भागलपुर : निजी नाव सेवा बंद, सरकारी नावों से होगा मुफ्त आवागमन

भागलपुर/पटना। विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के कारण प्रभावित हुए लाखों लोगों को राहत देने के लिए बिहार सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सोमवार, 1 जून से भागलपुर और नवगछिया के बीच गंगा नदी में केवल सरकारी नावों का संचालन किया जाएगा। आम यात्रियों को इस सेवा का लाभ पूरी तरह निशुल्क मिलेगा।

जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद यह व्यवस्था लागू की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब निजी नावों के संचालन पर रोक रहेगी और यात्रियों की सुविधा के लिए सरकारी नावें नियमित रूप से चलाई जाएंगी।

विक्रमशिला सेतु के निरीक्षण के बाद लिया गया फैसला

रविवार को भागलपुर दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विक्रमशिला सेतु का स्थलीय निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से का जायजा लिया और मरम्मत एवं पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा की।

निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता आम लोगों को जल्द से जल्द राहत पहुंचाना है। इसी उद्देश्य से तब तक वैकल्पिक यातायात व्यवस्था मजबूत की जाएगी, जब तक सेतु पर आवागमन पूरी तरह बहाल नहीं हो जाता।

30 नवंबर से पहले पूरा होगा पुनर्निर्माण कार्य

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और निर्माण एजेंसी को निर्देश देते हुए कहा कि विक्रमशिला सेतु के टूटे हुए हिस्से का पुनर्निर्माण हर हाल में 30 नवंबर से पहले पूरा किया जाए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में तीन स्लैब के स्ट्रेच को बदलने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि निर्माण एजेंसी से पूरे पुल का पुनः तकनीकी अध्ययन कराया जाएगा ताकि भविष्य में किसी प्रकार की समस्या न आए और पुल के सुपर स्ट्रक्चर को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।

मुख्यमंत्री के अनुसार जब विशेषज्ञ यह सुनिश्चित कर देंगे कि सभी स्लैब और संरचनात्मक हिस्से पूरी तरह सुरक्षित हैं तथा आगे किसी अतिरिक्त बदलाव की आवश्यकता नहीं है, तभी पुल को सभी प्रकार के वाहनों के लिए खोला जाएगा।

आम लोगों से नहीं लिया जाएगा कोई शुल्क

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट घोषणा करते हुए कहा कि जब तक विक्रमशिला सेतु पर स्थायी रूप से स्लैब निर्माण और पुनर्स्थापन कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक नदी मार्ग से आने-जाने वाले आम लोगों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार जनता की परेशानी को समझती है और इस कठिन समय में लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डालना चाहती। इसलिए सरकारी नाव सेवा पूरी तरह निशुल्क रहेगी।

हालांकि मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वाणिज्यिक गतिविधियों से जुड़े लोगों और व्यवसायिक उद्देश्यों के लिए परिवहन करने वालों से निर्धारित शुल्क लिया जाएगा।

लाखों यात्रियों को मिलेगी राहत

विक्रमशिला सेतु सीमांचल और पूर्वी बिहार को जोड़ने वाला सबसे महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग माना जाता है। सेतु पर यातायात प्रभावित होने के बाद भागलपुर, नवगछिया, कटिहार, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और आसपास के जिलों के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

सरकारी नाव सेवा शुरू होने से प्रतिदिन आवागमन करने वाले हजारों यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। प्रशासन का दावा है कि नाव संचालन की व्यवस्था को सुरक्षित, नियमित और व्यवस्थित बनाया गया है ताकि लोगों को बिना किसी परेशानी के गंगा पार आने-जाने की सुविधा मिल सके।

प्रशासन की विशेष निगरानी

जिला प्रशासन ने नाव घाटों पर सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने, सुरक्षा मानकों का पालन कराने और नाव संचालन को सुचारु बनाए रखने के लिए अधिकारियों की तैनाती की गई है।

सरकार का लक्ष्य है कि विक्रमशिला सेतु के पुनर्निर्माण कार्य पूरा होने तक आम लोगों को बेहतर वैकल्पिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाए और किसी भी प्रकार की असुविधा न होने पाए।

विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन और निशुल्क सरकारी नाव सेवा की शुरुआत को क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। अब लोगों की निगाहें 30 नवंबर की उस समयसीमा पर टिकी हैं, जब सरकार ने सेतु पर फिर से सामान्य यातायात शुरू कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

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