पूर्व रेलवे का बड़ा सुरक्षा अभियान: समपार फाटकों की जगह बन रहे सैकड़ों ओवरब्रिज और अंडरब्रिज, हादसों पर लगेगा स्थायी विराम

कोलकाता। रेलवे ट्रैक पर बने समपार फाटक लंबे समय तक आम लोगों के लिए परेशानी, देरी और दुर्घटनाओं की आशंका का कारण बने रहे हैं। ट्रेन गुजरने के दौरान फाटक बंद होने से न केवल वाहनों की लंबी कतारें लग जाती थीं, बल्कि कई बार आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित होती थीं। अस्पताल पहुंचने की जल्दबाजी में एम्बुलेंस हो, स्कूल जाने वाले बच्चे हों या रोज़गार के लिए सफर करने वाले लोग, सभी को कभी न कभी बंद रेलवे फाटक के कारण समय और असुविधा का सामना करना पड़ा है। लेकिन अब पूर्व रेलवे इस तस्वीर को तेजी से बदलने में जुटा हुआ है। रेलवे ने एक व्यापक अवसंरचना अभियान के तहत समपार फाटकों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर उनकी जगह रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) और रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) का निर्माण तेज कर दिया है।

पूर्व रेलवे का यह अभियान केवल निर्माण परियोजना नहीं बल्कि सुरक्षा, सुगम यातायात और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे समपार फाटकों की जगह स्थायी पुल और अंडरपास बनेंगे, वैसे-वैसे सड़क और रेल दोनों मार्गों पर यात्रा अधिक सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक होती जाएगी।

रेलवे के अनुसार, वर्षों से समपार फाटक सड़क और रेल यातायात के बीच एक महत्वपूर्ण लेकिन जोखिमपूर्ण संपर्क बिंदु रहे हैं। कई बार लोगों की जल्दबाजी या लापरवाही दुर्घटनाओं का कारण बनती रही है। इसके अलावा ट्रेन गुजरने के दौरान फाटक बंद रहने से हजारों लोगों का समय भी बर्बाद होता है। विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले इलाकों और व्यस्त मार्गों पर यह समस्या और गंभीर हो जाती है। इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पूर्व रेलवे ने ऐसी संरचनाओं के निर्माण पर विशेष जोर दिया है जो रेल और सड़क यातायात को पूरी तरह अलग कर दें।

रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज इसी सोच का परिणाम हैं। जहां रोड ओवर ब्रिज वाहनों को रेलवे ट्रैक के ऊपर से सुरक्षित मार्ग प्रदान करते हैं, वहीं रोड अंडर ब्रिज ट्रैक के नीचे से आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराते हैं। इन दोनों संरचनाओं का सबसे बड़ा लाभ यह है कि सड़क यातायात को ट्रेन के गुजरने का इंतजार नहीं करना पड़ता और रेल संचालन भी बिना किसी बाधा के जारी रहता है।

पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर के नेतृत्व में यह अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। रेलवे प्रशासन ने पूरे जोन में ऐसे क्षेत्रों की पहचान की है जहां समपार फाटक दुर्घटनाओं की दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं। इन स्थानों पर प्राथमिकता के आधार पर ओवरब्रिज और अंडरब्रिज निर्माण की योजनाएं तैयार की गई हैं। रेलवे का उद्देश्य केवल वर्तमान समस्याओं का समाधान करना नहीं बल्कि भविष्य की बढ़ती यातायात आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखते हुए स्थायी व्यवस्था विकसित करना है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो पूर्व रेलवे का यह अभियान काफी व्यापक स्तर पर चल रहा है। अब तक जोन में कुल 579 रोड अंडर ब्रिज और 207 रोड ओवर ब्रिज या तो बनकर तैयार हो चुके हैं अथवा निर्माणाधीन हैं। इन परियोजनाओं ने कई क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था की तस्वीर बदल दी है और लोगों को सुरक्षित तथा निर्बाध आवागमन का नया विकल्प उपलब्ध कराया है।

