विक्रमशिला सेतु पर शुरू हुआ आवागमन: बेली ब्रिज के उद्घाटन के साथ मिली बड़ी राहत, 35 दिनों बाद फिर दौड़ी जिंदगी

भागलपुर। पूर्वी बिहार की जीवनरेखा माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु पर करीब एक महीने से अधिक समय तक यातायात प्रभावित रहने के बाद आखिरकार लोगों को बड़ी राहत मिल गई है। सेतु पर तैयार किए गए बेली ब्रिज का उद्घाटन होने के साथ ही छोटे वाहनों का परिचालन दोबारा शुरू कर दिया गया है। लंबे इंतजार के बाद पुल पर वाहनों की आवाजाही शुरू होने से भागलपुर, नवगछिया, कटिहार, पूर्णिया, मधेपुरा, सहरसा और कोसी-सीमांचल क्षेत्र के लाखों लोगों ने राहत की सांस ली है।

रविवार को आयोजित एक विशेष समारोह में बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र ने बेली ब्रिज का उद्घाटन किया। उद्घाटन के बाद छोटे वाहनों को पुल से गुजरने की अनुमति दी गई, जिससे कई दिनों से वैकल्पिक और लंबी दूरी वाले मार्गों का उपयोग कर रहे लोगों को बड़ी सुविधा मिली है।

3 मई से बंद था विक्रमशिला सेतु

गौरतलब है कि 3 मई 2026 की रात से विक्रमशिला सेतु पर यातायात प्रभावित हो गया था। पुल के एक हिस्से में तकनीकी समस्या सामने आने के बाद प्रशासन और पथ निर्माण विभाग ने सुरक्षा कारणों से आवागमन पर रोक लगा दी थी। इसके बाद क्षेत्र के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

भागलपुर और कोसी-सीमांचल क्षेत्र के बीच संपर्क का यह प्रमुख मार्ग बंद होने से हजारों वाहन प्रतिदिन प्रभावित हो रहे थे। यात्रियों को लंबा चक्कर लगाकर गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा था, जिससे समय और ईंधन दोनों की अतिरिक्त खपत हो रही थी।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने त्वरित समाधान के रूप में बेली ब्रिज निर्माण का निर्णय लिया। इसके बाद युद्धस्तर पर निर्माण कार्य शुरू किया गया।

रिकॉर्ड समय में तैयार हुआ बेली ब्रिज

बेली ब्रिज निर्माण कार्य को बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था। भीषण गर्मी और कठिन परिस्थितियों के बीच अभियंताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और श्रमिकों ने लगातार काम करते हुए निर्धारित समय से पहले निर्माण कार्य पूरा कर लिया।

उद्घाटन समारोह में पथ निर्माण मंत्री ने कहा कि इस परियोजना को पूरा करने में सीमा सड़क संगठन (BRO) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। उन्होंने बताया कि जिन विशेषज्ञों और इंजीनियरों को सामान्यतः पहाड़ी और ठंडे इलाकों में कार्य करने का अनुभव है, उन्होंने बिहार की भीषण गर्मी में भी दिन-रात मेहनत कर इस परियोजना को समय पर पूरा किया।

उन्होंने निर्माण कार्य में लगे सभी श्रमिकों, अभियंताओं और अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सीमित समय के भीतर इस चुनौतीपूर्ण कार्य को पूरा करना एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि लगभग 16 से 20 दिनों के अंदर इस महत्वपूर्ण संरचना को तैयार कर जनता को समर्पित किया गया है।

उद्घाटन समारोह में मौजूद रहे कई वरिष्ठ अधिकारी

बेली ब्रिज उद्घाटन समारोह में प्रशासन और पथ निर्माण विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल, जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी, वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

इस दौरान परियोजना में योगदान देने वाले अधिकारियों, अभियंताओं और कर्मियों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में निर्माण कार्य से जुड़े लोगों को उनके योगदान के लिए विशेष रूप से सराहा गया।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर तेजी से हुआ कार्य

