
पटना: बिहार में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत मिलने वाले मुफ्त राशन को लेकर राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। व्यापक सत्यापन अभियान के बाद राज्यभर में करीब 5.57 लाख राशन कार्ड रद्द कर दिए गए हैं। जांच में बड़ी संख्या में ऐसे लोग पाए गए जो नियमों के अनुसार पात्र नहीं थे, लेकिन लंबे समय से सरकारी राशन योजना का लाभ उठा रहे थे।
97.56 प्रतिशत सत्यापन कार्य पूरा
खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अनुसार यह कार्रवाई राशन कार्डधारकों के सत्यापन अभियान और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान तैयार मतदाता सूची के मिलान के आधार पर की गई है।
खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री Ashok Choudhary ने बताया कि राज्य में चिन्हित राशन कार्डों की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। अब तक 97.56 प्रतिशत सत्यापन कार्य संपन्न हो चुका है।
विभाग के अनुसार जांच के लिए कुल 8.19 लाख राशन कार्ड चिन्हित किए गए थे। इनमें से:
- 5.57 लाख राशन कार्ड रद्द किए गए
- लगभग 2.59 लाख कार्ड वैध पाए गए
- पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ जारी रहेगा
किन कारणों से रद्द हुए राशन कार्ड?
सरकारी जांच में कई अहम कारण सामने आए हैं, जिनके आधार पर राशन कार्ड रद्द किए गए हैं।
प्रमुख कारण:
- लाभार्थी की मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन नाम सूची में बना हुआ था।
- कई लोग बिहार छोड़कर दूसरे राज्यों में बस चुके थे।
- अनिवार्य ई-केवाईसी (e-KYC) नहीं कराया गया था।
- निर्धारित आय सीमा से अधिक आय होने के बावजूद लाभ लिया जा रहा था।
- कुछ मामलों में गलत जानकारी देकर राशन कार्ड बनवाया गया था।
पटना, मुजफ्फरपुर, अररिया और भागलपुर में सबसे ज्यादा कार्रवाई
विभागीय आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक राशन कार्ड पटना, मुजफ्फरपुर, अररिया और भागलपुर जिलों में रद्द किए गए हैं। जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि रद्द किए गए कार्डों की सूची सार्वजनिक की जाए ताकि लोगों को इसकी जानकारी मिल सके।
गलती से नाम कटा है तो कर सकते हैं अपील
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम गलती से राशन सूची से हट गया है तो उसे चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
ऐसे लोग संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) के समक्ष आवेदन देकर पुनः जांच की मांग कर सकते हैं। जांच में पात्र पाए जाने पर उनका नाम दोबारा जोड़ा जाएगा और राशन सुविधा बहाल की जाएगी।
देशव्यापी सत्यापन अभियान का भी पड़ा असर
अधिकारियों के अनुसार केंद्र सरकार के निर्देश पर विभिन्न राज्यों में लाभार्थियों का पुनः सत्यापन किया जा रहा है। जांच के दौरान कई ऐसे लोग भी सामने आए जो:
- आयकर का भुगतान करते हैं,
- चारपहिया वाहन के मालिक हैं,
- निजी कंपनियों में निदेशक या उच्च पदों पर कार्यरत हैं,
फिर भी मुफ्त राशन योजना का लाभ ले रहे थे। ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए राज्यों को सूची की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया था।
गरीबों तक पहुंचेगा योजनाओं का वास्तविक लाभ
राज्य सरकार का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य किसी पात्र व्यक्ति को वंचित करना नहीं, बल्कि योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाना है। अधिकारियों का मानना है कि अपात्र लोगों के नाम हटने से सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और गरीब परिवारों को अधिक प्रभावी तरीके से लाभ मिल सकेगा।
मुख्य बातें एक नजर में
- बिहार में 5.57 लाख राशन कार्ड रद्द।
- कुल 8.19 लाख कार्डों की जांच।
- 97.56% सत्यापन कार्य पूरा।
- मृतक, प्रवासी और अपात्र लाभार्थियों के नाम हटाए गए।
- गलती से नाम कटने पर SDO के पास अपील का प्रावधान।
- अभियान का उद्देश्य वास्तविक जरूरतमंदों तक राशन पहुंचाना है।


