
भागलपुर/सबौर, 18 मई 2026। भागलपुर जिले के सबौर थाना क्षेत्र अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग प्रक्षेत्र के समीप बीती रात एक अत्यंत संदेहास्पद और संवेदनशील मामला प्रकाश में आया है, जिसने स्थानीय पुलिस प्रशासन और सामाजिक विभावों को पूरी तरह से अलर्ट मोड पर ला दिया है। क्षेत्र के धनकर मोड़ के आगे मुख्य मार्ग के किनारे अवस्थित एक घने और सुनसान बगीचे के मुहाने पर एक किशोरी अत्यंत संदिग्ध परिस्थितियों में सड़क किनारे बेसुध (अचेत) अवस्था में पड़ी पाई गई।
अंधेरे के समय राहगीरों और स्थानीय ग्रामीणों की नजर जब इस बेसुध लड़की पर पड़ी, तो प्रक्षेत्र के भीतर भारी हड़कंप मच गया और आनन-फानन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर एकत्रित हो गए। स्थानीय नागरिकों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए इसकी तत्काल आधिकारिक सूचना बिहार पुलिस की आपातकालीन सेवा हेल्पलाइन नंबर डायल-112 (Dial-112) को प्रेषित की, जिसके बाद पुलिस का खोजी दस्ता पूरी मुस्तैदी के साथ मौके पर पहुंचा और किशोरी को अपने विधिक संरक्षण में ले लिया।
सुनसान बगीचे के पास संदेहास्पद अवस्थिति और ग्रामीणों की तत्परता का विलेख
बीती रात घने अंधेरे के समय जब धनकर मोड़ से गुजरने वाले संपर्क मार्ग पर वाहनों की रफ्तार आंशिक रूप से धीमी हो चुकी थी, तभी कुछ स्थानीय युवकों ने सड़क किनारे बने एक बड़े आम और लीची के सुनसान बगीचे के पास एक मानव आकृति को पड़े देखा। समीप जाकर टॉर्च की रोशनी में जब भौतिक निरीक्षण किया गया, तो वहां एक लगभग 15-16 वर्षीय किशोरी पूरी तरह अचेत अवस्था में धूल-धूसरित पड़ी हुई थी। उसके शरीर में आंशिक चेतना तो अवशिष्ट थी, परंतु वह उठने, बैठने या सामान्य रूप से संवाद संधारित करने की शारीरिक स्थिति में बिल्कुल नहीं थी।

ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए उसे सुरक्षित स्थान पर बैठाया और उसके चेहरे पर ठंडे पानी के छीटें मारे। आंशिक रूप से होश में आने के बाद जब प्रबुद्ध नागरिकों ने उससे आत्मीय पूछताछ करने की प्रविधि शुरू की, तो उसने अत्यंत धीमी और लड़खड़ाती आवाज में अपना नाम सुषमा कुमारी दर्ज कराया। इसके साथ ही, उसने सूझबूझ का परिचय देते हुए अपने पिता का एक मोबाइल संपर्क नंबर भी सांकेतिक रूप से साझा किया, जिसके आधार पर आगे की विधिक कड़ियों को जोड़ना सुगम हो सका।
खगड़िया के परबत्ता से जुड़ाव और परिजनों का मानसिक अस्वस्थता का दावा
किशोरी द्वारा साझा किए गए मोबाइल नंबर पर सबौर थाना पुलिस और ग्रामीणों ने जब तुरंत संपर्क साधा, तो उसकी वास्तविक भौगोलिक अवस्थिति और पारिवारिक पृष्ठभूमि का पूरा खाका सामने आ गया। प्राप्त आधिकारिक जानकारियों के अनुसार, सुषमा कुमारी मूल रूप से पड़ोसी जिले खगड़िया के परबत्ता थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले थैगाय गांव की रहने वाली है। फोन पर सूचना मिलते ही किशोरी के रोते-बिलखते परिजनों ने पुलिस को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील कोण से अवगत कराया, जिसे पुलिस ने अपने दैनिक विलेखों में शामिल किया है।
परिजनों के आधिकारिक बयानों के अनुसार, सुषमा कुमारी की मानसिक स्थिति कतिपय समय से पूरी तरह संतुलित नहीं है और उसका स्थानीय स्तर पर चिकित्सीय उपचार संधारित किया जा रहा था। परिजनों ने बताया कि वह पिछले कुछ समय से बिना किसी को बताए अपने पैतृक विन्यास (घर) से अचानक लापता हो गई थी, जिसकी तलाश वे अपने स्तर पर रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में कड़ाई से कर रहे थे। खगड़िया से लापता होकर सुदूर भागलपुर के सबौर प्रक्षेत्र के एक सुनसान बगीचे तक उसके पहुंचने की इस भौगोलिक विसंगति ने पुलिस के खोजी दस्तों को भी गहन अनुसंधान के चक्रव्यूह में डाल दिया है।
आपातकालीन डायल-112 की कड़क दबिश और मेडिकल जांच की प्रणालियां
