बिहार के West Champaran जिले के बगहा अनुमंडल में बेतिया राज की जमीन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। Bagaha के मझौवा गांव के सैकड़ों ग्रामीण शनिवार को अंचल कार्यालय पहुंच गए और प्रशासन द्वारा जारी जमीन खाली करने के नोटिस का विरोध किया। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई दशकों से इस जमीन पर रह रहे हैं और अब अचानक बेदखली की कार्रवाई से उनके सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है।
दूसरी बार जारी हुआ नोटिस
अंचल प्रशासन की ओर से करीब 400 ग्रामीणों को दूसरी बार नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में बेतिया राज की जमीन को अतिक्रमण मुक्त करने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि विभागीय आदेश के तहत यह कार्रवाई की जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार उनके पूर्वज वर्षों पहले यहां आकर बसे थे और तब से उनके परिवार इसी जमीन पर मकान बनाकर रह रहे हैं। उनका आरोप है कि बिना पर्याप्त सुनवाई के उन्हें हटाने की तैयारी की जा रही है।
“हमारे पास रहने की दूसरी जगह नहीं”
ग्रामीणों ने प्रशासन से नोटिस वापस लेने और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था करने की मांग की है। प्रदर्शन में शामिल ध्रुव प्रसाद केशरी, सत्येंद्र प्रसाद केशरी, विनोद प्रसाद केशरी, रतन यादव, शैलेश केशरी समेत कई लोगों ने कहा कि:
“हम कई दशकों से इस जमीन पर मकान बनाकर रह रहे हैं। हमारे पास रहने का कोई दूसरा स्थान नहीं है।”
ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन जमीन खाली कराता है तो सैकड़ों परिवार सड़क पर आ जाएंगे।
अंचल कार्यालय में जुटी भारी भीड़
नोटिस के विरोध में बड़ी संख्या में ग्रामीण अंचल कार्यालय पहुंचे, जिससे कार्यालय परिसर में काफी भीड़ जमा हो गई। लोगों ने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की मांग की और कहा कि गरीब परिवारों की स्थिति को देखते हुए समाधान निकाला जाए।
क्या बोलीं सीओ?
Narmada Srivastava ने बताया कि विभागीय निर्देश के तहत बेतिया राज की जमीन पर कब्जा करने वालों को नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने ग्रामीणों से अपने जमीन संबंधी दस्तावेज जमा करने को कहा है।
उन्होंने कहा:
“विभागीय निर्देश के आलोक में नोटिस जारी किया गया है। ग्रामीणों की मांग को विभागीय स्तर पर रखा जाएगा।”
अब क्या होगा आगे?
प्रशासन का कहना है कि ग्रामीणों द्वारा जमा किए जाने वाले दस्तावेजों की जांच के बाद मामले की समीक्षा की जाएगी। फिलहाल ग्रामीण नोटिस का जवाब देने और अपने कागजात अंचल कार्यालय में जमा करने की प्रक्रिया में जुटे हैं।
इस पूरे मामले पर अब विभागीय स्तर पर फैसला होने की संभावना है, जबकि गांव में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर चिंता और नाराजगी दोनों बनी हुई है।