समारोह के दौरान जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता थी कि विक्रमशिला सेतु पर आवागमन जल्द से जल्द बहाल किया जाए। इसी उद्देश्य से प्रशासन, पुलिस और विभिन्न विभागों ने समन्वय बनाकर लगातार काम किया।

उन्होंने बताया कि शुरुआत से ही लक्ष्य तय किया गया था कि 7 जून से पहले पुल को आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। प्रशासन ने यह वादा किया था और निर्धारित समय के भीतर उसे पूरा भी कर दिया गया।

जिलाधिकारी ने सीमा सड़क संगठन की टीम की सराहना करते हुए कहा कि उनके तकनीकी अनुभव और मेहनत की वजह से यह कार्य निर्धारित समय में पूरा हो सका। प्रशासन ने हर संभव सहयोग प्रदान किया ताकि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए।

छोटे वाहनों के लिए शुरू हुआ परिचालन

बेली ब्रिज शुरू होने के साथ फिलहाल छोटे वाहनों को पुल से गुजरने की अनुमति दी गई है। उद्घाटन के तुरंत बाद सैकड़ों वाहन पुल से होकर गुजरे और लोगों ने राहत महसूस की।

हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में यह व्यवस्था वन-वे यानी एक दिशा में नियंत्रित आवागमन के आधार पर संचालित होगी। वाहनों को क्रमवार गुजरने की अनुमति दी जाएगी ताकि सुरक्षा और यातायात व्यवस्था दोनों बनाए रखी जा सकें।

अधिकारियों का कहना है कि वाहन चालकों को कुछ समय तक धैर्य रखना होगा। कभी-कभी यातायात प्रबंधन के लिए कुछ मिनटों का इंतजार करना पड़ सकता है, लेकिन इससे पुल पर सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सकेगी।

सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क

प्रशासन का दावा है कि बेली ब्रिज पूरी तरह सुरक्षित है और इसकी क्षमता का कई स्तरों पर परीक्षण किया गया है। अधिकारियों के अनुसार निर्माण कार्य के दौरान भारी मशीनें, क्रेन और रोलर भी इस संरचना से गुजरे हैं।

यही वजह है कि पुल की मजबूती को लेकर किसी प्रकार की चिंता की आवश्यकता नहीं है। उद्घाटन के दिन भी बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों की आवाजाही सफलतापूर्वक कराई गई।

इसके अलावा प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि पुल की नियमित निगरानी और रखरखाव किया जाएगा। प्रतिदिन तकनीकी निरीक्षण किया जाएगा ताकि किसी भी संभावित समस्या की पहचान समय रहते की जा सके।

क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा

विक्रमशिला सेतु केवल एक पुल नहीं बल्कि पूर्वी बिहार की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। इसके माध्यम से व्यापार, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सेवाओं से जुड़े लाखों लोग प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होते हैं।

सेतु बंद होने के कारण व्यापारियों, किसानों, छात्रों और मरीजों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। अब आवागमन शुरू होने के बाद क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां फिर से गति पकड़ेंगी।

विशेष रूप से कोसी और सीमांचल क्षेत्र के लोगों को इसका बड़ा लाभ मिलेगा, क्योंकि भागलपुर उनके लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक, व्यावसायिक और स्वास्थ्य केंद्र है।

लोगों ने जताई खुशी

पुल खुलने की खबर मिलते ही आसपास के जिलों के लोगों में खुशी का माहौल देखा गया। कई वाहन चालक और स्थानीय नागरिक उद्घाटन के दिन ही पुल का उपयोग करने पहुंचे।

लोगों का कहना है कि पिछले एक महीने से अधिक समय से उन्हें लंबी दूरी तय करनी पड़ रही थी, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो रही थी। अब पुल शुरू होने से उनकी दैनिक जिंदगी फिर सामान्य हो सकेगी।

विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज का उद्घाटन केवल यातायात बहाली नहीं बल्कि लाखों लोगों के लिए राहत, सुविधा और विश्वास की वापसी का प्रतीक बन गया है। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी पुल की सुरक्षा और सुचारु संचालन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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