अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर भागलपुर में बड़ा संदेश, गंगा क्षेत्र की जैव विविधता बचाने को सामूहिक प्रयास पर जोर

भागलपुर। अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस 2026 के अवसर पर भागलपुर वन प्रमंडल के अंतर्गत अरण्य बिहार, सुंदरवन परिसर में एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, गंगा क्षेत्र की जैव विविधता और पारिस्थितिकी संतुलन को बचाने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यशाला में वन विभाग, पर्यावरण विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों, मछुआरों, किसानों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भाग लेकर जैव विविधता संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।

हर वर्ष 22 मई को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पृथ्वी पर मौजूद जीव-जंतुओं, वनस्पतियों और पारिस्थितिक तंत्र की विविधता के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है। इस वर्ष कार्यक्रम का विषय “वैश्विक प्रभाव के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य करना” रखा गया, जिसका मुख्य संदेश यह था कि छोटे-छोटे स्थानीय प्रयास भी वैश्विक स्तर पर बड़े बदलाव ला सकते हैं।

कार्यक्रम का आयोजन भागलपुर जिले में सक्रिय कई पर्यावरण और सामाजिक संगठनों के सहयोग से किया गया। इसमें , , और असर सहित कई संगठनों की महत्वपूर्ण भागीदारी रही। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने गंगा नदी और उसके आसपास के क्षेत्रों में तेजी से घटती जैव विविधता पर चिंता व्यक्त की।

कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण प्रदूषण और जैव विविधता के नुकसान जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। यदि समय रहते संरक्षण के प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में पारिस्थितिक संतुलन पर गहरा असर पड़ सकता है। विशेष रूप से गंगा क्षेत्र में जलीय जीवों, डॉल्फिन, मछलियों और वनस्पतियों पर बढ़ते प्रदूषण और मानवीय गतिविधियों का असर लगातार बढ़ रहा है।

वन प्रमंडल पदाधिकारी ने कहा कि जैव विविधता केवल जंगलों या वन्यजीवों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन और आजीविका से सीधे जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर मौजूद प्रत्येक जीव और वनस्पति पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है और सभी एक-दूसरे पर निर्भर हैं। यदि किसी एक हिस्से को नुकसान पहुंचता है तो उसका असर पूरे पर्यावरण पर पड़ता है।

जिला मत्स्य पदाधिकारी ने गंगा क्षेत्र में जलीय जैव विविधता की स्थिति पर चर्चा करते हुए कहा कि नदियों और जलाशयों को प्रदूषण मुक्त रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि मछुआरा समुदाय और स्थानीय लोगों की भागीदारी के बिना जल संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण संभव नहीं है।

कार्यक्रम में मौजूद पर्यावरण विशेषज्ञों ने बताया कि पृथ्वी पर वर्तमान समय में मनुष्यों सहित लगभग 80 लाख से अधिक प्रजातियों के जीव-जंतु और पौधे मौजूद हैं। ये सभी जटिल पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं और एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि मनुष्य भी इसी तंत्र का हिस्सा है और उसकी आजीविका, स्वास्थ्य तथा भविष्य सीधे तौर पर प्रकृति पर निर्भर करता है।

ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि सामाजिक दायित्व भी है। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय समुदाय जागरूक होकर छोटे-छोटे कदम उठाएं, जैसे प्लास्टिक का कम उपयोग, जल संरक्षण और वृक्षारोपण, तो इसका बड़ा सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

ने गंगा डॉल्फिन और अन्य जलीय जीवों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि भागलपुर गंगा डॉल्फिन के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में यहां की जैव विविधता को बचाना राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्थानीय समुदायों से नदी संरक्षण अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न हितधारकों के बीच परिचर्चा भी आयोजित की गई, जिसमें गंगा क्षेत्र की पारिस्थितिकी, वन्यजीव संरक्षण, कृषि और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि खेती, मछली पालन और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

कार्यशाला में उपस्थित डॉल्फिन मित्रों और स्थानीय मछुआरों ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में नदी के स्वरूप और जलीय जीवों की संख्या में बदलाव देखा जा रहा है। कई स्थानीय लोगों ने प्रदूषण और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण की मांग की।

कार्यक्रम में , , , , गंगा प्रहरी सहित कई विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

इसके अलावा वन क्षेत्र पदाधिकारी , वन परिसर पदाधिकारी , वनरक्षी , स्थानीय जनप्रतिनिधि, किसान और मछुआरा समुदाय के लोग भी मौजूद रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि जैव विविधता संरक्षण के लिए सरकारी योजनाओं के साथ स्थानीय समुदायों की भागीदारी बेहद जरूरी है। यदि गांव स्तर पर जागरूकता बढ़ाई जाए और लोगों को प्रकृति संरक्षण से जोड़ा जाए तो पर्यावरणीय चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने जैव विविधता संरक्षण और गंगा क्षेत्र को प्रदूषण मुक्त बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि प्रकृति और मानव का संबंध परस्पर जुड़ा हुआ है और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाना जरूरी है।

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