
मोकामा फायरिंग मामले में फरार चल रहे सोनू-मोनू की गिरफ्तारी के लिए बिहार पुलिस ने बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। तीन डीएसपी और बिहार एसटीएफ की निगरानी में अलग-अलग टीमों का गठन कर छपरा, गया, सिवान, बेगूसराय समेत 8 जिलों में लगातार छापेमारी की जा रही है। घटना के 36 घंटे बाद भी दोनों आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
पूरा विवाद सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ। 22 मई को नौरंगा जलालपुर पंचायत के पैक्स अध्यक्ष मुकेश सिंह ने पचमहला थानाध्यक्ष कुंदन कुमार की तारीफ में एक पोस्ट शेयर किया था। इसी को लेकर 24 मई को पूर्व मुखिया प्रमोद सिंह, जो सोनू-मोनू के पिता बताए जा रहे हैं, ने पंचायत भवन जाने के दौरान मुकेश सिंह से सवाल किया। दोनों के बीच कहासुनी बढ़ गई, जिसके बाद प्रमोद सिंह ने अपने बेटों सोनू-मोनू को बुलाया। आरोप है कि इसके बाद पैक्स अध्यक्ष पर गाली-गलौज करते हुए फायरिंग की गई। मुकेश सिंह ने भागकर अपनी जान बचाई।
घटना की सूचना मिलने पर जब पचमहला थाना पुलिस मौके पर पहुंची तो वहां से दो खोखे बरामद किए गए। इसके बाद जब पुलिस सोनू-मोनू के घर तलाशी लेने पहुंची, तब कथित तौर पर उनके गुर्गों ने पुलिसकर्मियों की ही तलाशी ले ली और फिर घर के अंदर जाने दिया। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया।
मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्तिकेय शर्मा ने पचमहला थानाध्यक्ष कुंदन कुमार और हाथीदह थानाध्यक्ष रंजन कुमार को लापरवाही के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इसके बाद नई टीम बनाकर व्यापक स्तर पर छापेमारी शुरू की गई।
बताया जा रहा है कि यह विवाद केवल फायरिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक और वर्चस्व की लड़ाई भी जुड़ी हुई है। मुकेश सिंह की पत्नी सरपंच हैं और उन्हें अनंत सिंह का करीबी माना जाता है। 2025 विधानसभा चुनाव के बाद से अनंत सिंह और सोनू-मोनू गैंग के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में पुलिस को इलाके में गैंगवार की आशंका भी सता रही है।
कुंदन कुमार ने कहा, “सोनू की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है। रविवार रात कई जिलों में रेड की गई है। टीम गठित कर 8 जिलों में कार्रवाई चल रही है और जल्द ही दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।”


