातों में कृषि इनपुट अनुदान राशि का हस्तांतरण राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे किसानों को यह राहत आर्थिक सहारा देने के साथ-साथ उनके मनोबल को भी मजबूत करेगी। आने वाले समय में ऐसी योजनाएं कृषि क्षेत्र को अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

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