पथ निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में बड़ा फोकस: बिहार में सड़क, बाईपास और पुल परियोजनाओं को समय पर पूरा करने का निर्देश

पटना: बिहार में सड़क अवसंरचना को आधुनिक और मजबूत बनाने की दिशा में पथ निर्माण विभाग ने अपनी गतिविधियों को और तेज कर दिया है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में चल रही सड़क, पुल, बाईपास और चौड़ीकरण परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा के दौरान विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित हो, यात्रा का समय कम हो और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिले।

इसी उद्देश्य को लेकर विभागीय सभागार में आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में उत्तर बिहार, दक्षिण बिहार और सीमांचल क्षेत्र में संचालित परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेन्द्र ने की। इस दौरान अधिकारियों ने विभिन्न जिलों में चल रहे निर्माण कार्यों की स्थिति, निर्माण में आने वाली बाधाओं, निर्धारित समयसीमा और गुणवत्ता संबंधी पहलुओं की जानकारी प्रस्तुत की।

राजधानी पटना की प्रमुख परियोजनाओं पर विशेष नजर

समीक्षा बैठक में राजधानी पटना में चल रही महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं पर विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि आशियाना मोड़ से ईदगाह तक सड़क चौड़ीकरण और निर्माण का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह परियोजना शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विभाग का लक्ष्य इसी महीने इस कार्य को पूरा करना है।

इसके अलावा मीठापुर-अनिसाबाद-खगौल रोड के समीप स्थित बापू टावर के आसपास सड़क निर्माण और सौंदर्यीकरण का काम भी तेजी से जारी है। यह परियोजना न केवल यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाएगी बल्कि राजधानी के शहरी स्वरूप को भी नया आयाम देगी। विभाग ने इसके लिए अक्टूबर 2026 तक की समयसीमा निर्धारित की है।

भगवत मिलन मंदिर चौराहा से जुड़ी सड़क के सुदृढ़ीकरण का कार्य भी अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अधिकारियों के अनुसार 30 जून 2026 तक यह परियोजना पूरी कर ली जाएगी। इससे स्थानीय लोगों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध होगी और आवागमन अधिक सुरक्षित बनेगा।

दक्षिण बिहार में सड़क नेटवर्क को मिल रही नई मजबूती

बैठक में दक्षिण बिहार क्षेत्र की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। मानिकपुर-बीथरा-सेनारी सड़क के सुदृढ़ीकरण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। फिलहाल केवल सड़क संकेतक और मार्किंग का कार्य शेष है। इसके पूर्ण होने के बाद क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।

इसी प्रकार राजगीर बाईपास रोड से जुड़े महत्वाकांक्षी कार्य की भी समीक्षा की गई। इस परियोजना के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग-32 को हसनपुर गांव से राजगीर स्पोर्ट्स अकादमी तक दो लेन से चार लेन में परिवर्तित किया जा रहा है। पर्यटन और खेल गतिविधियों के लिहाज से यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

आरा-मोहनिया मार्ग पर निर्माणाधीन कोचस बाईपास का कार्य भी निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप आगे बढ़ रहा है। इस बाईपास के बनने से भारी वाहनों का दबाव शहर के अंदरूनी हिस्सों से कम होगा और यात्रा अधिक सुगम बन सकेगी।

उत्तर बिहार में कनेक्टिविटी सुधारने की बड़ी पहल

उत्तर बिहार के जिलों में सड़क संपर्क को मजबूत करने के लिए कई परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है। समीक्षा बैठक में एकमा-मसरख सड़क के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण परियोजना की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई। यह सड़क क्षेत्रीय परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है और इसके पूरा होने से लोगों को बेहतर यातायात सुविधा मिलेगी। विभाग ने इसे जुलाई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

