विक्रमशिला सेतु संकट के बीच गंगा बनी नई लाइफलाइन, भागलपुर में शुरू हुई कार्गो जहाज सेवा से व्यापार और यातायात को बड़ी राहत

भागलपुर, 21 मई 2026। विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद भागलपुर और सीमांचल क्षेत्र में उत्पन्न यातायात संकट के बीच अब जिला प्रशासन ने राहत का बड़ा रास्ता खोल दिया है। गंगा नदी में बड़े कार्गो जहाजों का परिचालन शुरू कर दिया गया है, जिससे भारी मालवाहक वाहनों, छोटे चार पहिया वाहनों और आम यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। प्रशासन की इस नई पहल को क्षेत्र के व्यापार, परिवहन और आम जनजीवन के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विक्रमशिला सेतु के पाया संख्या 133 के स्लैब में आई गंभीर क्षति के बाद से भागलपुर और नवगछिया के बीच सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित हो गया था। सेतु पर भारी वाहनों की आवाजाही बंद होने के कारण ट्रकों और मालवाहक गाड़ियों को लंबी दूरी तय कर दूसरे रास्तों से गुजरना पड़ रहा था। इससे समय और ईंधन दोनों की खपत बढ़ रही थी। व्यापारियों और वाहन चालकों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा था।

इसी संकट को देखते हुए जिला प्रशासन ने गंगा नदी को वैकल्पिक परिवहन मार्ग के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया। प्रशासन की पहल पर कोलकाता से दो बड़े कार्गो जहाज भागलपुर मंगाए गए हैं। इनमें से एक विशाल जहाज में एक साथ लगभग 25 ट्रकों को ले जाने की क्षमता है, जबकि दूसरा जहाज 8 से 10 ट्रकों को एक बार में पार कराने में सक्षम है।

गंगा में शुरू हुई इस नई कार्गो सेवा का उद्घाटन सदर अनुमंडल पदाधिकारी विकास कुमार ने फीता काटकर किया। उद्घाटन के दौरान अधिकारियों, वाहन चालकों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी रही। इस अवसर पर प्रशासन ने दावा किया कि यह सेवा विक्रमशिला सेतु संकट के दौरान लोगों के लिए बड़ी राहत साबित होगी।

अधिकारियों ने बताया कि यह सुविधा केवल भारी मालवाहक वाहनों तक सीमित नहीं रहेगी। छोटे चार पहिया वाहन, निजी कारें और आम यात्री भी इस जहाज सेवा का लाभ उठा सकेंगे। प्रशासन ने सभी श्रेणी के वाहनों और यात्रियों के लिए किराया भी निर्धारित कर दिया है।

जानकारी के अनुसार आम यात्रियों के लिए किराया 25 रुपये से शुरू किया गया है, जबकि बड़े ट्रकों और मालवाहक वाहनों के लिए अधिकतम 5000 रुपये तक शुल्क तय किया गया है। प्रशासन ने आपातकालीन सेवाओं को ध्यान में रखते हुए एम्बुलेंस सेवा को पूरी तरह निशुल्क रखा है, ताकि मरीजों और चिकित्सा सेवाओं पर किसी प्रकार का असर न पड़े।

सदर अनुमंडल पदाधिकारी विकास कुमार ने कहा कि विक्रमशिला सेतु के बंद होने के बाद लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में जिला प्रशासन लगातार वैकल्पिक व्यवस्था पर काम कर रहा था। गंगा में शुरू की गई यह कार्गो सेवा उसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इस सेवा से भारी वाहनों को लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा और परिवहन व्यवस्था काफी हद तक सामान्य हो सकेगी।

स्थानीय व्यापारियों ने भी प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि विक्रमशिला सेतु बंद होने के कारण माल ढुलाई की लागत अचानक बढ़ गई थी। कई ट्रकों को दूसरे जिलों से घूमकर आना पड़ रहा था, जिससे व्यापार प्रभावित हो रहा था। अब कार्गो जहाज सेवा शुरू होने से समय और पैसे दोनों की बचत होगी।

गाड़ी चालक गूंजना कुमार मंडल ने बताया कि पहले भारी वाहन लेकर दूसरे रास्तों से जाने में कई घंटे अतिरिक्त लग जाते थे। डीजल खर्च भी काफी बढ़ गया था। अब गंगा के रास्ते वाहन पार होने से राहत मिलेगी और समय पर माल पहुंचाना आसान होगा।

वहीं वाहन मालिक मंटू कुमार ने कहा कि व्यापारिक गतिविधियों पर विक्रमशिला सेतु संकट का सीधा असर पड़ा था। कई व्यवसायियों को माल आपूर्ति में देरी हो रही थी। अब जहाज सेवा शुरू होने से कारोबार को नई गति मिलेगी।

प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किए हैं। घाट पर मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है ताकि संचालन के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। इसके अलावा सुरक्षा बलों को भी तैनात किया गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए मेडिकल कैंप लगाए गए हैं और आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी अलर्ट मोड में रखा गया है।

घाट पर वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने के लिए अलग-अलग लेन बनाई गई हैं। प्रशासन ने कहा है कि जहाजों पर वाहनों को निर्धारित क्षमता के अनुसार ही लादा जाएगा ताकि सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन हो सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा नदी में कार्गो सेवा शुरू होना केवल अस्थायी राहत नहीं, बल्कि भविष्य के लिए भी एक महत्वपूर्ण परिवहन मॉडल साबित हो सकता है। बिहार में जल परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में इसे बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। इससे सड़क यातायात पर दबाव कम होगा और पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह अधिक उपयोगी साबित हो सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि विक्रमशिला सेतु संकट के बाद जिस तरह प्रशासन ने तेजी से वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की, उससे लोगों को काफी राहत मिली है। पहले जहां लोग घंटों जाम और लंबी दूरी की समस्या से परेशान थे, वहीं अब गंगा के रास्ते आवागमन आसान होने लगा है।

जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में जरूरत के अनुसार और जहाजों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। अधिकारियों का कहना है कि यदि यात्रियों और वाहनों की संख्या बढ़ती है, तो अतिरिक्त कार्गो जहाज भी लगाए जाएंगे।

भागलपुर और सीमांचल क्षेत्र के लिए यह सेवा फिलहाल नई उम्मीद बनकर उभरी है। प्रशासन को भरोसा है कि इससे व्यापारिक गतिविधियां दोबारा पटरी पर लौटेंगी और आम लोगों की परेशानियां काफी हद तक कम होंगी।

  • ये भी पढ़े..

    भागलपुर में मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर प्रशासन अलर्ट, कार्यक्रम स्थल पर तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार

    Share Add as a preferred…

    भागलपुर नगर निगम कार्यालय में कामकाज प्रभावित, कर्मचारियों की अनुपस्थिति से घंटों इंतजार करते रहे लोग

    Share Add as a preferred…