जेपी गंगा पथ पर एक लाख पौधारोपण का लक्ष्य जल्द पूरा होगा, पाटलिपुत्र की ऐतिहासिक पहचान को नए स्वरूप में विकसित करने की तैयारी

पटना। बिहार सरकार ने राजधानी पटना के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विकास को नई दिशा देने की दिशा में व्यापक कार्ययोजना पर काम तेज कर दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को लोक सेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में जल संसाधन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। बैठक में जेपी गंगा पथ पर एक लाख पौधारोपण का लक्ष्य शीघ्र पूरा करने, पाटलिपुत्र की ऐतिहासिक पहचान को पुनर्जीवित करने, गंगा तट क्षेत्र के समग्र विकास और पर्यटन स्थलों के व्यापक विस्तार को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जेपी गंगा पथ केवल एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि इसे बिहार की सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और पर्यटन पहचान के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने पौधारोपण अभियान को तेजी से आगे बढ़ाने का निर्देश देते हुए कहा कि गंगा किनारे हरित क्षेत्र विकसित करने से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ शहर की सुंदरता भी बढ़ेगी। एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित समय में पूरा करने के लिए संबंधित विभागों को समन्वित रूप से कार्य करने का निर्देश दिया गया।

बैठक में जल संसाधन विभाग की ओर से विभिन्न योजनाओं और परिसंपत्तियों की वर्तमान स्थिति पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। विभागीय सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह ने सिंचाई विभाग के निरीक्षण भवनों, गंगा तट विकास योजनाओं, पर्यटन संभावनाओं और ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण से जुड़ी योजनाओं की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। उन्होंने बताया कि कई परियोजनाओं पर कार्य प्रगति पर है और आने वाले समय में इन्हें और विस्तार दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की ऐतिहासिक विरासत उसकी सबसे बड़ी पहचान है। विशेष रूप से पाटलिपुत्र का इतिहास विश्वभर में प्रसिद्ध रहा है और इसे आधुनिक स्वरूप में प्रस्तुत करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पाटलिपुत्र की प्राचीन गौरवगाथा और ऐतिहासिक महत्व को नई पीढ़ी तथा देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए।

उन्होंने कहा कि पाटलिपुत्र केवल बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश की ऐतिहासिक धरोहर है। यहां के इतिहास, संस्कृति और सभ्यता को आधुनिक तकनीक और आकर्षक प्रस्तुति के माध्यम से लोगों के सामने लाया जाना चाहिए। इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर दीर्घकालिक योजनाएं तैयार की जाएं।

मुख्यमंत्री ने पर्यटन क्षेत्र को राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बिहार में अनेक ऐसे स्थल हैं जिनमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता है। इन स्थलों का समग्र विकास सुनिश्चित किया जाए तथा उनके बारे में सही और विस्तृत जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। उन्होंने कहा कि कई बार पर्यटकों को ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की पूरी जानकारी नहीं मिल पाती, जिससे उनकी रुचि प्रभावित होती है। इसलिए आधुनिक सूचना प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है।

जेपी गंगा पथ को लेकर मुख्यमंत्री ने विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि यह परियोजना राजधानी पटना की नई पहचान बन सकती है। इसे केवल यातायात सुविधा तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि यहां पर्यटन, मनोरंजन, सांस्कृतिक गतिविधियों और सार्वजनिक आयोजनों के लिए भी व्यापक संभावनाएं विकसित की जानी चाहिए। यदि उचित योजना के साथ इसका विकास किया जाता है तो यह क्षेत्र स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों दोनों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

बैठक में सिंचाई विभाग के निरीक्षण भवनों के बेहतर उपयोग पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की परिसंपत्तियों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल और डिजाइन, बिल्ड, ऑपरेट एंड मेंटेन (डीबीओएम) मॉडल की संभावनाओं का विस्तृत अध्ययन किया जाए।

उन्होंने सुझाव दिया कि कई निरीक्षण भवनों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त अतिथि गृहों में परिवर्तित किया जा सकता है। इससे न केवल इन परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि राज्य को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त करने का अवसर भी मिलेगा। साथ ही पर्यटकों और अधिकारियों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

गंगा तट क्षेत्र के विकास को लेकर भी मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गंगा बिहार की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवनधारा है। इसलिए इसके किनारे स्थित क्षेत्रों का विकास राज्य की दीर्घकालिक विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए। इसी उद्देश्य से कुर्जी घाट से काली घाट तक समेकित विकास योजना तैयार करने को कहा गया।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इस पूरे क्षेत्र को हरित, स्वच्छ और आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाया जाए। यहां पार्क, उद्यान, पैदल पथ, बैठने की व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था और अन्य जनसुविधाओं का विस्तार किया जाए ताकि नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक स्थल उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि गंगा तट का सौंदर्यीकरण केवल पर्यटन को बढ़ावा नहीं देगा, बल्कि शहरवासियों के जीवन स्तर को भी बेहतर बनाएगा।

अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि समग्र उद्यान योजना को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए। इस परियोजना के माध्यम से गंगा किनारे एक ऐसा सार्वजनिक क्षेत्र विकसित किया जाएगा जहां लोग प्रकृति के बीच समय बिता सकें, सांस्कृतिक गतिविधियों का आनंद ले सकें और शहर के व्यस्त जीवन से कुछ समय के लिए राहत प्राप्त कर सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और ऐतिहासिक धरोहरों के विकास को एक साथ जोड़कर कार्य करने की आवश्यकता है। इससे राज्य की पहचान मजबूत होगी और रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और प्रत्येक परियोजना की नियमित समीक्षा की जाए।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि समयबद्ध तरीके से उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित करना चाहती है। उन्होंने अधिकारियों को सभी प्रस्तावों और योजनाओं पर तेजी से कार्रवाई करने तथा निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूरा करने का निर्देश दिया।

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह, बुडको के प्रबंध निदेशक अनिमेश पराशर, नगर आयुक्त यशपाल मीणा, बिहार राज्य पथ विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक शीर्षत कपिल अशोक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में लिए गए निर्णयों को बिहार के शहरी विकास, पर्यटन विस्तार और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि योजनाएं निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी होती हैं, तो आने वाले वर्षों में पटना का गंगा तट क्षेत्र, जेपी गंगा पथ और ऐतिहासिक पाटलिपुत्र नई पहचान के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं।

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