
पटना। बिहार में गन्ना उत्पादक किसानों के सामने खड़ी चुनौतियों को लेकर राज्य सरकार ने गंभीर रुख अपनाया है। यूरिया की उपलब्धता, खेतों में जल-जमाव और गन्ने की फसल पर बढ़ते संकट को देखते हुए कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है। मंगलवार को बिहार शुगर मिल्स एसोसिएशन (BSMA) के प्रतिनिधिमंडल ने कृषि मंत्री से मुलाकात कर गन्ना किसानों की विभिन्न समस्याओं से अवगत कराया और उनके समाधान के लिए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के गन्ना किसानों के सामने मौजूद चुनौतियों का विस्तार से उल्लेख किया। इसके बाद कृषि मंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि किसानों की समस्याओं के समाधान में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी परिस्थिति में किसानों को परेशानी का सामना नहीं करने दिया जाएगा।
गन्ना उत्पादन से जुड़े लाखों किसान प्रभावित
बैठक में बिहार शुगर मिल्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने बताया कि वर्तमान समय में बिहार में 10 चीनी मिलें संचालित हो रही हैं, जिनसे लगभग ढाई लाख किसान प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। राज्य में करीब 2.60 लाख हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की खेती की जाती है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार है।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इस समय गन्ने की फसल अपने सबसे महत्वपूर्ण विकास चरण से गुजर रही है। कृषि विज्ञान की भाषा में इसे ‘ग्रैंड ग्रोथ पीरियड’ कहा जाता है। इस दौरान फसल की तेज बढ़वार होती है और उसे पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। विशेष रूप से यूरिया का उपयोग इस चरण में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
प्रतिनिधियों ने मंत्री को अवगत कराया कि कई क्षेत्रों में किसानों को समय पर यूरिया उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण फसल प्रभावित होने लगी है। खेतों में गन्ने की पत्तियां पीली पड़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे किसानों के बीच चिंता बढ़ गई है। यदि समय पर उर्वरक उपलब्ध नहीं हुआ तो उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
यूरिया संकट पर तत्काल सक्रिय हुआ कृषि विभाग
गन्ना किसानों की समस्याएं सुनने के बाद कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की। उन्होंने कृषि विभाग के प्रधान सचिव और कृषि निदेशक को निर्देश दिया कि गन्ना किसानों और चीनी मिलों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
मंत्री ने स्पष्ट कहा कि राज्य में उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और किसानों को किसी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां भी वितरण व्यवस्था में समस्या है, वहां तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति को सामान्य बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल उर्वरक उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि किसानों तक सही समय पर और आवश्यक मात्रा में उर्वरक पहुंचे। इसके लिए विभागीय स्तर पर निगरानी बढ़ाने और स्थानीय प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया।
मिट्टी जांच के आधार पर उर्वरक उपयोग की सलाह
बैठक के दौरान कृषि मंत्री ने किसानों से वैज्ञानिक खेती अपनाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि किसानों को बिना आवश्यकता अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं करना चाहिए। इसके बजाय मिट्टी की जांच कराकर आवश्यकतानुसार ही उर्वरक का प्रयोग करना अधिक लाभदायक होगा।
उन्होंने कहा कि लगातार रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसलिए किसानों को जैविक और प्राकृतिक उर्वरकों के उपयोग पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी, बल्कि उत्पादन लागत में भी कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जैविक खाद और प्राकृतिक पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग से फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है और लंबे समय तक भूमि की उत्पादकता सुरक्षित रहती है।
जल-जमाव बना किसानों के लिए दूसरी बड़ी चुनौती
बैठक में प्रतिनिधिमंडल ने यूरिया के अलावा जल-जमाव की समस्या को भी प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाया। कई जिलों में गन्ने के खेतों में पानी जमा होने के कारण फसल प्रभावित हो रही है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से पौधों की वृद्धि बाधित होती है और उत्पादन पर असर पड़ता है।
इस पर कृषि मंत्री ने कहा कि जल-जमाव की समस्या केवल कृषि विभाग के स्तर पर हल नहीं की जा सकती। इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लघु जल संसाधन विभाग के सहयोग से जल निकासी की प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाएगी ताकि किसानों को राहत मिल सके।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जल-जमाव वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां स्थायी समाधान की दिशा में कार्य किया जाए। साथ ही स्थानीय स्तर पर जल निकासी से जुड़े प्रस्तावों को प्राथमिकता दी जाए।
तीन विभागों की संयुक्त बैठक जल्द
गन्ना किसानों की समस्याओं के दीर्घकालिक समाधान के लिए कृषि मंत्री ने एक महत्वपूर्ण निर्णय भी लिया। उन्होंने कृषि विभाग, लघु जल संसाधन विभाग और सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त विशेष बैठक बुलाने का निर्देश दिया है।
सरकार का मानना है कि गन्ना खेती से जुड़ी अधिकांश समस्याओं का समाधान विभागों के बीच समन्वित प्रयासों से ही संभव है। प्रस्तावित बैठक में यूरिया वितरण व्यवस्था, जल निकासी, किसानों को तकनीकी सहायता, सहकारी संस्थाओं की भूमिका और उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विभागीय स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित हो जाता है तो गन्ना किसानों की कई पुरानी समस्याओं का स्थायी समाधान निकल सकता है।
किसानों को हर संभव सहायता का भरोसा
बैठक के दौरान कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि किसानों का हित राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि खेती और किसान बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि किसानों को किसी भी स्तर पर परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए सरकार लगातार निगरानी कर रही है। यूरिया उपलब्धता हो या जल-जमाव जैसी चुनौती, हर समस्या का समय रहते समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
मंत्री ने भरोसा दिलाया कि गन्ना किसानों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाए जाएंगे और किसी भी किसान को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए निरंतर काम कर रही है।
बैठक के अंत में बिहार शुगर मिल्स एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने कृषि मंत्री के सकारात्मक और त्वरित हस्तक्षेप के लिए आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान होगा और गन्ना उत्पादन को नई मजबूती मिलेगी।


