
पटना/हाजीपुर, 19 मई 2026: बिहार सरकार के लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) मंत्री और महुआ विधानसभा क्षेत्र के विधायक संजय सिंह ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसकी राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा हो रही है। आमतौर पर सरकारी कार्यक्रमों और प्रशासनिक बैठकों के लिए मंत्री सड़क मार्ग या सरकारी काफिले का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इस बार संजय सिंह ने जमुई दौरे के लिए ट्रेन से यात्रा कर अलग संदेश देने की कोशिश की।
मंत्री ने कहा कि यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण के संदेश से प्रेरित होकर लिया गया है। उनका मानना है कि आज के समय में सिर्फ भाषण देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जनप्रतिनिधियों को खुद उदाहरण पेश करना होगा ताकि आम लोगों तक सही संदेश पहुंचे।
संजय सिंह हाजीपुर से ट्रेन के जरिए जमुई रवाना हुए, जहां उन्हें सहयोग शिविर में शामिल होना था और जिले में चल रही विभिन्न योजनाओं की समीक्षा भी करनी थी। यात्रा के दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि देश में बढ़ते प्रदूषण और ईंधन की खपत को देखते हुए अब सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना बेहद जरूरी हो गया है।
उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल जैसे संसाधन सीमित हैं। यदि जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार लोग ही इन संसाधनों की बचत के लिए आगे नहीं आएंगे, तो समाज में जागरूकता कैसे आएगी। मंत्री ने कहा कि ट्रेन से यात्रा करना सिर्फ सुविधाजनक ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प है।
मंत्री ने इस दौरान यह भी कहा कि नेताओं और जनप्रतिनिधियों को अपनी जीवनशैली में सादगी लानी चाहिए। उन्होंने माना कि आम जनता अक्सर नेताओं को देखकर अपनी सोच बनाती है। ऐसे में अगर नेता खुद अनावश्यक खर्च और दिखावे से बचेंगे, तो समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा।
संजय सिंह का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में ईंधन की कीमतें और पर्यावरण संरक्षण दोनों बड़े मुद्दे बने हुए हैं। सरकार लगातार इलेक्ट्रिक वाहनों, सार्वजनिक परिवहन और ईंधन बचत को बढ़ावा देने की बात कर रही है। ऐसे में किसी मंत्री का ट्रेन से सफर करना राजनीतिक रूप से भी एक प्रतीकात्मक संदेश माना जा रहा है।
यात्रा के दौरान ट्रेन में मौजूद कई यात्रियों ने मंत्री से बातचीत भी की। कुछ लोगों ने उनकी सादगी की तारीफ की, तो कुछ ने स्थानीय समस्याओं को लेकर सीधे अपनी बात रखी। मंत्री ने यात्रियों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों तक उन्हें पहुंचाने का भरोसा दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के कदम जनता के बीच सकारात्मक छवि बनाने में मदद करते हैं। खासकर ऐसे समय में जब अक्सर नेताओं पर वीआईपी संस्कृति और फिजूल खर्ची के आरोप लगते रहते हैं, तब सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल लोगों को अलग संदेश देता है।
संजय सिंह ने कहा कि आज दुनिया जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्या से जूझ रही है। प्रदूषण और बढ़ते तापमान का असर आम लोगों की जिंदगी पर साफ दिखाई दे रहा है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण अब सिर्फ सरकारी नीति नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि ट्रेन यात्रा के जरिए न सिर्फ ईंधन की बचत होती है, बल्कि सड़क पर ट्रैफिक और प्रदूषण भी कम होता है। अगर अधिक से अधिक लोग सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें तो इससे देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों को फायदा होगा।
मंत्री ने यह भी कहा कि सरकारी विभागों को भी ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए नई योजनाओं पर गंभीरता से काम करना चाहिए। उन्होंने बताया कि PHED विभाग भी जल संरक्षण, स्वच्छ पेयजल और पर्यावरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है।
जमुई पहुंचने के बाद मंत्री संजय सिंह जिला प्रशासन के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक करेंगे। इस बैठक में PHED विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों से पेयजल आपूर्ति, पाइपलाइन परियोजनाओं, ग्रामीण जल योजनाओं और अन्य विकास कार्यों की जानकारी ली जाएगी।
बताया जा रहा है कि बैठक में जिले में चल रही जल जीवन हरियाली और स्वच्छ पेयजल से जुड़ी योजनाओं पर भी चर्चा होगी। मंत्री अधिकारियों को समय पर काम पूरा करने और योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने को लेकर दिशा-निर्देश देंगे।
सूत्रों के अनुसार, जमुई दौरे के दौरान मंत्री स्थानीय जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा सहयोग शिविर में शामिल होकर लोगों की समस्याएं सुनेंगे और उनके समाधान को लेकर अधिकारियों से चर्चा करेंगे।
मंत्री के ट्रेन से यात्रा करने को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज है। कई लोगों ने इसे सराहनीय कदम बताया है। यूजर्स का कहना है कि अगर जनप्रतिनिधि खुद सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करेंगे, तो आम लोगों में भी इसका सकारात्मक असर दिखाई देगा।
हालांकि कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक संदेश और छवि सुधारने की रणनीति भी बताया। लेकिन इसके बावजूद यह बात साफ है कि मंत्री का यह कदम चर्चा का विषय बन चुका है। बिहार की राजनीति में ऐसे उदाहरण कम ही देखने को मिलते हैं, जब कोई मंत्री सरकारी काफिले की जगह ट्रेन से यात्रा कर जनता के बीच पहुंचने का प्रयास करे।
विशेषज्ञों का मानना है कि नेताओं द्वारा इस तरह के प्रतीकात्मक कदम उठाने से समाज में व्यवहारिक बदलाव की शुरुआत हो सकती है। पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत जैसे मुद्दों पर सिर्फ सरकारी योजनाएं ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत भागीदारी भी जरूरी है।
फिलहाल मंत्री संजय सिंह का यह ट्रेन सफर बिहार में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखने वाली बात होगी कि क्या भविष्य में दूसरे जनप्रतिनिधि भी इस तरह की पहल करते हैं या यह सिर्फ एक प्रतीकात्मक संदेश बनकर रह जाता है।


