​पटना के बहादुरपुर थाने में सुरक्षा ग्रिड ध्वस्त: शौच का बहाना बना आरक्षी को चकमा देकर हथकड़ी समेत बाउंड्री फांदकर भागा शातिर चोर, पुलिस महकमे में हड़कंप

पटना सिटी, 31 मई 2026। राजधानी पटना के भीतरी शहरी प्रक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पटना सिटी अनुमंडल के बहादुरपुर थाना परिसर के भीतर से कानून व्यवस्था और कस्टडी सुरक्षा मानकों को ठेंगा दिखाने वाली एक अत्यंत विस्मयकारी और गंभीर प्रविष्टि सामने आई है। शनिवार को एक शातिर चोरी के मामले में विधिक रूप से गिरफ्तार किए गए एक शातिर आरोपी ने हाजत सुरक्षा ग्रिड में तैनात कनिष्ठ सुरक्षा आरक्षी को अपनी कूटनीतिक बातों के जाल में उलझाया और शौच जाने का बहाना बनाकर कस्टडी से सफलतापूर्वक फरार हो गया। अपराधियों के इस दुस्साहसिक कृत्य की संचिका जैसे ही थाना कमान केंद्र के डेस्क पर लाइव हुई, समूचे पटना पुलिस महकमे के भीतरी हलकों में प्रखर हड़कंप और खलबली संधारित देखी जा रही है।

​शातिर आरोपी केवल आरक्षी को चकमा देकर ही म्यूट मोड पर गायब नहीं हुआ, बल्कि वह अपने दोनों हाथों में विधिक रूप से जकड़ी सरकारी हथकड़ी और उसे बांधने वाले रस्से के विन्यास को कस्टडी रूम के बाहर ही खोलने में कामयाब रहा और थाना परिसर की ऊंची बाउंड्री वॉल (चहारदीवारी) को प्रखरता से लांघकर ओझल हो गया। इस बड़ी लापरवाही के बाद से ही स्थानीय थाने की चौकसी और कस्टडी मैनुअल के अनुपालन के दावों पर गंभीर विधिक सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।

सुल्तानगंज की कासिम कॉलोनी से शुक्रवार को लॉक हुआ था कनेक्शन: चोरी के मामले में हुई थी कड़क गिरफ्तारी

​इस पूरे आपराधिक फरारी प्रक्रम के बुनियादी लेआउट और पिछले टाइम-स्टैम्प की यदि सूक्ष्म स्क्रूटनी की जाए, तो यह तथ्य प्रामाणिक विलेख के रूप में सामने आता है कि बहादुरपुर थाना पुलिस ने प्रक्षेत्र में सक्रिय चोरों के सिंडिकेट को क्रैक करने के उद्देश्य से एक विशेष एंटी-क्राइम ड्राइव चला रखी थी। इसी ग्रिड के तहत कार्रवाई करते हुए पुलिस की रेडिंग टीम ने बीते शुक्रवार को सुल्तानगंज थाना प्रक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कासिम कॉलोनी के भीतरी हिस्से में औचक दबिश दी थी। पुलिस ने वहाँ सघन घेराबंदी करके कासिम कॉलोनी निवासी अजीत खान के पुत्र तौसिफ को चोरी की एक गंभीर वारदात में संलिप्तता के ठोस साक्ष्यों के आधार पर भौतिक रूप से दबोच लिया था।

​गिरफ्तारी मुकम्मत होने के उपरांत आरोपी तौसिफ को विधिक विनिर्देशों के अनुसार बहादुरपुर थाने लाया गया, जहां स्टेशन डायरी में प्रविष्टि दर्ज करने के बाद उसे सुरक्षा के लिहाज से मुख्य हाजत (लॉकअप) के भीतर बंद कर दिया गया था। पुलिस के आला कप्तानों का स्टैंड था कि तौसिफ से पूछताछ के माध्यम से अंचल के भीतर सक्रिय अन्य कनिष्ठ कबाड़ियों और सेंधमारों के नेटवर्क का डेटा डंप हस्तगत किया जा सकेगा, परंतु शनिवार को घटित हुए एक अप्रत्याशित घटनाक्रम ने पुलिस की तमाम तैयारियों को पूरी कड़ाई के साथ बैकफुट पर धकेल दिया।

