भागलपुर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से मचा हड़कंप, तीन मकानों पर चला बुलडोजर; पांच भूमिहीन परिवारों को मिली अस्थायी राहत

भागलपुर: भागलपुर जिले के जगदीशपुर प्रखंड अंतर्गत बैजानी पंचायत के जमीन गांव में बुधवार को प्रशासन द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। सरकारी भूमि से कब्जा हटाने के लिए पहुंची प्रशासनिक टीम ने तीन मकानों को ध्वस्त कर दिया, जबकि पांच अन्य परिवारों को फिलहाल राहत प्रदान की गई। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों में नाराजगी देखने को मिली। जिन लोगों के मकान तोड़े गए उन्होंने प्रशासनिक निर्णय पर सवाल उठाते हुए इसे अन्यायपूर्ण बताया। वहीं प्रशासन का कहना है कि जांच के दौरान जिन परिवारों के पास वैकल्पिक भूमि उपलब्ध पाई गई, उनके खिलाफ ही कार्रवाई की गई है। दूसरी ओर जिन परिवारों को भूमिहीन पाया गया, उन्हें सरकारी नियमों के तहत फिलहाल बेदखल नहीं किया जा सकता।

जमीन गांव में सुबह से ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर हलचल शुरू हो गई थी। प्रशासनिक अधिकारियों, राजस्व कर्मियों और पुलिस बल की टीम निर्धारित स्थल पर पहुंची। इसके बाद चिन्हित अतिक्रमण वाले क्षेत्रों की मापी और जांच प्रक्रिया पूरी कर बुलडोजर की मदद से अवैध कब्जा हटाने का काम शुरू किया गया। देखते ही देखते तीन मकानों को ध्वस्त कर दिया गया, जिससे संबंधित परिवारों के बीच आक्रोश फैल गया।

कार्रवाई से प्रभावित लोगों का कहना है कि वे कई पीढ़ियों से उस जमीन पर रह रहे थे। स्थानीय निवासी मदन शर्मा ने बताया कि उनका परिवार लगभग एक शताब्दी से अधिक समय से उस स्थान पर निवास कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि जमीन से जुड़ा मामला न्यायालय में विचाराधीन है और इस संबंध में टाइटल सूट भी चल रहा है। इसके अलावा उच्च न्यायालय में भी मामले की सुनवाई जारी है। ऐसे में प्रशासन को अंतिम न्यायिक निर्णय आने तक इंतजार करना चाहिए था।

मदन शर्मा ने कहा कि मकान टूट जाने से उनका पूरा परिवार संकट में आ गया है। वर्षों की मेहनत और जमा पूंजी से बनाए गए घर को कुछ ही घंटों में ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने प्रशासन से इस कार्रवाई पर पुनर्विचार करने और प्रभावित परिवारों को राहत देने की मांग की है।

वहीं एक अन्य प्रभावित पक्ष की सदस्य पूजा कुमारी ने भी प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि यदि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण हटाना ही उद्देश्य है तो पूरे क्षेत्र में समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव में कई अन्य स्थानों पर भी अतिक्रमण है, लेकिन वहां कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्षता बरतने और प्रभावित परिवारों को हुए नुकसान की भरपाई करने की मांग की।

घटना के बाद गांव में इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई कि आखिर कुछ परिवारों के खिलाफ कार्रवाई हुई जबकि अन्य को राहत क्यों दी गई। इस संबंध में जगदीशपुर अंचल कार्यालय की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई। अंचल अधिकारी ने बताया कि सरकारी भूमि पर वर्षों से कब्जा किए हुए कुल आठ परिवारों की पहचान की गई थी। इन सभी परिवारों की स्थिति की जांच राजस्व कर्मचारियों और अमीन की सहायता से कराई गई थी।

जांच के दौरान यह पाया गया कि आठ में से पांच परिवार ऐसे हैं जिनके पास रहने के लिए अन्यत्र कोई भूमि उपलब्ध नहीं है। प्रशासनिक रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्हें भूमिहीन की श्रेणी में रखा गया। सरकार की वर्तमान नीति के अनुसार भूमिहीन परिवारों को वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराए बिना बेदखल नहीं किया जा सकता। इसी कारण इन परिवारों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई नहीं की गई और उन्हें अस्थायी राहत प्रदान की गई।

अंचल अधिकारी ने बताया कि जिन तीन परिवारों के मकान हटाए गए हैं, उनके संबंध में जांच में यह तथ्य सामने आया कि उनके पास अन्य स्थानों पर भूमि उपलब्ध है। प्रशासन के अनुसार जब किसी व्यक्ति के पास वैकल्पिक भूमि मौजूद हो और वह सरकारी जमीन पर कब्जा बनाए रखे, तो नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा सकती है। इसी आधार पर संबंधित परिवारों के कब्जे को हटाया गया।

हालांकि प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि पांच भूमिहीन परिवारों को मिली राहत स्थायी नहीं है। अधिकारियों के अनुसार इन परिवारों की स्थिति की दोबारा जांच कराई जाएगी। यदि पुनः जांच में यह पाया जाता है कि उनके नाम पर कहीं और जमीन मौजूद है या उन्होंने तथ्यों को छिपाया है, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए राजस्व विभाग को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना उसकी जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में न्यायालय और सरकार के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाती है। अधिकारियों के अनुसार सार्वजनिक उपयोग और विकास योजनाओं के लिए सरकारी भूमि का संरक्षण आवश्यक है, इसलिए समय-समय पर अतिक्रमण हटाने के अभियान चलाए जाते हैं।

कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के भी विशेष इंतजाम किए गए थे। बाईपास थाना क्षेत्र होने के कारण पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। मौके पर बाईपास थाना अध्यक्ष सुमन कुमार राय के नेतृत्व में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। इसके अलावा कई प्रशासनिक अधिकारी, राजस्व कर्मचारी और स्थानीय प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में ग्रामीण भी घटनास्थल पर जुटे रहे और पूरी कार्रवाई को देखते रहे।

गांव के कई लोगों का कहना है कि प्रशासन को ऐसे मामलों में पहले से व्यापक संवाद स्थापित करना चाहिए ताकि प्रभावित परिवारों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिल सके। वहीं कुछ लोगों ने सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कार्रवाई का समर्थन भी किया और कहा कि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए।

फिलहाल जमीन गांव में हुई इस कार्रवाई के बाद माहौल चर्चा और विवाद का विषय बना हुआ है। प्रभावित परिवार न्यायिक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, जबकि प्रशासन अपने फैसले को नियमों के अनुरूप बता रहा है। आने वाले दिनों में पुनः होने वाली जांच और प्रशासनिक निर्णयों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। यह मामला अब केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि भूमिहीन परिवारों के अधिकार, सरकारी भूमि की सुरक्षा और प्रशासनिक कार्रवाई की पारदर्शिता जैसे कई महत्वपूर्ण सवालों को भी सामने ला रहा है।

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