
पटना/मोतिहारी, 23 मई 2026। बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून की जमीनी हकीकत और प्रशासनिक कप्तानी की शुचिता को बनाए रखने की दिशा में सूबे के नीतिगत गलियारे से एक बहुत बड़ी और प्रखर दंडात्मक प्रविष्टि सामने आई है। राज्य के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने कर्तव्यहीनता, स्थानीय स्तर पर जासूसी विंग की विफलता और विभागीय नियमों में बरती गई घोर लापरवाही को रेखांकित करते हुए एक साथ 14 मद्यनिषेध पुलिस पदाधिकारियों को विधिक रूप से निलंबित कर दिया है।
यह कठोर प्रशासनिक कार्रवाई पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले के विभिन्न ग्रामीण और शहरी अंचलों में कतिपय समय पूर्व घटित हुए वीभत्स जहरीली शराब कांड की पृष्ठभूमि में मुकम्मल की गई है। विभाग के आला कप्तानों के सीधे विनिर्देश पर शुक्रवार की देर शाम इस निलंबन विलेख की आधिकारिक संचिका पटना मुख्यालय से लाइव जारी की गई, जिसके बाद पूरे मद्यनिषेध और उत्पाद पुलिस महकमे के भीतर भारी सांगठनिक हड़कंप, अफरा-तफरी और गहरा सन्नाटा संधारित देखा जा रहा है।
अप्रैल महीने में हुआ था मोतिहारी का वह खूनी शराब कांड: 10 नागरिकों की म्यूट हुई थीं सांसें
इस वृहद और दंडात्मक प्रशासनिक कार्रवाई की अंतर्निहित कड़ियों को आपस में जोड़ने के लिए हमें अप्रैल 2026 के उस काले अध्याय की स्क्रूटनी करनी होगी, जिसने संपूर्ण पूर्वी चंपारण जिले के सुरक्षात्मक दावों को पूरी तरह से मलबे में तब्दील कर दिया था। अप्रैल के मध्य में मोतिहारी के सदर और सिकरहना अनुमंडल प्रक्षेप के अंतर्गत आने वाले कतिपय गांवों में चोरी-छिपे निर्मित और आपूर्ति की गई अत्यधिक घातक मिथाइल अल्कोहल युक्त जहरीली शराब का सेवन करने से अचानक मौतों का एक तांडव लाइव मोड पर सक्रिय हो गया था।
शराबबंदी कानून को ताक पर रखकर संचालित किए जा रहे इस अवैध मैन्युफैक्चरिंग सिंडिकेट के विषैले रसायन के कारण एक-एक कर कुल 10 स्थानीय नागरिकों की सांसें हमेशा के लिए म्यूट हो गईं, जबकि कतिपय अन्य मुसाफिरों की आंखों की रोशनी आंशिक रूप से ब्लॉक हो गई थी। इस सामूहिक विसंगति के पटल पर आते ही न केवल जिला स्तर पर भारी जनाक्रोश भड़क उठा था, बल्कि पटना मुख्य सचिवालय के भीतर भी सुरक्षा ग्रिड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान अंकित हो गए थे।
इस घटना के तुरंत बाद, मद्यनिषेध विभाग की एंटी-लिकर टास्क फोर्स और जासूसी टीमों ने ग्राउंड जीरो पर प्रविष्ट होकर रासायनिक साक्ष्यों का फॉरेंसिक ऑडिट मुकम्मल किया था। प्राथमिक जांच विलेख में यह साफ प्रमाणित हुआ कि स्थानीय स्तर पर तैनात उत्पाद और मद्यनिषेध स्क्वॉड के आला कप्तानों की टोह लेने की क्षमता पूरी तरह निष्क्रिय थी, जिसके कारण तस्करों ने अंचल के भीतर अपने पैर पूरी कड़ाई से पसार लिए थे। इसी आंतरिक जांच रिपोर्ट को आधार बनाते हुए अब जवाबदेही तय की गई है।
निलंबन की जद में आए 14 मद्यनिषेध पदाधिकारियों का पूरा श्रेणीवार विन्यास
पटना से निर्गत विधिक संचिका के आलोक में जिन 14 अधिकारियों के खिलाफ निलंबन का कड़ा चक्रव्यूह लॉक किया गया है, उनमें इंस्पेक्टर से लेकर कनिष्ठ सहायक अवर निरीक्षक रैंक के पुलिसकर्मी शामिल संधारित हैं। इन सभी अधिकारियों पर अपने निर्धारित प्रक्षेपों में गश्त को म्यूट रखने और अवैध रसद आपूर्ति को ब्लॉक न कर पाने के विधिक आरोप प्रमाणित पाए गए हैं। निलंबित होने वाले अधिकारियों की श्रेणीवार सांख्यिकी नीचे दिए गए विवरण के अनुसार संरेखित है:
