
मुजफ्फरपुर: रात के करीब तीन बजे का समय था। अस्पताल के आईसीयू में भर्ती मरीज जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे थे। मशीनों की आवाजों के बीच अचानक धुआं उठना शुरू हुआ। कुछ ही मिनटों में धुआं इतना घना हो गया कि सांस लेना मुश्किल हो गया। इसके बाद जो मंजर सामने आया, उसने पूरे मुजफ्फरपुर को झकझोर कर रख दिया।
ब्रह्मपुरा स्थित प्रसाद अस्पताल के आईसीयू में लगी भीषण आग में अब तक पांच मरीजों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए हैं। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने की संभावित वजह माना जा रहा है।
पांचवीं मंजिल के ICU में लगी आग
जानकारी के अनुसार, प्रसाद अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित आईसीयू में आग लगी थी। उस समय वहां 13 मरीज भर्ती थे। आग लगने के बाद कुछ ही देर में पूरे वार्ड में धुआं फैल गया और अफरा-तफरी मच गई।
हालात इतने खराब हो गए कि मरीजों को निकालने के लिए खिड़कियां और दरवाजे तक तोड़ने पड़े। दमकल कर्मियों और स्थानीय लोगों की मदद से कई मरीजों को बाहर निकाला गया, लेकिन पांच लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी।
“मेरे पिता को एक घंटे बाद बाहर निकाला गया”
हादसे में अपने पिता को खो चुके कुमार सत्यम ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता को 1 जून को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
कुमार सत्यम के अनुसार, घटना के समय वह पहली मंजिल के वेटिंग हॉल में मौजूद थे। तभी अचानक आईसीयू में आग लग गई और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
उन्होंने कहा कि जब लोग जान बचाने के लिए नीचे भाग रहे थे, तब उनके पिता आईसीयू में फंसे रह गए। उनका आरोप है कि पिता को करीब एक घंटे बाद बाहर निकाला गया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
“स्टाफ नहीं था, मरीज को खुद उठाकर लाया”
एक अन्य मरीज के परिजन निकेश कुमार ने भी अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि आग लगने के दौरान अस्पताल में पर्याप्त स्टाफ मौजूद नहीं था।
निकेश कुमार के मुताबिक, जो मरीज चलने-फिरने की स्थिति में थे वे किसी तरह नीचे आ गए, लेकिन कई गंभीर मरीज धुएं और आग की चपेट में आ गए। उन्होंने दावा किया कि उन्हें अपने मरीज को खुद उठाकर बाहर लाना पड़ा।
20 मरीजों को सुरक्षित निकाला गया
आग लगने के बाद पूरे अस्पताल भवन में जहरीला धुआं फैल गया। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया।
प्रशासन के अनुसार, करीब 20 मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इनमें कई मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है और उनका विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
शॉर्ट सर्किट की आशंका, जांच शुरू
मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आईसीयू वार्ड में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका सामने आई है।
उन्होंने कहा कि आग लगने के बाद कुछ ही देर में पूरे आईसीयू में धुआं भर गया, जिससे वहां भर्ती गंभीर मरीजों की स्थिति और खराब हो गई। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और घटना के सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
कई सवालों के जवाब बाकी
इस दर्दनाक हादसे के बाद अस्पताल में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, आपातकालीन निकासी प्रणाली और आईसीयू प्रबंधन को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। मृतकों के परिजनों का आरोप है कि यदि समय पर राहत और बचाव कार्य होता तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।
फिलहाल प्रशासन जांच में जुटा है और पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वहीं, मुजफ्फरपुर का यह अग्निकांड राज्य के निजी अस्पतालों में सुरक्षा मानकों को लेकर नई बहस छेड़ गया है।


