
पटना: महज 15 साल की उम्र में क्रिकेट जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके वैभव सूर्यवंशी ने फादर्स डे के मौके पर ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। इंडिया A की ओर से ट्राई नेशन सीरीज के फाइनल में खेलते हुए वैभव ने सिर्फ 29 गेंदों में 94 रन की विस्फोटक पारी खेली और टीम को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
इस यादगार जीत के बाद युवा बल्लेबाज ने अपनी सफलता अपने पिता संजीव सूर्यवंशी को समर्पित कर दी।
11 गेंदों में अर्धशतक, बना विश्व रिकॉर्ड
फाइनल मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी ने शुरुआत से ही आक्रामक बल्लेबाजी की। उन्होंने मात्र 11 गेंदों में अर्धशतक पूरा कर लिस्ट-A क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।
उनकी धमाकेदार पारी की बदौलत इंडिया A ने बड़ा स्कोर खड़ा किया और फाइनल जीतकर ट्राई नेशन सीरीज की ट्रॉफी अपने नाम कर ली।
सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट
मैच के बाद वैभव ने सोशल मीडिया पर तीन तस्वीरें साझा कीं। एक तस्वीर उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी की, दूसरी ट्रॉफी के साथ और तीसरी बचपन की तस्वीर थी, जिसमें वह अपने पिता के साथ नजर आ रहे हैं।
पोस्ट में उन्होंने ‘तेरे बिन’ गीत का इस्तेमाल किया, जिसे गायक रब्बी गिल ने अपने पिता को समर्पित किया था। इस भावुक पोस्ट के जरिए वैभव ने अपनी उपलब्धि और टीम की जीत को अपने पिता के नाम किया।
पिता के संघर्ष ने बनाया स्टार
वैभव सूर्यवंशी की सफलता के पीछे उनके पिता संजीव सूर्यवंशी का त्याग और संघर्ष सबसे बड़ी ताकत रहा है। बेटे के क्रिकेट करियर को संवारने के लिए उन्होंने कई कठिन फैसले लिए।
जानकारी के मुताबिक, संजीव सूर्यवंशी ने बेटे के क्रिकेट प्रशिक्षण के लिए अपनी खेती की जमीन तक बेच दी थी और अपना कारोबार भी बंद कर दिया था। वे हर सप्ताह कई बार समस्तीपुर से पटना तक वैभव को अभ्यास कराने लेकर जाते थे।
बेटे के जरिए पूरा हो रहा सपना
संजीव सूर्यवंशी खुद क्रिकेटर बनने का सपना पूरा नहीं कर पाए, लेकिन उन्होंने अपने बेटे के सपनों को अपना लक्ष्य बना लिया। वर्षों की मेहनत, समर्पण और संघर्ष का ही नतीजा है कि आज वैभव सूर्यवंशी देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे चर्चित युवा क्रिकेटरों में शामिल हो चुके हैं।
फादर्स डे पर खेली गई यह ऐतिहासिक पारी सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि एक बेटे की ओर से अपने पिता के संघर्ष, त्याग और विश्वास को दिया गया सबसे बड़ा सम्मान भी है।