शनिवार को रचा गया फरारी का कूटनीतिक चक्रव्यूह: शौच के बहाने हाजत से बाहर आया तौसिफ

​शनिवार की नियत समय सारणी के भीतर जब थाने का भीतरी केबिन सामान्य प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त मोड पर संचरित हो रहा था, ठीक उसी समय हाजत के भीतर बंद शातिर आरोपी तौसिफ ने अपने भागने की गुप्त और अभेद्य पटकथा विनिर्मित करना शुरू किया। हाजत के मुख्य लोहे के गेट के ठीक सामने सुरक्षा मानकों के तहत एक कनिष्ठ जवान की तैनाती लाइव मोड पर की गई थी। लॉकअप ड्यूटी पर मुस्तैद इस जवान की पहचान आरक्षी विक्रम प्रसाद यादव के रूप में विलेखबद्ध है।

​आरोपी तौसिफ ने अचानक अत्यंत असहज होने का नाटक संधारित किया और गेट के समीप आकर ड्यूटी पर तैनात जवान विक्रम प्रसाद यादव से गुहार लगानी शुरू की। आरोपी ने आरक्षी को अपनी बातों के प्रभाव में लेते हुए कड़क लहजे में कहा कि उसे अत्यधिक तीव्र वेग से शौच जाना है और यदि उसे तुरंत शौचालय की ओर डाइवर्ट नहीं किया गया, तो कस्टडी रूम के भीतर ही अव्यवस्था विनिर्मित हो जाएगी। कनिष्ठ आरक्षी विक्रम प्रसाद यादव ने मामले की संवेदनशीलता और मानवीय विन्यास को संज्ञान में लेते हुए कस्टडी मैनुअल की कतिपय कड़ाई को आंशिक रूप से ढीला कर दिया और हाजत का ताला खोलकर तौसिफ को बाहर निकाल लिया।

रस्सा खोल हथकड़ी समेत बाउंड्री लांघकर पतली गलियों में हुआ भूमिगत: पुलिसिया पीछा हुआ म्यूट

​जवान विक्रम प्रसाद यादव आरोपी तौसिफ के हाथों में लगी हथकड़ी से जुड़े सुरक्षा रस्से को अपने कमान नियंत्रण में लेकर उसे थाना परिसर के भीतरी हिस्से में अवस्थित शौचालय प्रक्षेप की ओर ले गए। परंतु, जैसे ही शौचालय के मुहाने पर प्रविष्टि मुकम्मत हुई, तौसिफ ने बिजली की यांत्रिक गति से अपने शातिर दिमाग का इस्तेमाल किया। आरक्षी की आंशिक नजर चूकते ही तौसिफ ने अपनी कलाई की लचक और तकनीकी पैंतरेबाजी से हथकड़ी को बांधने वाले मुख्य रस्से के विधिक नोट (गांठ) को पलक झपकते ही खोलकर ढीला कर दिया।

​रस्सा हाथ से छूटते ही आरक्षी विक्रम प्रसाद यादव जब तक आक्रामक रिस्पॉन्स ग्रिड सक्रिय करते, तब तक तौसिफ दोनों हाथों में हथकड़ी लटकी होने के बावजूद असाधारण शारीरिक प्रवेग के साथ दौड़ा और थाना परिसर के बाहरी छोर पर विनिर्मित ऊंची सुरक्षा बाउंड्री वॉल को एक ही छलांग में लांघकर बाहर कूद गया। आरोपी को बाउंड्री पार कर भागता देख आरक्षी विक्रम प्रसाद यादव के होश उड़ गए और उन्होंने लाउड मोड पर शोर मचाना शुरू किया। शोर की तरंगें गूंजते ही थाने के भीतर केबिनों में मुस्तैद अन्य पुलिसकर्मी और कनिष्ठ जासूस तुरंत बाहर कॉरिडोर में प्रविष्ट हुए और उन्होंने तौसिफ की संभावित फरारी दिशा में उसका पीछा करना प्रारंभ किया।