इस उपलब्धि में हावड़ा मंडल सबसे आगे है। यहां अब तक 244 रोड अंडर ब्रिज और 53 रोड ओवर ब्रिज विकसित किए जा चुके हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार हावड़ा मंडल देश के सबसे व्यस्त रेल खंडों में से एक है, इसलिए यहां इस प्रकार की परियोजनाओं का महत्व और भी बढ़ जाता है। बड़ी संख्या में यात्रियों और वाहनों की आवाजाही को देखते हुए इन संरचनाओं ने यातायात दबाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सियालदह मंडल भी इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। यहां 119 रोड अंडर ब्रिज और 37 रोड ओवर ब्रिज विकसित किए गए हैं। यह मंडल शहरी और उपनगरीय क्षेत्रों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में इन संरचनाओं के निर्माण से लाखों लोगों को प्रतिदिन होने वाली परेशानी से राहत मिली है।

मालदा मंडल में भी रेलवे ने संपर्क व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है। यहां 112 रोड अंडर ब्रिज और 50 रोड ओवर ब्रिज बनाए गए हैं। इन परियोजनाओं ने न केवल स्थानीय यातायात को आसान बनाया है, बल्कि व्यापारिक और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करने में भी मदद की है।

आसनसोल मंडल में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की गई हैं। यहां 104 रोड अंडर ब्रिज और 67 रोड ओवर ब्रिज का निर्माण किया गया है। औद्योगिक गतिविधियों और भारी माल परिवहन के लिए महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में इन संरचनाओं ने यातायात बाधाओं को काफी हद तक कम किया है। साथ ही रेल और सड़क दोनों क्षेत्रों में परिचालन दक्षता बढ़ाने में भी योगदान दिया है।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इन परियोजनाओं का लाभ केवल यातायात तक सीमित नहीं है। इससे आपातकालीन सेवाओं को भी तेजी मिली है। पहले जहां एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन वाहनों को फाटक खुलने का इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब उन्हें बिना रुकावट अपने गंतव्य तक पहुंचने में मदद मिल रही है। इससे कई परिस्थितियों में बहुमूल्य समय की बचत संभव हो रही है।

पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने कहा कि रेलवे का लक्ष्य केवल पुल और अंडरपास बनाना नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाना है। उनके अनुसार हर नया आरओबी और आरयूबी जनता से किया गया वह वादा है, जिसे रेलवे जमीन पर उतार रहा है। उन्होंने कहा कि रेलवे नेटवर्क को दुर्घटनामुक्त बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और आने वाले वर्षों में इस अभियान को और तेज किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे समपार फाटकों को समाप्त कर ओवरब्रिज और अंडरब्रिज आधारित व्यवस्था विकसित करना आधुनिक परिवहन प्रणाली की आवश्यकता है। इससे दुर्घटनाओं की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है और यात्रा का समय भी कम होता है। साथ ही रेलवे की परिचालन क्षमता में वृद्धि होती है, जिससे ट्रेनों का संचालन अधिक सुचारू रूप से किया जा सकता है।

पूर्व रेलवे का यह अभियान पूर्वी भारत के परिवहन ढांचे को नई दिशा देने वाला साबित हो रहा है। सुरक्षा, गति और सुविधा को केंद्र में रखकर तैयार की जा रही ये परियोजनाएं आने वाले समय में लाखों लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित करेंगी। रेलवे का मानना है कि जब सड़क और रेल दोनों यातायात बिना किसी अवरोध के संचालित होंगे, तब विकास की गति भी तेज होगी और लोगों का सफर पहले से कहीं अधिक सुरक्षित तथा आरामदायक बन सकेगा। इसी लक्ष्य को लेकर पूर्व रेलवे पूरे जोन में समपार फाटकों की जगह आधुनिक अवसंरचना विकसित करने के मिशन पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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