मोतिहारी में करोड़ों के सरकारी फंड घोटाले का खुलासा, 18 लाख गबन के आरोप में बैंक मैनेजर गिरफ्तार

मोतिहारी। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले से आर्थिक अपराध से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां सहकारिता बैंक के एक शाखा प्रबंधक पर सरकारी फंड में भारी गड़बड़ी और लाखों रुपये के गबन का आरोप लगा है। मोतिहारी पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी बैंक मैनेजर को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद बैंकिंग विभाग और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान अजय कुमार राउत के रूप में हुई है, जो पकड़ीदयाल स्थित को-ऑपरेटिव बैंक शाखा में शाखा प्रबंधक के पद पर कार्यरत था। उस पर करीब 17 लाख 75 हजार रुपये के सरकारी फंड के गबन का आरोप है। पुलिस के अनुसार आरोपी पिछले कई महीनों से फरार चल रहा था और लगातार अपनी लोकेशन बदलकर गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रहा था।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, तकनीकी सूचना और गुप्त इनपुट के आधार पर पकड़ीदयाल थाना पुलिस ने ढाका इलाके में घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उसे पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है और मामले से जुड़े कई अहम दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

इस पूरे वित्तीय घोटाले का खुलासा अप्रैल महीने में हुआ था, जब बैंक की वार्षिक ऑडिट और निरीक्षण प्रक्रिया शुरू की गई। जांच के दौरान ऑडिट टीम ने बैंक के रिकॉर्ड और मुख्य कैश का मिलान किया, जिसमें करीब 17.75 लाख रुपये की भारी कमी सामने आई। बैंक के दस्तावेजों और वास्तविक कैश के बीच इतना बड़ा अंतर देखकर अधिकारियों के होश उड़ गए।

सूत्रों के अनुसार, शुरुआती जांच में ही शक शाखा प्रबंधक अजय कुमार राउत पर गया। जब अधिकारियों ने उससे कैश की कमी को लेकर जवाब मांगा तो वह संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाया। इसके बाद विभागीय स्तर पर मामले की गहन जांच शुरू की गई।

जांच में यह बात सामने आई कि सरकारी योजनाओं और बैंकिंग लेनदेन से जुड़ी राशि में अनियमितता की गई थी। आरोप है कि आरोपी ने बैंक के कैश रिकॉर्ड में हेरफेर कर रकम को धीरे-धीरे गायब किया। अधिकारियों का मानना है कि अगर समय पर ऑडिट नहीं होता तो यह मामला और लंबा खिंच सकता था।

मामला स्पष्ट होने के बाद बैंक प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पकड़ीदयाल थाने में आरोपी शाखा प्रबंधक के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी शुरू कर दी थी। हालांकि आरोपी लगातार पुलिस से बचता रहा और कई ठिकाने बदलता रहा।

मोतिहारी के पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि आर्थिक अपराध और सरकारी धन के दुरुपयोग को लेकर पुलिस बेहद गंभीर है। उन्होंने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने ढाका इलाके में कार्रवाई कर आरोपी को गिरफ्तार किया है।

एसपी ने कहा कि जनता के पैसे की हेराफेरी करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि इस पूरे मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।

पुलिस अब बैंक के वित्तीय रिकॉर्ड, कैश बुक, लेनदेन से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल डेटा की भी जांच कर रही है। अधिकारियों को आशंका है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि गबन की रकम कहां खर्च की गई और क्या इसे किसी अन्य खाते या संपत्ति में लगाया गया।

बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि सहकारिता बैंकों में पारदर्शिता और निगरानी की कमी के कारण इस तरह की वित्तीय अनियमितताओं की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि हाल के वर्षों में ऑडिट प्रक्रिया को मजबूत किया गया है, लेकिन कई जगहों पर अब भी आंतरिक नियंत्रण प्रणाली कमजोर बनी हुई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सहकारिता बैंक ग्रामीण इलाकों में किसानों, छोटे व्यापारियों और आम लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में बैंक अधिकारियों द्वारा सरकारी फंड में गड़बड़ी की खबर सामने आने से लोगों का भरोसा प्रभावित होता है।

घटना सामने आने के बाद बैंक के ग्राहकों में भी चिंता का माहौल है। कई लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि अन्य कर्मचारी भी शामिल पाए जाएं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।

सूत्रों के मुताबिक, पुलिस आरोपी के मोबाइल फोन, बैंक ट्रांजैक्शन और कॉल डिटेल्स की भी जांच कर रही है। आर्थिक अपराध इकाई से जुड़े अधिकारियों की मदद भी ली जा सकती है ताकि पैसों के लेनदेन की पूरी श्रृंखला का पता लगाया जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक अपराधों के मामलों में तकनीकी जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है। डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन रिकॉर्ड की मदद से कई छिपे हुए तथ्य सामने आ सकते हैं। पुलिस इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।

इस घटना ने बैंकिंग व्यवस्था में जवाबदेही और निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कई लोगों का कहना है कि अगर समय रहते नियमित निरीक्षण होता तो इतनी बड़ी राशि के गायब होने की नौबत नहीं आती।

फिलहाल गिरफ्तार बैंक मैनेजर से लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस अदालत से रिमांड की मांग कर सकती है ताकि उससे विस्तार से पूछताछ कर पूरे घोटाले की परतें खोली जा सकें।

मोतिहारी पुलिस की इस कार्रवाई को आर्थिक अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी धन और जनता की जमा पूंजी से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

अब सभी की नजर पुलिस जांच और आने वाले दिनों में इस मामले में होने वाले नए खुलासों पर टिकी हुई है।

  • ये भी पढ़े..

    भागलपुर में गैस, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य, प्रशासन ने अफवाहों से बचने की अपील की

    Share Add as a preferred…

    विक्रमशिला सेतु पर वायरल रीलों को लेकर प्रशासन सख्त, भ्रामक जानकारी फैलाने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई

    Share Add as a preferred…