बिहार विधान परिषद चुनाव से पहले महागठबंधन में सीट को लेकर हलचल, AIMIM ने RJD से मांगी एक सीट

पटना। बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्षी महागठबंधन दोनों ही अपने-अपने उम्मीदवारों और रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। इसी बीच महागठबंधन की राजनीति में एक नया मोड़ तब आ गया जब एआईएमआईएम (AIMIM) ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से विधान परिषद की एक सीट की मांग कर दी। पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने खुलकर कहा है कि यदि भविष्य में राजनीतिक रिश्तों को मजबूत बनाए रखना है तो आरजेडी को एआईएमआईएम को मौका देना चाहिए।

अख्तरुल इमान के इस बयान के बाद बिहार की राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधान परिषद चुनाव भले ही संख्या बल के आधार पर तय माना जा रहा हो, लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर सहयोगी दलों के बीच खींचतान महागठबंधन के लिए नई चुनौती खड़ी कर सकती है।

विधान परिषद चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक सक्रियता

बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर चुनाव होने वाला है। इनमें नौ सीटों पर नियमित चुनाव कराया जाएगा, जबकि एक सीट पर उपचुनाव होगा। चुनाव की घोषणा के बाद से ही सभी दल अपने-अपने राजनीतिक समीकरणों को मजबूत करने में लगे हुए हैं।

एनडीए और महागठबंधन दोनों ही चुनावी गणित का आकलन कर रहे हैं। विधानसभा में मौजूद विधायकों की संख्या के आधार पर सीटों का संभावित बंटवारा लगभग स्पष्ट माना जा रहा है। हालांकि राजनीतिक सहयोगियों की मांगें और आंतरिक समीकरण इस प्रक्रिया को रोचक बना रहे हैं।

इसी क्रम में एआईएमआईएम ने अपनी राजनीतिक दावेदारी पेश करते हुए महागठबंधन में एक सीट की मांग कर दी है। पार्टी का कहना है कि उसने अतीत में आरजेडी का साथ दिया था और अब बदले में उसे भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

अख्तरुल इमान ने याद दिलाया पुराना वादा

मीडिया से बातचीत के दौरान एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने कहा कि उनकी पार्टी पहले भी राज्यसभा सीट की मांग कर चुकी थी। उस समय आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने उन्हें आश्वासन दिया था कि भविष्य में उनके लिए अवसर देखा जाएगा।

अख्तरुल इमान ने कहा कि अब वह समय आ गया है जब उस वादे को पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि राजनीतिक सहयोग और विश्वास बनाए रखना है तो एआईएमआईएम को भी उचित सम्मान और प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

उन्होंने संकेत दिया कि इस मुद्दे पर जल्द ही तेजस्वी यादव से मुलाकात की जा सकती है। उनका कहना था कि पार्टी अपनी मांग को लेकर गंभीर है और इसके लिए औपचारिक बातचीत भी करेगी।

सहयोग की राजनीति का दिया हवाला

एआईएमआईएम नेता ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ने पहले भी विपक्षी एकजुटता के समय सहयोग किया था। उन्होंने दावा किया कि जब राज्यसभा चुनाव के दौरान विपक्षी खेमे को समर्थन की जरूरत थी, तब उनकी पार्टी ने सहयोग प्रदान किया था।

अख्तरुल इमान ने कहा कि राजनीति केवल चुनावी गणित का विषय नहीं है, बल्कि भरोसे और सहयोग पर भी आधारित होती है। यदि भविष्य में भी दोनों दलों के बीच अच्छे संबंध बनाए रखने हैं तो एआईएमआईएम की मांग पर सकारात्मक विचार किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के पास विधान परिषद सीट जीतने के लिए अपने दम पर पर्याप्त संख्या नहीं है, लेकिन राजनीतिक सहयोग के माध्यम से यह संभव हो सकता है। इसलिए वे चाहते हैं कि आरजेडी उनकी दावेदारी को गंभीरता से ले।

महागठबंधन के लिए नई चुनौती

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एआईएमआईएम की यह मांग महागठबंधन के भीतर नई चर्चा का विषय बन सकती है। आरजेडी पहले से ही अपने उम्मीदवार को विधान परिषद भेजने की तैयारी में है और ऐसे में सीट साझा करने का फैसला आसान नहीं होगा।

महागठबंधन के भीतर कांग्रेस, वाम दल और अन्य सहयोगी दल भी अपनी-अपनी राजनीतिक भूमिका को लेकर सक्रिय रहते हैं। ऐसे में किसी अतिरिक्त दल को सीट देना राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण फैसला हो सकता है।

हालांकि एआईएमआईएम का दावा है कि उसने कई मौकों पर विपक्षी राजनीति को मजबूती देने का काम किया है, इसलिए उसकी मांग को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

विधान परिषद चुनाव का गणित क्या कहता है?