1. मद्यनिषेध एवं उत्पाद निरीक्षक (Excise & Prohibition Inspectors):
- मनीष सर्राफ: उत्पाद निरीक्षक, मोतिहारी सदर अंचल (इनके कार्यक्षेत्र में अवैध सिंडिकेट की प्रखर मौजूदगी पाई गई)।
- मो. सेराज: मद्यनिषेध निरीक्षक, मोतिहारी सदर (स्थानीय इनपुट और खुफिया नेटवर्क को सुदृढ़ रखने में पूरी तरह विफल संधारित)।
- धर्मेंद्र कुमार: मद्यनिषेध निरीक्षक, सिकरहना सह सदर प्रक्षेप।
2. मद्यनिषेध अवर निरीक्षक (Prohibition Sub-Inspectors):
- उदय कुमार: मद्यनिषेध अवर निरीक्षक (फील्ड गश्ती और औचक छापेमारी प्रक्रमों में घोर लिपिकीय ढिलाई के आरोपी)।
- मुकेश कुमार: मद्यनिषेध अवर निरीक्षक।
- नागेश कुमार: मद्यनिषेध अवर निरीक्षक।
- धर्मेंद्र झा: मद्यनिषेध अवर निरीक्षक (तस्करों के रूट लेआउट को क्रैक करने में पूरी तरह म्यूट पाए गए)।
3. सहायक अवर निरीक्षक (Prohibition Assistant Sub-Inspectors – ASI):
- अजय कुमार: सहायक अवर निरीक्षक (मद्यनिषेध)।
- धर्मेंद्र कुमार सिंह: सहायक अवर निरीक्षक (मद्यनिषेध)।
- रोशनी कुमारी: महिला सहायक अवर निरीक्षक (मद्यनिषेध)।
- बसंत कुमार महतो: सहायक अवर निरीक्षक (मद्यनिषेध)।
- कबिन्द्र कुमार: सहायक अवर निरीक्षक (मद्यनिषेध)।
- रंजीत कुमार: सहायक अवर निरीक्षक (मद्यनिषेध)।
- शशि ऋषि: सहायक अवर निरीक्षक (मद्यनिषेध)।
भागलपुर ग्रुप सेंटर बदला गया मुख्यालय, नियमों के अभेद्य दायरे में रहेंगे सभी अफसर
मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग द्वारा जारी किए गए कड़े विधिक आदेश के अनुसार, इन सभी 14 निलंबित पुलिस अधिकारियों के विरूद्ध नियमित विभागीय कार्यवाही (Departmental Proceedings) का प्रचालन लाइव मोड पर शुरू कर दिया गया है। निलंबन की इस निश्चित समयावधि के दौरान इन सभी कप्तानों को मोतिहारी और पूर्वी चंपारण जिले के भौगोलिक विन्यास से पूरी कड़ाई के साथ विच्छेदित (डिटैच) कर दिया गया है, ताकि ये अपनी प्रशासनिक हैसियत का दुरुपयोग कर स्थानीय जांच के फॉरेंसिक साक्ष्यों या चश्मदीद गवाहों के बयानों को आंशिक रूप से भी डाइवर्ट अथवा प्रभावित न कर सकें।
विभाग ने इन सभी अधिकारियों का नया विधिक मुख्यालय ग्रुप सेंटर मद्यनिषेध भागलपुर निर्धारित कर लॉक कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान इन सभी 14 अधिकारियों को प्रतिदिन सुबह भागलपुर ग्रुप सेंटर के कमान कार्यालय में अपनी भौतिक हाजिरी दर्ज कराना अनिवार्य संधारित किया गया है। वे बिना सक्षम विधिक प्राधिकारी और केंद्रीय नियंत्रण कक्ष की लिखित पूर्वानुमति के भागलपुर जिले की सीमाओं से बाहर प्रस्थान कतई नहीं कर सकेंगे।
इस पूरी अवधि के दौरान उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) हस्तगत कराया जाएगा और उनके मूल सर्विस रिकॉर्ड्स की फाइलें पटना मुख्यालय के विशेष विजिलेंस सेल द्वारा कड़ाई से जांची जाएंगी। विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि मोतिहारी जहरीली शराब कांड के इस खूनी विन्यास में यदि इन अधिकारियों की किसी भी स्तर पर तस्करों के साथ प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से संदेहास्पद मोबाइल कॉल्स या वित्तीय सांठगांठ (हवाला कड़ियां) पाई जाती हैं, तो इन्हें विधिक रूप से सेवा से परमानेंट बर्खास्त करते हुए जेल की सलाखों के पीछे भेजने की अग्रिम दंडात्मक कार्रवाई को न्यूनतम समय-सीमा के भीतर लाइन-अप किया जाएगा।


