आंध्र प्रदेश में मजदूरी करने गए पूर्णिया के युवकों पर टूटा कहर, 4 की मौत; कई मजदूर गंभीर बीमारी से जूझ रहे

पूर्णिया: बेहतर कमाई और परिवार की खुशहाली का सपना लेकर बिहार से आंध्र प्रदेश गए मजदूरों के घरों में आज मातम पसरा हुआ है। पूर्णिया जिले के कसबा प्रखंड के कई युवा रोजगार की तलाश में आंध्र प्रदेश की एक मिनरल फैक्ट्री में काम करने गए थे, लेकिन वहां की जहरीली धूल उनके लिए जानलेवा साबित हुई। अब तक चार मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं।

एक महीने में 4 मजदूरों की मौत

कसबा प्रखंड के जियनगंज, तारानगर और आसपास के गांवों में लगातार हो रही मौतों से कोहराम मचा हुआ है। मृतकों में जियनगंज निवासी 22 वर्षीय मो. मसद, तारानगर के कुंदन कुमार, सर्रा बथना के अरविंद कुमार ऋषि और जियनगंज के मो. मुस्तफा शामिल हैं।

परिजनों के अनुसार, कुछ मजदूरों की मौत आंध्र प्रदेश में ही हुई, जबकि कुछ बीमार हालत में गांव लौटे और इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

टैल्क पाउडर फैक्ट्री में करते थे काम

बीमार होकर लौटे मजदूरों का कहना है कि उन्हें आंध्र प्रदेश की एक मिनरल फैक्ट्री में पत्थरों को पीसकर टैल्क पाउडर बनाने का काम दिया गया था। फैक्ट्री के अंदर लगातार उड़ने वाली बारीक धूल के बीच मजदूर घंटों काम करते थे।

मजदूरों का आरोप है कि कंपनी की ओर से पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए, जिसके कारण जहरीली धूल सीधे उनके फेफड़ों में पहुंचती रही।

“गांव का आदमी काम दिलाने के लिए लेकर गया था। हम तो वापस आने की उम्मीद भी छोड़ चुके थे। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।”
— मो. सादिक, बीमार मजदूर

सांस लेने में हो रही परेशानी

गांव लौटे कई मजदूर आज भी गंभीर रूप से बीमार हैं। कुछ अस्पतालों में भर्ती हैं तो कुछ घरों में ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि बीमारी के इलाज में लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं।

कई परिवारों ने अपने मवेशी और जमीन तक बेच दी, लेकिन मरीजों की हालत में खास सुधार नहीं हो रहा है।

“इलाज के लिए मवेशी तक बेच दिए। आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है, लेकिन बीमारी कम होने का नाम नहीं ले रही।”
— परिजन

गांव में डर और मातम का माहौल

लगातार मौतों और बीमारी के मामलों ने पूरे इलाके में भय का माहौल पैदा कर दिया है। हर घर में चिंता और दर्द का माहौल है। किसी मां ने अपना बेटा खो दिया तो किसी पत्नी का जीवनसाथी छिन गया।

स्थानीय लोग अब पूरे मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

विधायक ने मदद का दिया भरोसा

मामले की जानकारी मिलने के बाद कसबा विधायक Nitesh Singh प्रभावित गांव पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की।

उन्होंने कहा कि सभी बीमार मजदूरों का इलाज कराया जाएगा और गांव लौटे अन्य मजदूरों की भी स्वास्थ्य जांच कराई जाएगी। साथ ही पूरे मामले में एफआईआर दर्ज कराने की बात भी कही।

“जो भी मजदूर बीमार हैं, उनका इलाज कराया जाएगा। सभी लौटे हुए श्रमिकों का मेडिकल चेकअप होगा और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।”
— नितेश सिंह, विधायक

स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच

पूर्णिया के सिविल सर्जन Dr. Pramod Kumar Kanojia ने बताया कि प्रभावित गांवों में मेडिकल टीम भेजी गई है। मजदूरों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है और नमूने सुरक्षित रखे गए हैं।

डॉक्टरों का मानना है कि पत्थर और खनिज धूल के लंबे समय तक संपर्क में रहने से फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

धूल से कैसे होती है बीमारी?

विशेषज्ञों के अनुसार, पत्थर या खनिज पदार्थों की बारीक धूल लगातार सांस के जरिए फेफड़ों में जमा होती रहती है। समय के साथ यह फेफड़ों में संक्रमण, सूजन और स्थायी क्षति का कारण बन सकती है। इससे मरीज को सांस लेने में परेशानी, ऑक्सीजन की कमी और गंभीर फेफड़ों की बीमारी हो सकती है।

पूर्णिया का यह मामला एक बार फिर प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा, कार्यस्थलों पर स्वास्थ्य मानकों और श्रमिकों के अधिकारों को लेकर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। अब पीड़ित परिवारों की नजर सरकार और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।

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