
सहरसा जिले में आवासीय विद्यालय से रहस्यमय तरीके से लापता हुए तीन छात्रों को पुलिस ने महज 48 घंटे के भीतर सकुशल बरामद कर एक बड़ी सफलता हासिल की है। छात्रों के अचानक गायब होने के बाद परिजनों, विद्यालय प्रबंधन और प्रशासन के बीच चिंता का माहौल बन गया था। हालांकि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया और तकनीकी जांच के आधार पर तीनों छात्रों को सुरक्षित खोज निकाला।
इस सफल अभियान के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली है, वहीं पुलिस की सक्रियता और त्वरित कार्रवाई की भी सराहना की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए शुरुआत से ही इसे प्राथमिकता के आधार पर लिया गया था, जिसके परिणामस्वरूप कम समय में छात्रों तक पहुंचने में सफलता मिली।
आवासीय विद्यालय से अचानक गायब हो गए थे छात्र
जानकारी के अनुसार यह मामला काशनगर थाना क्षेत्र स्थित आवासीय विद्यालय कैरियर मेकर से जुड़ा हुआ है। विद्यालय में अध्ययनरत तीन छात्र 4 जून की सुबह अचानक लापता हो गए थे। बताया गया कि सुबह करीब चार बजे तीनों छात्र बिना किसी को जानकारी दिए विद्यालय परिसर से बाहर निकल गए थे।
शुरुआत में विद्यालय प्रबंधन को लगा कि छात्र परिसर के किसी हिस्से में हो सकते हैं, लेकिन काफी खोजबीन के बाद भी उनका पता नहीं चला। इसके बाद विद्यालय प्रशासन की चिंता बढ़ गई और मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई गई।

लापता छात्रों की पहचान निरज कुमार, शिवम कुमार और आदित्य कुमार के रूप में हुई। तीनों छात्र एक साथ गायब होने के कारण मामला और भी गंभीर माना जा रहा था।
सूचना मिलते ही सक्रिय हुई पुलिस
छात्रों के लापता होने की सूचना मिलने के बाद काशनगर थाना पुलिस तुरंत सक्रिय हो गई। 5 जून को मामले की औपचारिक जानकारी मिलने पर थाना में कांड संख्या 48/26 दर्ज किया गया और जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
पुलिस अधिकारियों ने मामले को संवेदनशील मानते हुए तत्काल विद्यालय पहुंचकर जांच प्रारंभ की। चूंकि तीनों छात्र नाबालिग थे और उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता थी, इसलिए पुलिस ने हर पहलू को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई शुरू की।
अधिकारियों का मानना था कि शुरुआती घंटों में की गई कार्रवाई मामले के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसी वजह से जांच में किसी प्रकार की देरी नहीं की गई।
घटनास्थल का किया गया गहन निरीक्षण
मामले की जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों ने विद्यालय परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया। छात्रों के रहने वाले कमरों, विद्यालय परिसर के प्रवेश और निकास मार्गों तथा अन्य संभावित स्थानों की जांच की गई।
जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि छात्र किस रास्ते से बाहर निकले और उनके जाने के पीछे कोई विशेष कारण तो नहीं था। पुलिस ने विद्यालय प्रबंधन से भी घटना से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
इसके अलावा वैज्ञानिक जांच को ध्यान में रखते हुए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) टीम की भी सहायता ली गई। तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के माध्यम से छात्रों की गतिविधियों का पता लगाने का प्रयास किया गया।
ई-साक्ष्य पोर्टल पर दर्ज की गई जानकारी
जांच को और प्रभावी बनाने के लिए मामले को ई-साक्ष्य पोर्टल पर भी दर्ज किया गया। इससे जांच अधिकारियों को डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों को व्यवस्थित तरीके से एकत्र करने में मदद मिली।
आधुनिक तकनीक के उपयोग के कारण पुलिस को कई महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिनके आधार पर जांच की दिशा आगे बढ़ी। अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान समय में तकनीकी अनुसंधान अपराध और गुमशुदगी के मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
