
बेतिया। पश्चिम चंपारण जिले के चनपटिया अंचल में जमीन से जुड़े अभिलेखों में कथित हेराफेरी और जमाबंदी परिमार्जन के नाम पर हुए गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। जिला प्रशासन द्वारा कराई गई जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार 14 विवादित जमाबंदियों से संबंधित महत्वपूर्ण राजस्व रिकॉर्ड या तो फटे हुए पाए गए हैं या फिर रजिस्टर से पूरी तरह गायब हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया है।
जमीन से जुड़े अभिलेखों में गड़बड़ी के इस मामले ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में यह आशंका जताई गई है कि कुछ जमाबंदियों में मूल रैयतों के नाम हटाकर अन्य व्यक्तियों के नाम दर्ज किए गए और इस प्रक्रिया के समर्थन में कोई वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यह मामला अब केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि संगठित स्तर पर अभिलेखों में हेरफेर की आशंका से भी जुड़ गया है।
मामले का खुलासा एक शिकायत के बाद हुआ। चनपटिया क्षेत्र के लक्ष्मीपुर निवासी कुमार स्कंद ने जिला प्रशासन के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जमाबंदी परिमार्जन की प्रक्रिया के दौरान जमीन संबंधी रिकॉर्ड में अनियमित तरीके से बदलाव किए गए हैं। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिए।
इसके बाद बेतिया सदर के भूमि सुधार उप समाहर्ता (डीसीएलआर) की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया। समिति को सभी संबंधित अभिलेखों की जांच कर रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी सौंपी गई। जांच टीम ने कई दिनों तक रिकॉर्ड का मिलान किया, रजिस्टरों की जांच की और संबंधित दस्तावेजों का अध्ययन किया।
जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने प्रशासन को भी चौंका दिया। समिति ने पाया कि कई विवादित जमाबंदियों में मूल भूमि स्वामियों के नाम हटाकर अन्य लोगों के नाम दर्ज कर दिए गए थे। सबसे गंभीर बात यह रही कि इन परिवर्तनों को उचित ठहराने के लिए कोई वैध अभिलेखीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं मिला। इससे यह संदेह और मजबूत हो गया कि रिकॉर्ड में बदलाव नियमानुसार नहीं बल्कि अन्य तरीके से किए गए।
जांच रिपोर्ट के अनुसार कुल 14 विवादित जमाबंदियों से संबंधित रजिस्टर-2 के महत्वपूर्ण पन्ने गायब मिले। कुछ मामलों में पन्ने फटे हुए पाए गए, जबकि कुछ अभिलेखों में मूल प्रविष्टियों के साथ छेड़छाड़ और काट-छांट के संकेत भी मिले हैं। राजस्व अभिलेखों में इस प्रकार की गड़बड़ी को बेहद गंभीर माना जाता है क्योंकि यही दस्तावेज जमीन के स्वामित्व और अधिकारों का आधार होते हैं।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रिकॉर्ड की स्थिति अत्यंत संदिग्ध है और यह सामान्य प्रशासनिक त्रुटि का मामला नहीं प्रतीत होता। जांच दल ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की विस्तृत जांच कराने की अनुशंसा की है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अभिलेखों में बदलाव किस स्तर पर और किन लोगों की मिलीभगत से किया गया।
जिला प्रशासन को सौंपी गई रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि विवादित जमाबंदी परिमार्जन तत्कालीन अंचलाधिकारी राकेश कुमार के कार्यकाल के दौरान किए गए थे। हालांकि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और अंतिम निष्कर्ष आने बाकी हैं, लेकिन रिपोर्ट में तत्कालीन प्रशासनिक व्यवस्था की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। यही वजह है कि अब पूर्व अंचलाधिकारी समेत उस अवधि में कार्यरत कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जिला पदाधिकारी तरनजोत सिंह ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि राजस्व रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध प्रशासनिक और कानूनी दोनों स्तर पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार मामले में विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ प्राथमिकी दर्ज करने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। यदि जांच में दस्तावेजों से छेड़छाड़ और फर्जी तरीके से नाम दर्ज करने के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित लोगों पर आपराधिक मुकदमा भी चलाया जा सकता है।
इस खुलासे के बाद चनपटिया अंचल कार्यालय और राजस्व विभाग के अन्य कर्मचारियों के बीच भी हलचल बढ़ गई है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि यदि रिकॉर्ड से पन्ने गायब किए गए हैं या जानबूझकर अभिलेखों में बदलाव किया गया है, तो यह केवल एक व्यक्ति के स्तर पर संभव नहीं हो सकता। ऐसे में पूरे मामले की तह तक जाने के लिए व्यापक जांच की जरूरत है।
भूमि मामलों के जानकारों का कहना है कि बिहार में जमीन संबंधी विवादों का सबसे महत्वपूर्ण आधार राजस्व रिकॉर्ड ही होते हैं। यदि इन्हीं अभिलेखों में हेरफेर होने लगे तो आम लोगों का प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच और कड़ी कार्रवाई बेहद आवश्यक है।
स्थानीय लोगों के बीच भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज है। कई लोगों का मानना है कि यदि समय रहते शिकायत नहीं की जाती तो जमीन से जुड़े कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड हमेशा के लिए संदिग्ध बने रहते। अब लोगों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
जिला प्रशासन ने जांच रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है और संबंधित अधिकारियों से प्रगति रिपोर्ट भी मांगी गई है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल चनपटिया अंचल में सामने आया यह कथित जमाबंदी घोटाला पश्चिम चंपारण जिले में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है और पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला हाल के वर्षों में सामने आए सबसे गंभीर राजस्व अनियमितताओं में से एक माना जा सकता है। अब देखना होगा कि जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है और दोषियों के खिलाफ प्रशासन कितनी सख्त कार्रवाई करता है।