बिहार विधान परिषद चुनाव में जीत का आधार विधायकों का वोट होता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार एक उम्मीदवार को जीत के लिए लगभग 25 वोटों की आवश्यकता होगी।

वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर नजर डालें तो एनडीए के पास विधानसभा में लगभग 202 विधायकों का समर्थन है। इस संख्या के आधार पर गठबंधन को आठ सीटों पर जीत मिलने की संभावना जताई जा रही है।

दूसरी ओर महागठबंधन के पास करीब 35 विधायकों का समर्थन है। इस गणित के आधार पर विपक्षी गठबंधन के खाते में एक सीट जाना लगभग तय माना जा रहा है।

यही वह सीट है जिस पर एआईएमआईएम अपनी दावेदारी पेश कर रही है। हालांकि अंतिम फैसला आरजेडी नेतृत्व को करना है कि वह सीट अपने उम्मीदवार को देती है या सहयोगी दल को मौका देने का जोखिम उठाती है।

तेजस्वी यादव के सामने राजनीतिक संतुलन की चुनौती

अख्तरुल इमान के बयान के बाद अब सभी की नजरें नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर टिकी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके सामने राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी।

यदि आरजेडी सीट अपने पास रखती है तो एआईएमआईएम में नाराजगी बढ़ सकती है। वहीं यदि सीट सहयोगी दल को दी जाती है तो पार्टी के भीतर भी सवाल उठ सकते हैं। ऐसे में तेजस्वी यादव को संगठनात्मक हित और गठबंधन की राजनीति के बीच संतुलन बनाना होगा।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए विपक्षी एकता बनाए रखना महागठबंधन की प्राथमिकता हो सकती है। ऐसे में सीट बंटवारे को लेकर होने वाली बातचीत का असर भविष्य की राजनीति पर भी पड़ सकता है।

सीमांचल की राजनीति में AIMIM की भूमिका

एआईएमआईएम पिछले कुछ वर्षों में बिहार की राजनीति, विशेषकर सीमांचल क्षेत्र में अपनी पहचान मजबूत करने की कोशिश करती रही है। पार्टी का मानना है कि सीमांचल के कई इलाकों में उसका जनाधार मौजूद है और उसे राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

हालांकि समय-समय पर पार्टी के कई विधायक अन्य दलों में शामिल हो चुके हैं, लेकिन एआईएमआईएम अभी भी बिहार में अपनी राजनीतिक उपस्थिति बनाए रखने के प्रयास में जुटी हुई है। विधान परिषद सीट की मांग को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

क्या होगा महागठबंधन का फैसला?

फिलहाल एआईएमआईएम की मांग ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि आरजेडी नेतृत्व इस मांग पर क्या रुख अपनाता है। यदि दोनों दलों के बीच बातचीत होती है तो महागठबंधन के अंदर नए राजनीतिक समीकरण बन सकते हैं।

विधान परिषद चुनाव भले ही संख्या बल के आधार पर तय माना जा रहा हो, लेकिन सीटों के बंटवारे और सहयोगी दलों की दावेदारी ने इस चुनाव को राजनीतिक रूप से दिलचस्प बना दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तेजस्वी यादव एआईएमआईएम की मांग को स्वीकार करते हैं या फिर सीट को आरजेडी के खाते में ही रखते हैं। आने वाले दिनों में होने वाले फैसले बिहार की विपक्षी राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • ये भी पढ़े..

    CJP आंदोलन पर बोले जेपी नड्डा: “पेपर लीक पर राजनीति नहीं, संसद में हो चर्चा”; राहुल गांधी पर साधा निशाना

    Share Add as a preferred…

    बी-टेक (लेटरल एंट्री) में नामांकन का पहला सीट आवंटन 25 जुलाई को, 23 जुलाई तक करें चॉइस फिलिंग

    Share Add as a preferred…