छात्रों की तलाश के लिए गठित हुई एसआईटी
मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। इस टीम में अनुभवी पुलिस अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल किया गया।
एसआईटी को छात्रों की हर संभव लोकेशन का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित बरामद करने की जिम्मेदारी दी गई। टीम ने लगातार विभिन्न स्रोतों से जानकारी एकत्र की और जांच को कई स्तरों पर आगे बढ़ाया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार एसआईटी के गठन के बाद जांच में तेजी आई और कई महत्वपूर्ण सुराग सामने आए।
सीसीटीवी फुटेज बने जांच का अहम आधार
जांच के दौरान पुलिस ने विद्यालय और आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। विद्यालय से बाहर जाने वाले संभावित रास्तों की रिकॉर्डिंग को बारीकी से देखा गया।
सीसीटीवी फुटेज से यह पता लगाने की कोशिश की गई कि छात्र किस दिशा में गए थे और क्या उनके साथ कोई अन्य व्यक्ति भी मौजूद था। फुटेज के विश्लेषण से जांच टीम को महत्वपूर्ण जानकारी मिली, जिसने आगे की कार्रवाई में मदद की।
इसके अलावा रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक स्थानों के कैमरों की भी जांच की गई।
परिजनों और शिक्षकों से भी हुई पूछताछ
पुलिस ने छात्रों के परिजनों, विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों से भी बातचीत की। जांच के दौरान यह जानने का प्रयास किया गया कि क्या छात्रों ने पहले कभी विद्यालय छोड़ने की बात कही थी या हाल के दिनों में उनके व्यवहार में कोई बदलाव देखा गया था।
परिजनों से छात्रों के मित्रों, रिश्तेदारों और परिचितों के बारे में भी जानकारी ली गई। पुलिस ने हर उस संभावना पर काम किया जिससे छात्रों तक पहुंचा जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार की पूछताछ से कई बार ऐसे सुराग मिल जाते हैं जो मामले को सुलझाने में मददगार साबित होते हैं।
मानसी रेलवे स्टेशन से मिली बड़ी सफलता
लगातार जांच और तकनीकी अनुसंधान के बाद पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली। शनिवार को करीब 1:30 बजे तीनों छात्रों को खगड़िया जिले के मानसी रेलवे स्टेशन से सकुशल बरामद कर लिया गया।
पुलिस टीम ने छात्रों को सुरक्षित अपने कब्जे में लिया और आवश्यक पूछताछ के बाद उन्हें उनके परिजनों के सुपुर्द करने की प्रक्रिया शुरू की। छात्रों के सुरक्षित मिलने की खबर जैसे ही परिजनों तक पहुंची, उनके चेहरे पर राहत लौट आई।
कई दिनों से चिंता और तनाव में जी रहे परिवारों के लिए यह खबर किसी बड़ी राहत से कम नहीं थी।
48 घंटे के भीतर सफल कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि छात्रों के लापता होने की सूचना मिलने के बाद लगातार अभियान चलाया गया और महज 48 घंटे के भीतर तीनों छात्रों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया।
अधिकारियों के अनुसार यह सफलता पुलिस टीम के समन्वित प्रयास, तकनीकी अनुसंधान और त्वरित कार्रवाई का परिणाम है। मामले को संवेदनशील मानते हुए हर स्तर पर गंभीरता बरती गई, जिससे समय रहते छात्रों को सुरक्षित खोजा जा सका।
आगे की कार्रवाई जारी
फिलहाल पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि छात्र विद्यालय से क्यों निकले थे और उनकी योजना क्या थी। उनसे पूछताछ कर घटना से जुड़े सभी तथ्यों की जानकारी जुटाई जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि मामले में आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। साथ ही भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
तीनों छात्रों की सकुशल बरामदगी ने न केवल उनके परिवारों को राहत दी है बल्कि यह भी साबित किया है कि समय पर की गई पुलिस कार्रवाई और आधुनिक तकनीकी जांच के माध्यम से जटिल मामलों को भी कम समय में सुलझाया जा सकता है। सहरसा पुलिस की इस सफलता को क्षेत्र में एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।


