
गया (बिहार): जिले के इमामगंज प्रखंड में बिजली विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोपों के बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला Shashank Shubhankar के आदेश पर हुई जांच से जुड़ा है।
इमामगंज के मंझौली गांव निवासी आइस फैक्ट्री संचालक उमेश साव ने शिकायत की थी कि:
- उनकी फैक्ट्री में छापेमारी के दौरान गलत तरीके से बिजली चोरी का आरोप लगाया गया
- उन्हें “टोका लगाकर बिजली चोरी” का झूठा केस बताया गया
- मामले को दबाने के लिए रिश्वत की मांग की गई
जांच में क्या सामने आया?
जिला प्रशासन द्वारा कराई गई जांच में पाया गया कि:
- बिजली चोरी के आरोप के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला
- कथित रिश्वत लेने के संकेत मिले
- UPI के जरिए ₹20,000 की राशि एक खाते में भेजी गई
- कुल ₹50,000 नकद अवैध वसूली का भी आरोप पुष्टि में सामने आया
किन पर गिरी गाज?
जांच रिपोर्ट के आधार पर इन पर कार्रवाई की अनुशंसा की गई है:
- जूनियर इंजीनियर (JE)
- असिस्टेंट इंजीनियर (AE)
- लेखापाल
- मानव बल कर्मी
- सुपरवाइजर
- एक लाइनमैन (जिस पर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश)
डीएम का सख्त निर्देश
डीएम ने निर्देश दिया है कि:
- JE के निलंबन का प्रस्ताव विभाग को भेजा जाए
- अन्य कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई हो
- दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए
बिजली विभाग में हड़कंप
इस कार्रवाई के बाद बिजली विभाग में हलचल तेज हो गई है। प्रशासन ने साफ कहा है कि भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के मामलों में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
निष्कर्ष
गया प्रशासन की यह कार्रवाई न सिर्फ एक शिकायत की जांच का नतीजा है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर अब सख्ती बढ़ाई जा रही है।


