तूफान के बाद रेलवे की बड़ी चेतावनी: ट्रैक किनारे खतरनाक पेड़ बने संकट, पूर्वी रेलवे ने लोगों से मांगा सहयोग

कोलकाता, 31 मई 2026। पश्चिम बंगाल और आसपास के क्षेत्रों में मानसून की दस्तक से पहले रेलवे प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। हाल ही में आए भीषण तूफान और तेज बारिश के दौरान रेलवे नेटवर्क को हुए नुकसान के बाद पूर्वी रेलवे ने रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वाले लोगों से विशेष सहयोग की अपील की है। रेलवे का कहना है कि निजी परिसरों में मौजूद बड़े और खतरनाक पेड़ न केवल रेल परिचालन को प्रभावित कर सकते हैं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकते हैं।

पूर्वी रेलवे के अनुसार, पिछले दिनों आए तेज आंधी-तूफान के दौरान कई स्थानों पर पेड़ और उनकी भारी शाखाएं रेलवे ट्रैक तथा ओवरहेड इलेक्ट्रिक तारों पर गिर गई थीं। इसके कारण कई ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई और कुछ समय के लिए रेल सेवाएं बाधित रहीं। हालांकि रेलवे की आपातकालीन टीमों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ट्रैक को साफ कराया और बिजली आपूर्ति बहाल की, लेकिन इस घटना ने भविष्य के लिए एक गंभीर चेतावनी भी दे दी है।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि मानसून के दौरान तेज हवाओं और भारी वर्षा की वजह से कमजोर या अत्यधिक फैले हुए पेड़ किसी भी समय गिर सकते हैं। यदि ऐसे पेड़ रेलवे ट्रैक या ओवरहेड बिजली लाइनों पर गिरते हैं तो इससे न केवल ट्रेनों का संचालन रुक सकता है, बल्कि बड़े हादसे की आशंका भी पैदा हो सकती है। यही कारण है कि रेलवे ने नागरिकों से समय रहते सावधानी बरतने की अपील की है।

रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ट्रैक के आसपास स्थित निजी संपत्तियों में मौजूद पेड़ों की नियमित छंटाई बेहद जरूरी है। रेलवे द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, पेड़ों की शाखाएं इस तरह काटी जानी चाहिए कि यदि पूरा पेड़ भी रेलवे लाइन की दिशा में गिर जाए तो उसकी किसी भी शाखा और निकटतम ट्रैक के बीच कम से कम तीन मीटर की दूरी बनी रहे। यह सुरक्षा दूरी संभावित दुर्घटनाओं को रोकने और ट्रेन संचालन को निर्बाध बनाए रखने के लिए आवश्यक मानी गई है।

पूर्वी रेलवे ने बताया कि हालिया तूफान के दौरान दमदम, कल्याणी, बारासात और सोनारपुर समेत कई महत्वपूर्ण रेलखंड प्रभावित हुए थे। कुल मिलाकर एक दर्जन से अधिक स्थानों पर पेड़, शाखाएं और निजी बैनर या फेस्टून ओवरहेड तारों तथा रेलवे पटरियों पर आ गिरे थे। इससे कई रेल सेवाओं पर असर पड़ा और यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि मौसम की खराब परिस्थितियों के बावजूद उनकी रैपिड एक्शन टीमों ने लगातार काम करते हुए कम समय में स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास किया। ट्रैक से अवरोध हटाने, बिजली आपूर्ति बहाल करने और रेल सेवाओं को पुनः संचालित करने के लिए इंजीनियरिंग, विद्युत और परिचालन विभागों की संयुक्त टीमों को लगाया गया था। लेकिन इस पूरी घटना ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि रेलवे भूमि के बाहर स्थित निजी संपत्तियों में मौजूद पेड़ सुरक्षा अभियान के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

