बिहार विधान परिषद चुनाव में बढ़ा सस्पेंस, NDA के 10 उम्मीदवार लगभग तय; RJD उतारेगा प्रत्याशी तो होगी वोटिंग

पटना: बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए 18 जून को होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। सत्तारूढ़ एनडीए के प्रमुख घटक दलों भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अपने-अपने चार-चार उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। अब बची हुई दो सीटों पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के उम्मीदवारों के उतरने की संभावना है। ऐसे में यदि महागठबंधन भी अपना प्रत्याशी मैदान में उतारता है तो चुनाव निर्विरोध नहीं होगा और मतदान की नौबत आ सकती है।

JDU ने घोषित किए चार उम्मीदवार

जनता दल यूनाइटेड ने विधान परिषद चुनाव के लिए जिन चार उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है, उनमें निशांत कुमार, डॉ. भारती मेहता, शिवरानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद शामिल हैं। इनमें ललन प्रसाद को उपचुनाव वाली सीट के लिए उम्मीदवार बनाया गया है।

BJP ने भी जारी की चार नामों की सूची

भारतीय जनता पार्टी ने भी अपने कोटे से चार उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। पार्टी ने भोजपुरी अभिनेता और गायक Pawan Singh, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता Sanjay Mayukh, अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित को उम्मीदवार बनाया है।

दीपक प्रकाश का विधान परिषद जाना लगभग तय

राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख Upendra Kushwaha के पुत्र दीपक प्रकाश के भी विधान परिषद पहुंचने की संभावना प्रबल मानी जा रही है। वर्तमान में वे बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार छह महीने के भीतर उन्हें किसी सदन का सदस्य बनना आवश्यक है।

वहीं Chirag Paswan की पार्टी एलजेपी (रामविलास) भी एक सीट पर अपना उम्मीदवार उतार सकती है।

क्या RJD उतारेगा उम्मीदवार?

विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से एनडीए को नौ और महागठबंधन को एक सीट मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि यदि कुल 11 उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं तो मतदान के जरिए परिणाम तय होगा।

महागठबंधन की ओर से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) एक उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। राजनीतिक गलियारों में Tej Pratap Yadav और Rohini Acharya के नामों की चर्चा हो रही है।

राजद प्रवक्ता एजाज अहमद का कहना है कि महागठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल है और एक सीट पर जीत सुनिश्चित करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

क्या राज्यसभा चुनाव जैसा होगा ‘खेला’?

राजनीतिक जानकारों की नजर इस बात पर भी है कि कहीं राज्यसभा चुनाव जैसी स्थिति दोबारा न बन जाए। पिछले राज्यसभा चुनाव में विपक्षी खेमे के कुछ विधायकों द्वारा वोट नहीं डालने के कारण एनडीए को फायदा मिला था।

विधान परिषद चुनाव में एक उम्मीदवार को जीत के लिए 26 वोटों की आवश्यकता होगी। महागठबंधन के पास सैद्धांतिक रूप से पर्याप्त संख्या है, लेकिन क्रॉस वोटिंग या अनुपस्थित रहने वाले विधायकों की आशंका विपक्ष के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

अंतिम सीट पर हो सकता है रोचक मुकाबला

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि RJD और LJP (रामविलास) दोनों अपने उम्मीदवार मैदान में उतारते हैं, तो अंतिम सीट के लिए मुकाबला बेहद दिलचस्प हो सकता है। ऐसे में क्रॉस वोटिंग, रणनीतिक समर्थन और विधायकों की एकजुटता चुनाव परिणाम में अहम भूमिका निभा सकती है।

किन सीटों के लिए हो रहा है चुनाव?

18 जून को नौ नियमित सीटों और एक उपचुनाव वाली सीट पर मतदान होना है। जिन विधान पार्षदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें कुमुद वर्मा, गुलाम गौस, मोहम्मद फारूक, भीष्म साहनी, संजय प्रकाश, समीर कुमार सिंह और सुनील कुमार सिंह शामिल हैं। इसके अलावा Samrat Choudhary और भगवान सिंह कुशवाहा के विधायक बनने के बाद उनकी सीटें भी रिक्त हैं।

एक सीट पर होगा उपचुनाव

पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar द्वारा राज्यसभा सदस्य बनने के बाद विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देने के कारण एक सीट खाली हुई थी। इस सीट पर भी 18 जून को उपचुनाव कराया जाएगा। इस सीट पर निर्वाचित सदस्य का कार्यकाल 6 मई 2030 तक रहेगा।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि महागठबंधन अपना उम्मीदवार घोषित करता है या नहीं। यदि विपक्ष मैदान में उतरता है, तो बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 में मतदान और राजनीतिक रणनीति दोनों देखने को मिल सकती हैं।

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