तेघरा-मुबारकपुर सड़क परियोजना भी सरकार की प्राथमिक योजनाओं में शामिल है। इस परियोजना के तहत लगभग 6.70 किलोमीटर लंबी सड़क और एक आरसीसी पुल का निर्माण किया जा रहा है। अधिकारियों ने जानकारी दी कि कार्य तेज गति से चल रहा है और अक्टूबर 2026 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से उत्तर बिहार के ग्रामीण इलाकों की पहुंच मुख्य मार्गों तक आसान होगी, जिससे कृषि, व्यापार और शिक्षा जैसे क्षेत्रों को भी लाभ मिलेगा।

सीमांचल क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही सड़क परियोजनाएं

बैठक में सीमांचल क्षेत्र के विकास कार्यों की भी गहन समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि अररिया जिले में लगभग 99.495 किलोमीटर लंबी विभिन्न सड़कों के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण का कार्य जारी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य जिले के विभिन्न हिस्सों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ना है।

कटिहार जिले में भी 63.66 किलोमीटर सड़क निर्माण और उन्नयन का कार्य प्रगति पर है। विशेष रूप से कुरूम-गायघट्टा वाया बलिया बेटोन सालमार सड़क परियोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। निर्माण एजेंसियों द्वारा मिट्टी भराई और आधारभूत संरचना का अधिकांश कार्य पूरा कर लिया गया है।

सीमांचल क्षेत्र में भारत-नेपाल सीमा सड़क परियोजना को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है। फतेहपुर से गलगलिया होते हुए पिलटोला तक लगभग 79.5 किलोमीटर लंबी मुख्य सड़क का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इस सड़क के बनने से सीमावर्ती क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था बेहतर होगी और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

बांका और भागलपुर में भी विकास कार्यों को गति

बांका जिले में अमरपुर बाईपास सड़क परियोजना पर तेजी से काम जारी है। लगभग 7.05 किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण से शहर के भीतर यातायात दबाव कम होगा और यात्रियों को अधिक सुविधाजनक मार्ग उपलब्ध होगा।

वहीं भागलपुर में भी महत्वपूर्ण सड़क संपर्क परियोजना को आगे बढ़ाया गया है। भागलपुर-हंसडीहा मुख्य मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग-80 से जोड़ने की दिशा में विभाग ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रोविजनल वर्क ऑर्डर जारी कर दिया है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद क्षेत्रीय परिवहन व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

गुणवत्ता और समयसीमा पर सरकार का सख्त रुख

समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री कुमार शैलेन्द्र ने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के लिए निरंतर निगरानी रखें।

उन्होंने यह भी कहा कि जहां कहीं भी कार्य में अनावश्यक देरी या लापरवाही सामने आएगी, वहां संबंधित संवेदकों और एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार चाहती है कि जनता को समय पर बेहतर सड़क सुविधाएं उपलब्ध हों और विकास परियोजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचे।

वन स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया में तेजी के निर्देश

बैठक में वन स्वीकृति से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विभाग द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए ताकि वन स्वीकृति से संबंधित मामलों का त्वरित निष्पादन हो सके।

साथ ही उन्होंने टेंडर प्रक्रिया को और अधिक तेज एवं पारदर्शी बनाने पर जोर दिया। उनका मानना है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी आने से परियोजनाओं के क्रियान्वयन में भी गति आएगी और विकास कार्य समय पर पूरे किए जा सकेंगे।

राज्य के विकास में अहम भूमिका निभाएंगी परियोजनाएं

बैठक के अंत में यह स्पष्ट किया गया कि राज्य सरकार की प्राथमिकता बिहार के दूरदराज क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ना है। सड़क, पुल और बाईपास परियोजनाओं के पूरा होने से न केवल यात्रा का समय कम होगा बल्कि व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी आसान बनेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं का प्रभाव केवल यातायात व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिलेगी। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, निवेश आकर्षित होगा और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी। यही कारण है कि राज्य सरकार इन परियोजनाओं को बिहार के समग्र विकास की आधारशिला मानकर तेजी से आगे बढ़ा रही है।

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