मानसून से पहले सुरक्षा तैयारियों के तहत पूर्वी रेलवे ने अपने पूरे क्षेत्र में व्यापक स्तर पर पेड़ों की पहचान और छंटाई का अभियान शुरू किया है। रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, पूरे जोन में 26 हजार से अधिक ऐसे पेड़ चिह्नित किए गए हैं जिन्हें रेलवे ट्रैक और बिजली लाइनों के लिए संभावित खतरा माना गया है। इनमें से बड़ी संख्या में पेड़ों को पहले ही हटाया या सुरक्षित रूप से छांटा जा चुका है।

रेलवे का दावा है कि अब तक 21 हजार से अधिक संवेदनशील पेड़ों का निस्तारण किया जा चुका है। हालांकि अभियान के अंतिम चरण में सबसे बड़ी परेशानी उन पेड़ों को लेकर सामने आ रही है जो निजी जमीनों पर स्थित हैं। रेलवे के पास इन पेड़ों को सीधे हटाने का अधिकार सीमित होता है, जिसके कारण कई मामलों में कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है।

विशेष रूप से सियालदह डिवीजन में स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, निर्धारित समय सीमा से पहले जिन खतरनाक पेड़ों को हटाना आवश्यक है, उनमें बड़ी संख्या निजी भूमि पर स्थित है। ऐसे मामलों में संपत्ति मालिकों को नोटिस भेजे जा रहे हैं और उनसे स्वयं आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया जा रहा है। रेलवे का मानना है कि केवल प्रशासनिक प्रयासों से समस्या का समाधान संभव नहीं है, बल्कि स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है।

सियालदह के अलावा आसनसोल, हावड़ा और मालदा डिवीजनों में भी इसी प्रकार की समस्याएं सामने आ रही हैं। कई स्थानों पर भूमि संबंधी विवाद, सीमित पहुंच और निजी स्वामित्व के कारण सुरक्षा संबंधी कार्यों में देरी हो रही है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यदि मानसून शुरू होने से पहले आवश्यक कार्रवाई पूरी नहीं हुई तो भारी बारिश और तेज हवाओं के दौरान जोखिम बढ़ सकता है।

रेलवे प्रशासन ने इस बात पर भी जोर दिया कि ओवरहेड इलेक्ट्रिक तारों पर किसी शाखा का गिरना अत्यंत खतरनाक हो सकता है। हाई-वोल्टेज विद्युत लाइनों में व्यवधान आने से ट्रेनों की आवाजाही रुक सकती है, हजारों यात्री प्रभावित हो सकते हैं और गंभीर दुर्घटनाएं भी हो सकती हैं। इसलिए समय रहते पेड़ों की छंटाई और सुरक्षा मानकों का पालन करना जनहित में आवश्यक है।

पूर्वी रेलवे ने यात्रियों को हुई अस्थायी असुविधा पर खेद व्यक्त करते हुए कहा है कि सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन का मानना है कि रेलवे नेटवर्क की सुरक्षा केवल रेलवे कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए स्थानीय समुदायों का सहयोग भी आवश्यक है। ट्रैक के आसपास रहने वाले लोगों द्वारा थोड़ी सी सतर्कता हजारों यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।

पूर्वी रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझी ने कहा कि हालिया तूफान के बाद रेलवे कर्मियों ने तेज गति से काम करते हुए सेवाओं को बहाल किया, लेकिन प्राकृतिक आपदाओं से पूरी तरह सुरक्षित रहने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने नागरिकों से अपने परिसर में मौजूद पेड़ों का निरीक्षण करने, निर्धारित सुरक्षा दूरी बनाए रखने और रेलवे इंजीनियरिंग टीमों को आवश्यक सहयोग देने की अपील की।

रेलवे प्रशासन का संदेश स्पष्ट है कि मानसून के दौरान संभावित जोखिमों को कम करने के लिए अभी से तैयारी जरूरी है। यदि स्थानीय नागरिक और रेलवे मिलकर कार्य करें तो ट्रैक किनारे मौजूद खतरनाक पेड़ों से होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है। इससे न केवल रेल सेवाएं सुचारु रहेंगी, बल्कि लाखों यात्रियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

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