
पूसा। भीषण गर्मी और उमस से परेशान उत्तर बिहार के लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मौसम विभाग और कृषि मौसम वैज्ञानिकों के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार 11 जून से उत्तर बिहार के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अगले कुछ दिनों के दौरान कई जिलों में बादल छाने, बारिश होने, मेघगर्जन और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। मौसम में यह बदलाव जहां आम लोगों को गर्मी से राहत देगा, वहीं किसानों के लिए भी कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा केंद्र द्वारा जारी मध्यम अवधि के मौसम पूर्वानुमान में कहा गया है कि 11 जून से लेकर 13 जून तक उत्तर बिहार के कई जिलों में मौसम सक्रिय रहेगा। इस दौरान वर्षा के साथ तेज हवाएं और गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। मौसम वैज्ञानिकों ने लोगों और किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
चार दिनों तक बदला रहेगा मौसम का मिजाज
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले चार दिनों तक उत्तर बिहार के अधिकांश क्षेत्रों में आसमान में आंशिक से लेकर घने बादल छाए रह सकते हैं। खासकर 11 जून से मौसम में तेजी से बदलाव देखने को मिलेगा। कई जिलों में बारिश के साथ बिजली चमकने और मेघगर्जन की संभावना व्यक्त की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल की खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में बन रही मौसमी परिस्थितियों के कारण वातावरण में नमी बढ़ रही है। यही कारण है कि बिहार के उत्तरी हिस्सों में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना बन रही है। इस बदलाव का असर कृषि, जनजीवन और तापमान पर भी दिखाई देगा।
इन जिलों में ज्यादा असर की संभावना
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर बिहार के कुछ जिलों में वर्षा की गतिविधियां अपेक्षाकृत अधिक रह सकती हैं। इनमें मधुबनी, सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण और गोपालगंज प्रमुख रूप से शामिल हैं।
पूर्वानुमान के मुताबिक 11 और 12 जून के दौरान इन जिलों में 65 से 70 मिलीमीटर तक बारिश दर्ज की जा सकती है। जबकि अन्य जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। हालांकि स्थानीय मौसम परिस्थितियों के अनुसार कुछ क्षेत्रों में बारिश की मात्रा अधिक या कम भी हो सकती है।
मौसम विभाग का कहना है कि जिन क्षेत्रों में तेज बारिश होगी, वहां जलजमाव की स्थिति भी बन सकती है। इसलिए लोगों को पहले से सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
तेज हवाएं और मेघगर्जन को लेकर चेतावनी
बारिश के साथ-साथ तेज झोंकेदार हवाएं भी चल सकती हैं। अनुमान है कि पूर्वी दिशा से 15 से 19 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं बह सकती हैं। कुछ स्थानों पर हवा की गति इससे अधिक भी हो सकती है।
मौसम विशेषज्ञों ने विशेष रूप से किसानों और खुले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। बिजली चमकने और मेघगर्जन के दौरान खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूरी बनाए रखने की अपील की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून पूर्व की ऐसी गतिविधियों के दौरान कई बार अचानक मौसम बदल जाता है। इसलिए मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान देना जरूरी है।
तापमान में आ सकती है गिरावट
पिछले कुछ दिनों से बिहार के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया जा रहा है। दिन के समय तेज धूप और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा रखी है। हालांकि बारिश शुरू होने के बाद तापमान में कुछ कमी आने की उम्मीद है।
पूर्वानुमान के अनुसार आगामी दिनों में अधिकतम तापमान 35 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 25 से 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।
हालांकि अधिकतम तापमान सामान्य से दो से तीन डिग्री अधिक बना रह सकता है, लेकिन बादलों और बारिश के कारण गर्मी की तीव्रता में कमी महसूस होगी। इससे लोगों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
नमी बढ़ने से बदलेगा वातावरण
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आने वाले दिनों में वातावरण में नमी का स्तर बढ़ेगा। सुबह के समय सापेक्षिक आर्द्रता 70 से 75 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है, जबकि दोपहर के समय यह 20 से 25 प्रतिशत के बीच रह सकती है।
नमी बढ़ने के कारण कई क्षेत्रों में सुबह और शाम के समय मौसम अपेक्षाकृत सुहावना महसूस हो सकता है। हालांकि बारिश से पहले उमस में भी बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
किसानों के लिए महत्वपूर्ण समय
मौसम में होने वाला यह बदलाव किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि खरीफ सीजन की तैयारियों के लिए यह उपयुक्त समय है। किसानों को मौसम का लाभ उठाकर खेतों की तैयारी पूरी करने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों ने खरीफ मक्का की बुआई के लिए खेतों को तैयार रखने का सुझाव दिया है। इसके अलावा धान की मध्यम अवधि वाली किस्मों की नर्सरी लगाने के लिए भी वर्तमान समय को अनुकूल बताया गया है।
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि समय पर नर्सरी तैयार होने से मानसून के दौरान धान की रोपाई सुचारू रूप से की जा सकेगी।
हरी खाद और तिल की खेती पर जोर
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को हरी खाद के रूप में ढैंचा की बुआई करने की सलाह दी है। बाद में इसे खेत में मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और फसलों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं।
इसके साथ ही खरीफ तिल की खेती शुरू करने के लिए भी यह समय अनुकूल माना गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि बारिश की शुरुआत से पहले खेत तैयार कर लेने से बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
सब्जी उत्पादकों को विशेष सलाह
सब्जियों की खेती करने वाले किसानों के लिए भी मौसम विभाग ने विशेष सुझाव जारी किए हैं। भारी बारिश की संभावना को देखते हुए खेतों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था बनाए रखने को कहा गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि खेतों में पानी जमा हो जाता है तो सब्जी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए नालियों की सफाई और अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित कर लेनी चाहिए।
धान की रोपाई की तैयारी शुरू करने का समय
वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि मौसम पूर्वानुमान के अनुसार बारिश होती है तो किसानों को धान की लंबी अवधि वाली किस्मों की रोपाई की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। इससे मानसून सक्रिय होते ही खेती के कार्यों में तेजी लाई जा सकेगी।
कुल मिलाकर उत्तर बिहार में 11 जून से मौसम का मिजाज बदलने वाला है। बारिश, मेघगर्जन और तेज हवाओं की संभावना के बीच लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। वहीं किसानों के लिए यह मौसम खरीफ फसलों की तैयारी और कृषि गतिविधियों को गति देने का बेहतर अवसर साबित हो सकता है। मौसम विभाग ने लोगों से नियमित रूप से मौसम अपडेट पर नजर रखने और आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है।