​परंतु, बहादुरपुर थाना क्षेत्र के बाहर अवस्थित पटना सिटी की भौगोलिक बनावट अत्यंत संकीर्ण और भूलभुलैया जैसी पतली गलियों के नेटवर्क से एकीकृत संधारित है। शातिर तौसिफ ने इसी भौगोलिक डाइवर्जन का लाभ उठाया और सुरक्षा बलों को कड़ा छलावा देते हुए मुख्य मार्ग के बजाय एक संकरी तंग गली के रास्ते भीतर प्रविष्ट होकर म्यूट मोड पर पूरी तरह भूमिगत हो गया। पुलिसिया पीछा कतिपय मिनटों की दौड़ के बाद पूरी तरह म्यूट (विफल) साबित हुआ।

नाकेबंदी ग्रिड सक्रिय और सीसीटीवी लॉग्स की स्क्रूटनी तेज: कनिष्ठ आरक्षी पर विधिक गाज गिरने की संभावना

​थाना कस्टडी से हथकड़ी समेत आरोपी के भाग निकलने की इस सनसनीखेज विसंगति के पटल पर आते ही पटना सिटी अनुमंडल के वरिष्ठ पुलिस कप्तानों ने मामले का त्वरित संज्ञान लिया है। बहादुरपुर थाना पुलिस ने बिना किसी लिपिकीय ढिलाई के तुरंत पूरे प्रक्षेत्र के निकास मुहानों पर कड़क नाकेबंदी (कॉर्डन ऑफ) लागू कर दी है। शहर से बाहर डाइवर्ट होने वाले तमाम कंक्रीट मार्गों, बस टर्मिनलों और रेलवे हॉल्ट्स पर अतिरिक्त पुलिस बलों की तैनाती लाइव कर दी गई है। इसके समानांतर, तकनीकी सेल के कनिष्ठ अभियंताओं को सक्रिय कर थाने के भीतरी व बाहरी कैमरों सहित कासिम कॉलोनी और बहादुरपुर के एग्जिट पॉइंट्स पर लगे तमाम तीसरी आंख यानी सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के डिजिटल लॉग्स का फॉरेंसिक ऑडिट संधारित करने का विनिर्देश दिया गया है, ताकि यह लोकेट किया जा सके कि गली से बाहर निकलने के बाद तौसिफ ने किस वाहन या हाइड-आउट का कूटनीतिक इस्तेमाल किया है।

​इस पूरे घटनाक्रम में प्रथम दृष्टया कस्टडी सुरक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन और भारी लिपिकीय व व्यावहारिक लापरवाही का मामला संधारित पाया गया है। वरिष्ठ कप्तानों के आदेश पर आरोपी को अकेले हाजत से बाहर ले जाने वाले आरक्षी विक्रम प्रसाद यादव की भूमिका और कस्टडी नियंत्रण प्रणालियों की आंतरिक जांच के वास्ते एक विभागीय जांच संचिका खोल दी गई है। नियमों के अनुसार, किसी भी संगीन मामले के आरोपी को हाजत से बाहर निकालते समय न्यूनतम दो या तीन सुरक्षाकर्मियों की भौतिक मुस्तैदी अनिवार्य विन्यास संधारित की जाती है, जिसे इस मामले में पूरी तरह से बाईपास किया गया।

​संभावना जताई जा रही है कि अगले कतिपय घंटों के भीतर कनिष्ठ आरक्षी के खिलाफ सेवा निलंबन (सस्पेंशन) और विभागीय दंडात्मक कार्रवाई को विधिक रूप से लॉक कर दिया जाएगा। सुल्तानगंज थाना पुलिस के समन्वय से तौसिफ के पैतृक ठिकानों और संभावित शरणदाताओं के केबिनों पर जासूसी दस्तों की छापेमारी ग्रिड लगातार एक्टिव मोड पर संचरित की जा रही है ताकि कानून के इकबाल को री-स्टोर किया जा सके।

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