
बागपत। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बड़ौत में मंगलवार को हुई दिनदहाड़े सनसनीखेज फायरिंग की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। टेंट कारोबारी सोहनलाल अग्रवाल और उनके बेटे विकास अग्रवाल की हत्या के बाद अब इस हत्याकांड के मुख्य आरोपी और कुख्यात हिस्ट्रीशीटर वरुण लुहारी की भी मौत हो गई है। इस घटना में अब तक कुल तीन लोगों की जान जा चुकी है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस हत्याकांड की जड़ में करीब दस साल पुरानी रंजिश थी, जो समय के साथ बदले की आग में बदल गई और आखिरकार तीन जिंदगियों को लील गई।
घटना बड़ौत बस स्टैंड के समीप स्थित मुख्य बाजार क्षेत्र में हुई, जहां लोगों की भारी आवाजाही रहती है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि यह पूरी वारदात पुलिस चौकी से महज कुछ ही दूरी पर अंजाम दी गई। दिनदहाड़े हुई ताबड़तोड़ फायरिंग से बाजार में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका दहशत के माहौल में बदल गया।
जानकारी के अनुसार, कुख्यात हिस्ट्रीशीटर वरुण लुहारी अपने कई साथियों के साथ हथियारों से लैस होकर ‘आर्य टेंट हाउस’ पहुंचा। वहां मौजूद कारोबारी सोहनलाल अग्रवाल और उनके बेटे विकास अग्रवाल को निशाना बनाते हुए आरोपियों ने अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। अचानक हुई फायरिंग से आसपास के लोग सहम गए और बाजार में भगदड़ मच गई। गोली लगने से पिता-पुत्र गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े।
घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने सोहनलाल अग्रवाल और उनके बेटे विकास अग्रवाल को मृत घोषित कर दिया। पिता-पुत्र की मौत की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया। व्यापारियों ने घटना को लेकर गहरा रोष व्यक्त किया और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।
इस बीच, वारदात को अंजाम देने के बाद भागने का प्रयास कर रहे आरोपियों को स्थानीय लोगों ने घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लोगों का गुस्सा इतना अधिक था कि उन्होंने मुख्य आरोपी वरुण लुहारी पर हमला कर दिया। इस दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने उसे किसी तरह भीड़ से बचाकर अस्पताल पहुंचाया, जहां से उसे बेहतर इलाज के लिए मेरठ के हायर सेंटर रेफर किया गया। हालांकि देर रात उपचार के दौरान उसकी भी मौत हो गई। इस तरह एक ही दिन में तीन लोगों की जान चली गई और पूरा मामला और अधिक संवेदनशील बन गया।
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस खूनी वारदात की पृष्ठभूमि लगभग दस वर्ष पुरानी है। वर्ष 2015 में दिल्ली बस स्टैंड स्थित न्यू आर्य टेंट हाउस पर भी इसी तरह की फायरिंग हुई थी। उस समय हुई गोलीबारी में वरुण लुहारी के भाई कपिल उर्फ पिंटू की मौत हो गई थी। उस घटना के बाद से दोनों पक्षों के बीच गहरी दुश्मनी चली आ रही थी। पुलिस का मानना है कि भाई की मौत का बदला लेने की भावना में वरुण लुहारी ने इस हत्याकांड की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में पुरानी रंजिश और बदले की भावना ही इस घटना की मुख्य वजह प्रतीत हो रही है। हालांकि मामले की विस्तृत जांच जारी है और पुलिस हर पहलू पर गंभीरता से काम कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि जांच पूरी होने के बाद कई और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
मृतक वरुण लुहारी का आपराधिक इतिहास भी काफी लंबा रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वह बड़ौत कोतवाली का घोषित हिस्ट्रीशीटर था और उसके खिलाफ हत्या के प्रयास, रंगदारी, गैंगस्टर एक्ट, आर्म्स एक्ट, मारपीट और अन्य गंभीर अपराधों के लगभग 19 मुकदमे दर्ज थे। अपराध की दुनिया में उसकी सक्रियता के चलते प्रशासन ने वर्ष 2023 में गैंगस्टर एक्ट के तहत उसकी संपत्तियां भी कुर्क की थीं। पुलिस की कार्रवाई के बाद उसका परिवार देहरादून में रहने लगा था।
बताया जा रहा है कि घटना वाले दिन वरुण लुहारी एक पुराने मुकदमे की तारीख पर अदालत में पेश होने बागपत आया था। कोर्ट से निकलने के बाद उसने अपने साथियों के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि हमले की योजना कितने समय पहले बनाई गई थी और इसमें कितने लोग शामिल थे।
इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बाबूराम नामक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। मृतक कारोबारी परिवार के परिजनों की शिकायत पर हत्या समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अधीक्षक सूरज राय ने बताया कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दस विशेष टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं और जल्द ही अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
घटना के बाद पूरे बड़ौत क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। बाजार और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है।
व्यापारिक संगठनों ने इस घटना को कानून-व्यवस्था की बड़ी विफलता बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। व्यापारियों का कहना है कि यदि हिस्ट्रीशीटरों की गतिविधियों पर समय रहते प्रभावी निगरानी रखी जाती तो इतनी बड़ी घटना को रोका जा सकता था। वहीं स्थानीय लोगों का भी मानना है कि मुख्य बाजार और पुलिस चौकी के नजदीक हुई इस वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है। तीन मौतों के साथ समाप्त हुई यह पुरानी रंजिश क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोगों की निगाहें अब पुलिस कार्रवाई और आगे की जांच पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि इस खूनी संघर्ष में और कौन-कौन शामिल था तथा इस घटना के पीछे की पूरी साजिश क्या थी।


