बिहार में नाबालिगों पर चलेगा बड़ा ट्रैफिक अभियान, गाड़ी चलाते पकड़े गए तो माता-पिता पर भी होगी कार्रवाई

पटना, 19 मई 2026: बिहार में अब नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने पर सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य परिवहन विभाग ने जून महीने से पूरे बिहार में विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है। इस अभियान के तहत स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सेंटर, मॉल और भीड़भाड़ वाले बाजारों के आसपास विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा। अगर कोई नाबालिग बाइक, स्कूटी या कार चलाते हुए पकड़ा गया, तो सिर्फ उस पर ही नहीं बल्कि उसके अभिभावकों पर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

परिवहन विभाग ने सभी जिलों के जिला परिवहन अधिकारियों यानी डीटीओ को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। अधिकारियों को साफ कहा गया है कि अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू होना चाहिए। सरकार का मानना है कि नाबालिगों के वाहन चलाने की बढ़ती घटनाएं सड़क हादसों की बड़ी वजह बन रही हैं।

अभियान के दौरान विशेष टीमें गठित की जाएंगी, जो सुबह स्कूल खुलने और छुट्टी के समय के अलावा शाम के वक्त भीड़भाड़ वाले इलाकों में जांच करेंगी। जांच के दौरान बिना लाइसेंस वाहन चला रहे किशोरों की पहचान की जाएगी। इसके अलावा हेलमेट, सीट बेल्ट और अन्य ट्रैफिक नियमों की भी जांच होगी।

परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मोटर वाहन कानून में पहले से ही स्पष्ट प्रावधान है कि 18 साल से कम उम्र का कोई भी व्यक्ति बिना वैध लाइसेंस वाहन नहीं चला सकता। इसके बावजूद राज्य के कई शहरों और कस्बों में बड़ी संख्या में नाबालिग खुलेआम बाइक और स्कूटी चलाते नजर आते हैं। कई मामलों में अभिभावक खुद बच्चों को वाहन चलाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

सरकार अब इसी मानसिकता को बदलने की कोशिश कर रही है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई नाबालिग वाहन चलाते पकड़ा गया, तो उसके अभिभावकों पर 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं, गंभीर मामलों में तीन महीने तक की जेल की सजा का भी प्रावधान है।

अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ दंड देने के लिए नहीं, बल्कि लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए की जा रही है। विभाग का मानना है कि जब तक परिवार खुद जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक सड़क हादसों में कमी लाना मुश्किल होगा।

परिवहन विभाग द्वारा की गई समीक्षा में यह बात सामने आई है कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे किशोरों की है, जिनके पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होता। कई बार कम उम्र के बच्चे तेज रफ्तार में गाड़ी चलाते हैं और ट्रैफिक नियमों को नजरअंदाज करते हैं, जिसके कारण गंभीर हादसे हो जाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि किशोर उम्र में वाहन चलाने को कई बच्चे “स्टेटस सिंबल” या रोमांच के रूप में देखते हैं। सोशल मीडिया और फिल्मों का प्रभाव भी इस प्रवृत्ति को बढ़ा रहा है। कई छात्र स्कूल या कोचिंग जाने के लिए बाइक और स्कूटी का इस्तेमाल करते हैं, जबकि उनकी उम्र कानूनी रूप से वाहन चलाने की नहीं होती।

परिवहन विभाग अब स्कूलों और कॉलेजों के साथ मिलकर जागरूकता अभियान भी चलाने की तैयारी कर रहा है। छात्रों को ट्रैफिक नियमों की जानकारी दी जाएगी और सड़क सुरक्षा के महत्व को समझाया जाएगा। विभाग चाहता है कि सिर्फ जुर्माना लगाने से नहीं, बल्कि जागरूकता बढ़ाकर भी हादसों को रोका जाए।

अधिकारियों के अनुसार, अभियान के दौरान पुलिस और परिवहन विभाग की संयुक्त टीम काम करेगी। जांच के लिए डिजिटल उपकरणों का भी इस्तेमाल किया जाएगा ताकि मौके पर ही वाहन और लाइसेंस की जानकारी की जांच हो सके। संदिग्ध मामलों में वाहन जब्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

बिहार सरकार का कहना है कि राज्य में सड़क सुरक्षा को लेकर पहले से ही कई कदम उठाए जा चुके हैं। हेलमेट नहीं पहनने, सीट बेल्ट का इस्तेमाल नहीं करने, ओवरस्पीडिंग और बिना लाइसेंस वाहन चलाने वालों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। मोटर वाहन कानून में संशोधन के बाद जुर्माने की राशि भी काफी बढ़ा दी गई है।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पहले लोग चालान को गंभीरता से नहीं लेते थे, लेकिन अब भारी जुर्माने की वजह से ट्रैफिक नियमों को लेकर सतर्कता बढ़ी है। फिर भी नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने की समस्या अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

इस अभियान के तहत खासतौर पर उन इलाकों पर फोकस किया जाएगा जहां बड़ी संख्या में छात्र आते-जाते हैं। स्कूल और कॉलेज प्रशासन को भी निर्देश दिए जा सकते हैं कि वे छात्रों को बिना लाइसेंस वाहन लाने से रोकें। कई निजी स्कूलों से भी इस संबंध में सहयोग मांगा जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क सुरक्षा सिर्फ सरकार या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज और परिवार की भी बड़ी भूमिका होती है। अगर माता-पिता खुद बच्चों को कम उम्र में वाहन चलाने की अनुमति देते हैं, तो हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

कई मामलों में देखा गया है कि नाबालिग बच्चे तेज रफ्तार में स्टंट करते हैं या ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करते। इससे न सिर्फ उनकी जान खतरे में पड़ती है, बल्कि दूसरे लोगों की सुरक्षा भी प्रभावित होती है। यही वजह है कि अब सरकार इस मुद्दे पर सख्ती दिखाने के मूड में है।

सोशल मीडिया पर भी इस फैसले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे जरूरी कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि सिर्फ जुर्माना लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। लोगों का मानना है कि स्कूलों और परिवारों को मिलकर बच्चों को ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक बनाना होगा।

फिलहाल परिवहन विभाग जून से शुरू होने वाले इस महा अभियान की तैयारी में जुटा हुआ है। आने वाले दिनों में जिलेवार टीमें बनाई जाएंगी और अभियान को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से सड़क हादसों में कमी आएगी और लोग ट्रैफिक नियमों को लेकर अधिक जिम्मेदार बनेंगे।

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