
हाजीपुर। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए हाजीपुर नगर परिषद के एक अकाउंटेंट के ठिकानों पर छापेमारी की है। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की जांच के क्रम में गुरुवार सुबह ईओयू की टीम ने हाजीपुर नगर परिषद में कार्यरत लेखापाल मनीष कुमार के आवास और कार्यालय में एक साथ दबिश दी। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े कागजातों की जांच शुरू कर दी।
बताया जा रहा है कि मनीष कुमार पर अपनी वैध आय से 208 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। प्रारंभिक जांच में उनके खिलाफ करोड़ों रुपये की संदिग्ध संपत्ति होने की बात सामने आई थी। इसी आधार पर मामला दर्ज किया गया और अदालत से तलाशी वारंट प्राप्त करने के बाद आर्थिक अपराध इकाई ने यह कार्रवाई शुरू की।
सुबह-सुबह पहुंची ईओयू की टीम
जानकारी के अनुसार गुरुवार सुबह आर्थिक अपराध इकाई की विशेष टीम हाजीपुर शहर के बागमली मोहल्ला स्थित मनीष कुमार के निजी आवास पर पहुंची। टीम के पहुंचते ही पूरे इलाके में चर्चा का माहौल बन गया। अधिकारियों ने घर के सभी हिस्सों की बारीकी से जांच शुरू की और वहां मौजूद दस्तावेजों तथा अन्य सामग्रियों को खंगालना शुरू कर दिया।
इसके साथ ही एक अन्य टीम को हाजीपुर नगर परिषद स्थित कार्यालय में भी भेजा गया, जहां लेखापाल के कार्यकाल से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। दोनों स्थानों पर एक साथ चल रही कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों और नगर परिषद कर्मचारियों के बीच दिनभर चर्चा होती रही।
करोड़ों की संपत्ति अर्जित करने का आरोप
आर्थिक अपराध इकाई के सूत्रों के अनुसार मनीष कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत लंबे समय से जांच के दायरे में थी। प्रारंभिक जांच में उनकी आय और संपत्ति के बीच बड़ा अंतर पाया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार उपलब्ध दस्तावेजों और वित्तीय आंकड़ों के विश्लेषण में यह सामने आया कि लेखापाल ने अपनी वैध आय की तुलना में काफी अधिक संपत्ति अर्जित की है। अनुमान है कि यह अंतर दो करोड़ रुपये से भी अधिक का हो सकता है।
इसी आधार पर आर्थिक अपराध इकाई ने विस्तृत जांच शुरू की थी। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद मामला न्यायालय में पहुंचा और तलाशी की अनुमति मिलने के बाद छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
नगर परिषद कार्यालय में भी जांच
ईओयू की कार्रवाई केवल निजी आवास तक सीमित नहीं रही। नगर परिषद कार्यालय में भी अधिकारियों ने कई फाइलों, खातों और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की जांच शुरू की।
सूत्रों के अनुसार जांच टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं सरकारी पद का दुरुपयोग कर अवैध रूप से संपत्ति तो अर्जित नहीं की गई। इसके लिए विभिन्न वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और अन्य अभिलेखों की जांच की जा रही है।
कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों से भी आवश्यक जानकारी ली जा रही है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके।
स्थानीय पुलिस भी रही मौजूद
छापेमारी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय थाना पुलिस को भी तैनात किया गया। ईओयू की कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो, इसके लिए पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा।
आवास और कार्यालय दोनों स्थानों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। अधिकारियों ने जांच प्रक्रिया को पूरी गोपनीयता और कानूनी प्रक्रिया के तहत संचालित किया।
दस्तावेजों की हो रही गहन जांच
ईओयू की टीम छापेमारी के दौरान कई प्रकार के दस्तावेजों की जांच कर रही है। इनमें संपत्ति खरीद-बिक्री से जुड़े कागजात, बैंकिंग रिकॉर्ड, निवेश संबंधी दस्तावेज, नकदी लेन-देन और अन्य वित्तीय विवरण शामिल हैं।
जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संदिग्ध संपत्तियां आरोपी के नाम पर हैं या परिवार के अन्य सदस्यों और रिश्तेदारों के नाम पर निवेश की गई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आय से अधिक संपत्ति मामलों में अक्सर विभिन्न प्रकार के वित्तीय रिकॉर्ड और निवेश संबंधी दस्तावेज महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित होते हैं। इसलिए ईओयू इस मामले में सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार का अभियान जारी
बिहार में पिछले कुछ वर्षों के दौरान भ्रष्टाचार के मामलों में लगातार कार्रवाई देखने को मिली है। निगरानी और आर्थिक अपराध इकाई की टीमें विभिन्न विभागों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ जांच कर रही हैं।
सरकार का दावा है कि भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है और किसी भी स्तर पर अनियमितता पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जा रही है। इसी अभियान के तहत आय से अधिक संपत्ति के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर जांचा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयों से सरकारी तंत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।
छापेमारी के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
फिलहाल ईओयू की कार्रवाई जारी है और अधिकारी विभिन्न दस्तावेजों तथा संपत्तियों का आकलन कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपी लेखापाल के पास कुल कितनी संपत्ति है और उसमें से कितनी संपत्ति वैध आय के अनुरूप है।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि अतिरिक्त संपत्तियों का पता चलता है तो उन्हें भी जांच के दायरे में शामिल किया जाएगा।
लोगों की नजर जांच पर
हाजीपुर में हुई इस कार्रवाई ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकारी पदों पर बैठे लोगों की संपत्तियों की नियमित जांच होनी चाहिए ताकि भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।
फिलहाल आर्थिक अपराध इकाई की टीम छापेमारी और दस्तावेजों की जांच में जुटी हुई है। जांच पूरी होने के बाद इस मामले में कई महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं पूरे बिहार में यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम का एक और बड़ा उदाहरण मानी जा रही है।