घटना की सूचना फ्लैश होते ही सबौर थाना क्षेत्र में गश्त कर रही बिहार पुलिस की आपातकालीन सेवा हेल्पलाइन डायल-112 (ERSS) की गाड़ी ने महज कुछ ही मिनटों के भीतर धनकर मोड़ के घटना स्थल पर अपनी कड़क दबिश दी। पुलिस बलों ने भीड़ को नियंत्रित करते हुए किशोरी को पूरी तरह से अपनी विधिक अभिरक्षा और सुरक्षात्मक संरक्षण में ले लिया। मामले की संवेदनशीलता, समय की कड़ाई और स्त्री सुरक्षा के कड़े प्रावधानों को देखते हुए पुलिस ने बिना कोई व्यावहारिक समय गंवाए, किशोरी को प्राथमिक उपचार और गहन स्वास्थ्य परीक्षण के लिए तुरंत भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय (मायागंज) अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में स्थानांतरित कराया।
डायल-112 की मुख्य रेस्क्यू टीम के प्रभारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल के गायनोकोलॉजी और फॉरेंसिक विंग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में किशोरी की संपूर्ण विधिक और चिकित्सीय जांच (मेडिकल एग्जामिनेशन) की प्रणालियां संचालित की जा रही हैं। इस चिकित्सकीय विलेख के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अचेत अवस्था में रहने के दौरान किशोरी के साथ किसी भी प्रकार का कोई बाहरी शारीरिक आघात, नशीले पदार्थों का प्रयोग, दुर्व्यवहार या आपराधिक कृत्य तो घटित नहीं हुआ है। पुलिस का कहना है कि फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारणों का आधिकारिक उद्भेदन संभव हो सकेगा।
इलाके में विभिन्न अफवाहों का बाजार और सबौर पुलिस का संतुलित रुख
धनकर मोड़ जैसे व्यस्त मार्ग से सटे सुनसान बगीचे के पास एक किशोरी के इस प्रकार बेसुध मिलने की वारदात के बाद से संपूर्ण सबौर और इसके बाहरी प्रक्षेत्रों में तरह-तरह की संदेहास्पद चर्चाओं और अफवाहों का बाजार पूरी तरह से गर्म हो गया है। स्थानीय नागरिकों के भीतर सुरक्षा व्यवस्था और एकांत क्षेत्रों में होने वाली असामाजिक गतिविधियों को लेकर आंशिक रोष और संशय देखा जा रहा है। कतिपय लोग इसे किसी बड़े आपराधिक सिंडिकेट या बहला-फुसलाकर अपहरण करने के कोण से भी जोड़कर देख रहे हैं।
हालांकि, सबौर थाना पुलिस और जिला मुख्यालय ने इस संवेदनशील मामले में एक अत्यंत संतुलित, निष्पक्ष और विधिक रुख अख्तियार किया है। पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि परिजनों द्वारा दी गई मानसिक अस्वस्थता की दलील को एक मुख्य आधार माना गया है, परंतु इसके समानांतर ही अन्य सभी संभावित आपराधिक, तकनीकी और वैज्ञानिक पहलुओं पर भी गहन अनुसंधान कड़ाई से जारी है। पुलिस की विशेष विंग धनकर मोड़ और बगीचे के आस-पास स्थापित पेट्रोल पंपों, दुकानों और राष्ट्रीय राजमार्ग के मुख्य काउंटरों पर लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के डिजिटल फुटेज खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किशोरी किस वाहन से या किन व्यक्तियों के साथ इस प्रक्षेत्र तक पहुंची थी।
परिजनों के आगमन के उपरांत ही पूरी होगी आगामी विधिक प्रविष्टि
सबौर थाना प्रभारी के अनुसार, खगड़िया के परबत्ता थाने को भी इस पूरे विलेख से आधिकारिक रूप से अवगत करा दिया गया है और वहां से परिजनों का एक दल भागलपुर के लिए प्रस्थान कर चुका है। किशोरी को फिलहाल महिला पुलिस कर्मियों की कड़ी सुरक्षात्मक निगरानी के बीच अस्पताल के सुरक्षित वार्ड में संधारित रखा गया है, जहां आवश्यक चिकित्सा और ग्लूकोज चढ़ाए जाने के बाद उसकी शारीरिक स्थिति अब पूरी तरह से स्थिर और खतरे से बाहर बताई जा रही है।
पुलिस प्रशासन ने साफ किया है कि मायागंज अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा सौंपी जाने वाली अंतिम मेडिकल जांच रिपोर्ट (फॉरेंसिक साक्ष्य) के आने और किशोरी के माता-पिता के आधिकारिक लिखित बयानों की विधिक समीक्षा करने के बाद ही इस मामले की अगली कानूनी रूपरेखा तय की जाएगी। यदि जांच विलेखों में किसी भी प्रकार की आपराधिक विसंगति, प्रताड़ना या बाहरी संलिप्तता का प्रमाण मिलता है, तो अज्ञात दोषियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत और गैर-जमानती धाराओं के तहत कड़ी दंडात्मक प्राथमिकी दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। तब तक प्रक्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल गश्त कर रहा है।


