टीएमबीयू में इंटर्नशिप शुल्क विवाद पर भड़का छात्र आक्रोश, एबीवीपी ने प्रभारी कुलपति का फूंका पुतला

भागलपुर स्थित तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय एक बार फिर छात्र आंदोलन और प्रशासनिक विवादों को लेकर सुर्खियों में आ गया है। इस बार मामला इंटर्नशिप के नाम पर कथित अवैध वसूली और छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार से जुड़ा है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ खुला मोर्चा खोलते हुए जोरदार प्रदर्शन किया और प्रभारी कुलपति का पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया।

विश्वविद्यालय परिसर में हुए इस प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र जुटे। प्रदर्शनकारी छात्रों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और आरोप लगाया कि छात्रों से इंटर्नशिप के नाम पर 500 रुपये की अवैध वसूली की जा रही है। छात्र संगठन का कहना है कि शिक्षा संस्थानों का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल देना होना चाहिए, लेकिन यहां छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने टीएनबी कॉलेज के एक प्राध्यापक पर छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया। संगठन का दावा है कि हाल ही में परिषद के कुछ कार्यकर्ता कॉलेज पहुंचे थे, जहां छात्रों से जुड़ी समस्याओं को लेकर बातचीत की जा रही थी। इसी दौरान प्रोफेसर डॉक्टर नीलेश के साथ कहासुनी हुई और छात्रों के अनुसार उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया।

इस घटना के बाद छात्र संगठन के भीतर भारी नाराजगी फैल गई। एबीवीपी नेताओं ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है और जब छात्र अपनी बात रखने पहुंचते हैं तो उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया जाता है। संगठन ने इसे छात्र अधिकारों का हनन बताया और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

विरोध प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में माहौल काफी गरमाया रहा। कार्यकर्ताओं ने प्रभारी कुलपति डॉ. विमलेंदु नारायण झा का पुतला जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पूरी तरह छात्र विरोधी हो चुकी है और यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो आंदोलन और उग्र होगा।

छात्र नेताओं का कहना है कि इंटर्नशिप जैसी शैक्षणिक प्रक्रिया को भी अब कमाई का जरिया बना दिया गया है। उनका आरोप है कि छात्रों से बिना स्पष्ट नियम और पारदर्शिता के पैसे वसूले जा रहे हैं। संगठन ने सवाल उठाया कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन के पास कोई अधिकृत आदेश है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा।

प्रदर्शन के दौरान एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से कई समस्याएं बनी हुई हैं। छात्रों को समय पर रिजल्ट नहीं मिलना, परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी, कक्षाओं का नियमित संचालन नहीं होना और प्रशासनिक लापरवाही जैसे मुद्दों पर पहले भी कई बार आवाज उठाई जा चुकी है। लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिलता है और जमीनी स्तर पर सुधार नहीं दिखाई देता।

विद्यार्थी परिषद के नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ 500 रुपये की वसूली का मामला नहीं है, बल्कि यह छात्रों के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई है। संगठन का कहना है कि अगर कोई शिक्षक छात्रों के साथ अनुचित व्यवहार करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होना जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक आरोपित प्राध्यापक पर कार्रवाई नहीं होती और इंटर्नशिप शुल्क की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ और बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो छात्र सड़क पर उतरने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए विश्वविद्यालय परिसर में पुलिस बल की भी मौजूदगी रही। हालांकि स्थिति नियंत्रण में रही और किसी प्रकार की हिंसक घटना सामने नहीं आई। प्रशासन की ओर से फिलहाल इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन छात्र संगठन लगातार दबाव बना रहा है।

विश्वविद्यालय से जुड़े कई छात्रों ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया। छात्रों का कहना है कि इंटर्नशिप और अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर अतिरिक्त शुल्क लेना गलत है। उनका मानना है कि पहले ही छात्र आर्थिक दबाव झेल रहे हैं और ऐसे में अतिरिक्त भुगतान की मांग उन्हें और परेशान करती है।

कुछ छात्रों ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए। यदि किसी प्रकार का शुल्क लिया जा रहा है तो उसकी स्पष्ट जानकारी और नियम सार्वजनिक किए जाने चाहिए ताकि भ्रम की स्थिति न बने। वहीं, शिक्षकों और छात्रों के बीच बेहतर व्यवहार और सम्मानजनक संवाद बनाए रखना भी जरूरी बताया गया।

भागलपुर के शैक्षणिक माहौल में यह मुद्दा तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। विश्वविद्यालय की छवि पर भी इसका असर पड़ता दिख रहा है। लगातार हो रहे विवादों के कारण छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ती जा रही है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान निकालना चाहिए ताकि शैक्षणिक वातावरण प्रभावित न हो।

प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थी परिषद के नेता कुणाल पांडे ने कहा कि संगठन छात्र हितों के लिए लगातार संघर्ष करता रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की समस्याओं को सुनने के बजाय उन्हें दबाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने साफ कहा कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की अगली प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। छात्र संगठन आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, जबकि छात्रों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर काफी चर्चा बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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