बिहार प्रशासनिक महकमे में बड़ा फेरबदल, 10 वरिष्ठ IAS अधिकारियों का तबादला; कई विभागों को मिला नया नेतृत्व

पटना। बिहार सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए राज्य के 10 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों का तबादला और नई जिम्मेदारियों का ऐलान किया है। शुक्रवार को जारी अधिसूचना के अनुसार कई अहम विभागों में नए अधिकारियों की तैनाती की गई है, जबकि कुछ अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। इस प्रशासनिक फेरबदल को राज्य सरकार की रणनीतिक तैयारी और विभागीय कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सबसे चर्चित बदलाव वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को लेकर हुआ है। 1992 बैच के अधिकारी दीपक कुमार सिंह को सामान्य प्रशासन विभाग में महानिदेशक-सह-मुख्य जांच आयुक्त के पद से हटाकर राज्यपाल का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है। राजभवन में उनकी नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वे लंबे समय से राज्य प्रशासन में अहम भूमिकाएं निभाते रहे हैं।

वहीं 1995 बैच के वरिष्ठ अधिकारी को मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया गया है। यह विभाग राज्य सरकार के सबसे अहम प्रशासनिक केंद्रों में गिना जाता है, जहां से विभिन्न नीतिगत फैसलों और कैबिनेट से जुड़े कार्यों का संचालन होता है। ऐसे में उनकी नियुक्ति को सरकार के लिए महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी माना जा रहा है।

इसी क्रम में 1995 बैच के ही अधिकारी को निगरानी विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। निगरानी विभाग भ्रष्टाचार नियंत्रण और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में इस विभाग में अनुभवी अधिकारी की तैनाती को प्रशासनिक सख्ती से जोड़कर देखा जा रहा है।

सरकार ने 2004 बैच के अधिकारी को उद्योग विभाग के सचिव पद के साथ गृह विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी दिया है। उद्योग और गृह दोनों विभाग राज्य सरकार के महत्वपूर्ण विभागों में शामिल हैं। उद्योग विभाग जहां निवेश और औद्योगिक विकास से जुड़ा है, वहीं गृह विभाग कानून व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में दोनों विभागों की जिम्मेदारी एक साथ मिलना प्रशासनिक दृष्टि से बड़ी जिम्मेदारी माना जा रहा है।

2007 बैच के अधिकारी को वित्त विभाग के सचिव पद पर बरकरार रखते हुए जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है। माना जा रहा है कि वित्तीय मामलों और बजट संबंधी कार्यों पर अधिक फोकस बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

सरकार ने महिला अधिकारियों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी हैं। 2009 बैच की अधिकारी को बिहार मानवाधिकार आयोग के सचिव पद के साथ राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। भूमि विवाद, दाखिल-खारिज और राजस्व से जुड़े मामलों को देखते हुए यह विभाग राज्य में बेहद अहम माना जाता है।

2011 बैच के अधिकारी को बिहार राज्य आवास बोर्ड, पटना का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। राज्य में शहरीकरण और आवास योजनाओं को लेकर सरकार लगातार नई परियोजनाओं पर काम कर रही है। ऐसे में आवास बोर्ड की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

इसी तरह 2012 बैच के अधिकारी को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में विशेष सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। यह विभाग राज्य में जमीन संबंधी नीतियों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को संभालता है। भूमि सुधार से जुड़े मामलों में तेजी लाने के उद्देश्य से यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

2012 बैच के ही अधिकारी को उद्योग विभाग में विशेष सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। बिहार सरकार निवेश आकर्षित करने और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। ऐसे में उद्योग विभाग में अतिरिक्त प्रशासनिक मजबूती को विकास योजनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।

इसके अलावा 2013 बैच के अधिकारी को बिहार राज्य आवास बोर्ड के प्रबंध निदेशक पद से हटाकर वित्त विभाग में अपर सचिव बनाया गया है। वित्त विभाग में उनकी नई भूमिका को आगामी वित्तीय योजनाओं और विभागीय समन्वय के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार सरकार द्वारा किया गया यह फेरबदल केवल नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि आगामी योजनाओं और शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी का हिस्सा है। राज्य में कई बड़े विकास प्रोजेक्ट, आधारभूत संरचना योजनाएं और निवेश परियोजनाएं चल रही हैं। ऐसे में अनुभवी अधिकारियों को महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारी देकर प्रशासनिक गति बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार जैसे बड़े राज्य में प्रशासनिक फेरबदल का सीधा असर सरकारी योजनाओं की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। यदि सही अधिकारियों को उपयुक्त विभागों की जिम्मेदारी दी जाए तो योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आती है और जनता तक सेवाओं की पहुंच बेहतर होती है।

राज्य सरकार की इस नई प्रशासनिक व्यवस्था के बाद अब विभिन्न विभागों में कामकाज की नई रणनीति और प्राथमिकताएं तय होने की संभावना है। खासकर उद्योग, वित्त, गृह और राजस्व जैसे विभागों में नए स्तर पर समन्वय देखने को मिल सकता है।

फिलहाल सरकार की ओर से जारी इस तबादला सूची को प्रशासनिक मजबूती और बेहतर शासन व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इन अधिकारियों की नई जिम्मेदारियों का असर राज्य की नीतियों और विकास कार्यों में देखने को मिल सकता है।

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