
प्रशांत किशोर ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों और तथाकथित “कॉकरोच जनता पार्टी” के आंदोलन का समर्थन करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि लगातार पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों के मद्देनजर शिक्षा मंत्री को काफी पहले ही पद छोड़ देना चाहिए था।
बगहा में आयोजित जन सुराज की संगठनात्मक बैठक के दौरान मीडिया से बातचीत में प्रशांत किशोर ने कहा कि आज के समय में खबर यह नहीं है कि पेपर लीक हुआ, बल्कि बड़ी खबर तब बनती है जब कोई परीक्षा बिना किसी विवाद के संपन्न हो जाए।
“शिक्षा व्यवस्था में भारी घालमेल”
प्रशांत किशोर ने कहा कि हाल के दिनों में परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। उन्होंने दावा किया कि छात्रों ने स्वयं कई ऐसी खामियों को उजागर किया है, जिससे परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा है।
“बार-बार पेपर लीक, मूल्यांकन में गड़बड़ी और परीक्षा प्रणाली की खामियां बताती हैं कि जवाबदेही तय होनी चाहिए।” — प्रशांत किशोर
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को समर्थन
जन सुराज प्रमुख ने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ उनकी पार्टी मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
बिहार नवनिर्माण अभियान के तहत बगहा पहुंचे
इन दिनों प्रशांत किशोर बिहार भर में “बिहार नवनिर्माण अभियान” के तहत संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। इसी क्रम में बगहा में जिला कार्यकारिणी कार्यशाला और संगठनात्मक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए।
3-4 महीने में घर-घर पहुंचेगा जन सुराज
बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले तीन से चार महीनों में जन सुराज अपने विचार और बिहार परिवर्तन के संकल्प को राज्य के हर गांव और घर तक पहुंचाएगा।
महिलाओं से किए गए वादों पर भी उठाए सवाल
प्रशांत किशोर ने महिलाओं से किए गए चुनावी वादों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन अब तक उन्हें पूरा नहीं किया गया है।
तेजस्वी यादव की सुरक्षा पर क्या बोले?
Tejashwi Yadav की सुरक्षा व्यवस्था पर पूछे गए सवाल के जवाब में प्रशांत किशोर ने कहा कि यह सरकार और संबंधित व्यक्ति के बीच का विषय है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग किसी संवैधानिक पद पर नहीं हैं, उन्हें विशेष सुरक्षा देने की व्यवस्था पर पुनर्विचार होना चाहिए।
“बिहार के आम लोगों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए, न कि चुनिंदा नेताओं की सुरक्षा को स्टेटस सिंबल बनाया जाए।” — प्रशांत किशोर
उन्होंने कहा कि जनता के संसाधनों का उपयोग व्यापक जनसुरक्षा के लिए होना चाहिए और सुरक्षा व्यवस्था का निर्धारण वास्तविक खतरे के आकलन के आधार पर होना चाहिए।


