विश्व संगीत दिवस पर भागलपुर में सजा सुरों का महोत्सव, कथक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने जीता दिल

भागलपुर में विश्व संगीत दिवस के अवसर पर संगीत, नृत्य और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। शहर में आयोजित एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम ने कला प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भागलपुर कथक केंद्र और आरती फॉर्म डांस स्टूडियो के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में संगीत और नृत्य की ऐसी छटा बिखरी, जिसने उपस्थित दर्शकों के मन में कला के प्रति नई ऊर्जा और सम्मान का संचार कर दिया। कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और सकारात्मक दिशा देने वाली एक सशक्त साधना है।

विश्व संगीत दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध कथक गुरु ने की। उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में कार्यक्रम को एक नई ऊंचाई मिली। आयोजन स्थल पर शुरुआत से ही उत्साह का माहौल देखने को मिला। छात्र-छात्राओं, अभिभावकों, कला प्रेमियों और शहर के कई प्रतिष्ठित लोगों की उपस्थिति ने आयोजन को और भव्य बना दिया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भागलपुर कथक केंद्र और आरती फॉर्म डांस स्टूडियो के छात्र-छात्राओं की प्रस्तुतियां रहीं। बच्चों और युवाओं ने मंच पर कथक, शास्त्रीय संगीत तथा अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए अपनी कला और प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। प्रत्येक प्रस्तुति में अनुशासन, लय, भाव और तकनीकी दक्षता स्पष्ट रूप से दिखाई दी। कलाकारों की मेहनत और समर्पण ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।

कथक प्रस्तुतियों के दौरान घुंघरुओं की मधुर ध्वनि, ताल और भाव-भंगिमाओं ने माहौल को पूरी तरह सांगीतिक बना दिया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के जरिए भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सुंदरता और गहराई को मंच पर जीवंत कर दिया। वहीं संगीत प्रस्तुतियों ने आयोजन में अलग ही ऊर्जा भर दी। सुरों की मधुरता और कलाकारों की आत्मीय प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।

कार्यक्रम के दौरान गुरु निभाष मोदी ने संगीत और कला की महत्ता पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि संगीत मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा है। संगीत केवल कानों को आनंद देने वाला माध्यम नहीं, बल्कि मन और आत्मा को शांति प्रदान करने वाली शक्ति भी है। उनका कहना था कि जब व्यक्ति संगीत से जुड़ता है, तो वह अपने भीतर एक गहरे संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करता है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में बढ़ता तनाव, मानसिक दबाव और भागदौड़ लोगों को भीतर से थका रही है। ऐसे समय में संगीत और कला मनुष्य को आत्मिक शांति प्रदान कर सकते हैं। संगीत व्यक्ति को उसकी संवेदनाओं से जोड़ता है और उसे मानसिक रूप से मजबूत बनाता है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में संगीत को साधना और उपासना का दर्जा दिया गया है।

गुरु निभाष मोदी ने अपने संबोधन में संगीत और योग के संबंध पर भी विशेष जोर दिया। उनके अनुसार संगीत और योग दोनों ही व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। योग जहां शरीर और मन को संतुलित करता है, वहीं संगीत आत्मा को शुद्ध और ऊर्जावान बनाता है। दोनों का समन्वय जीवन को बेहतर दिशा देने में सहायक होता है।

उन्होंने युवाओं से विशेष अपील करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना चाहिए। आज डिजिटल युग में आधुनिकता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अपनी संस्कृति, कला और परंपराओं से जुड़ाव बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब युवा संगीत, नृत्य और भारतीय कला परंपराओं को अपनाएंगे, तभी देश की सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक मजबूती से पहुंच पाएगी।

कार्यक्रम में अंजलि, अमन, माधवी, अन्नपूर्णा, जीविका और निलेश सहित दर्जनों छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से कला के प्रति अपनी निष्ठा और समर्पण का परिचय दिया। मंच पर बच्चों का आत्मविश्वास और प्रदर्शन यह दर्शा रहा था कि वे भविष्य में कला के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

अभिभावकों ने भी बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना की और आयोजकों को सफल कार्यक्रम के लिए बधाई दी। कई अभिभावकों ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें अपनी संस्कृति से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं। मंच पर प्रस्तुति देने से बच्चों के व्यक्तित्व विकास में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों और प्रशिक्षकों को सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के दौरान आयोजकों ने संगीत और भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने का सामूहिक संकल्प दोहराया। यह भी कहा गया कि भविष्य में ऐसे आयोजनों को और बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक युवा कला से जुड़ सकें।

विश्व संगीत दिवस पर आयोजित यह सांस्कृतिक कार्यक्रम केवल एक उत्सव नहीं था, बल्कि भारतीय संगीत और कला की जीवंत परंपरा का उत्सव था। इस आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि संगीत की शक्ति सीमाओं से परे है। यह भाषा, क्षेत्र और उम्र की दीवारों को तोड़कर लोगों को एक सूत्र में जोड़ने का सामर्थ्य रखता है।

आज जब जीवन तेजी से बदल रहा है और लोग तकनीक पर अधिक निर्भर होते जा रहे हैं, ऐसे में संगीत और कला जैसी विधाएं समाज में संवेदनशीलता और संतुलन बनाए रखने का काम करती हैं। भागलपुर में आयोजित यह कार्यक्रम इसी संदेश के साथ संपन्न हुआ कि संगीत और संस्कृति को जीवित रखना केवल कलाकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

विश्व संगीत दिवस के इस भव्य आयोजन ने भागलपुर के सांस्कृतिक परिदृश्य को नई ऊर्जा दी। कार्यक्रम में उमड़ी भीड़, कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियां और लोगों का उत्साह इस बात का प्रमाण रहा कि संगीत और कला के प्रति लोगों का प्रेम आज भी उतना ही गहरा है। आने वाले समय में ऐसे आयोजन निश्चित रूप से नई प्रतिभाओं को मंच देने और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

  • ये भी पढ़े..

    BPSC 70वीं परीक्षा में दरभंगा की बेटी का कमाल: प्रिया यादव बनीं SDM, पूरे बिहार में हासिल की 10वीं रैंक

    Share Add as a preferred…

    सुल्तानगंज में युवक की गोली मारकर हत्या, आक्रोशित ग्रामीणों ने दो आरोपियों को पकड़कर पीटा

    Share Add as a preferred…