नीदरलैंड में PM मोदी की बड़ी चेतावनी, बोले- जंग और ऊर्जा संकट नहीं रुके तो दुनिया फिर गरीबी के दौर में चली जाएगी

द हेग। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड की राजधानी द हेग में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए दुनिया को आने वाले खतरों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी, वैश्विक युद्धों और ऊर्जा संकट ने पूरी दुनिया को अस्थिर कर दिया है और यदि हालात जल्द नहीं बदले तो करोड़ों लोग दोबारा गरीबी की दलदल में धकेले जा सकते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दशक दुनिया के लिए आपदाओं का दशक बनता जा रहा है और वैश्विक समुदाय को मिलकर समाधान निकालना होगा।

प्रधानमंत्री मोदी इन दिनों पांच देशों के दौरे पर हैं और नीदरलैंड उनकी यात्रा का दूसरा पड़ाव है। द हेग में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था, सप्लाई चेन, युद्ध, ऊर्जा सुरक्षा और भारत-नीदरलैंड संबंधों पर विस्तार से बात की। उनके भाषण में जहां एक तरफ दुनिया के सामने खड़े संकटों की चिंता दिखाई दी, वहीं दूसरी ओर भारत की बढ़ती भूमिका और संभावनाओं का भी उल्लेख किया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया अभी तक कोविड महामारी के प्रभाव से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी कि कई हिस्सों में युद्ध शुरू हो गए। इन संघर्षों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि युद्धों के कारण खाद्य संकट, ईंधन संकट और महंगाई जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं। इसके साथ ही ऊर्जा संकट ने कई देशों की आर्थिक व्यवस्था को झकझोर दिया है।

मोदी ने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो पिछले कई दशकों में दुनिया ने गरीबी उन्मूलन और आर्थिक विकास के क्षेत्र में जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे खतरे में पड़ सकती हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि करोड़ों लोग फिर से गरीबी की स्थिति में पहुंच सकते हैं। प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में आर्थिक मंदी, महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भरोसेमंद और मजबूत सप्लाई चेन की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया रेजिलिएंट सप्लाई चेन की बात कर रही है। कोविड महामारी और युद्धों ने यह साबित कर दिया कि यदि वैश्विक सप्लाई नेटवर्क बाधित होता है तो उसका असर हर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में भारत और नीदरलैंड मिलकर पारदर्शी, विश्वसनीय और भविष्य के लिए तैयार सप्लाई चेन बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत तेजी से बदल रहा है और देश के लोगों की उम्मीदें तथा आकांक्षाएं पहले से कहीं ज्यादा बड़ी हो चुकी हैं। यही वजह है कि भारत विकास के नए रास्तों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का लोकतंत्र देश को नई ऊर्जा और स्थिरता प्रदान कर रहा है, जिससे वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।

नीदरलैंड दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात वहां के प्रधानमंत्री रोब जेट्टेन से भी होनी है। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, रक्षा, तकनीक, ग्रीन एनर्जी, सेमीकंडक्टर और कृषि समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। माना जा रहा है कि यह दौरा भारत और नीदरलैंड के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देगा।

प्रधानमंत्री मोदी का नीदरलैंड पहुंचने पर विशेष स्वागत किया गया। एयरपोर्ट पर नीदरलैंड के विदेश मंत्री टॉम बेरेन्डसेन, रियर एडमिरल लुडगर ब्रुम्मेलार और नीदरलैंड में भारत के राजदूत कुमार तुहिन ने उनका स्वागत किया। भारतीय समुदाय के लोगों ने भी प्रधानमंत्री के स्वागत में बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।

यह प्रधानमंत्री मोदी की दूसरी नीदरलैंड यात्रा है। इससे पहले वह वर्ष 2017 में वहां गए थे। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के संबंधों में तेजी से विस्तार हुआ है। पहले भारत और नीदरलैंड के रिश्ते मुख्य रूप से व्यापार, निवेश, कृषि, जल प्रबंधन और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों तक सीमित थे, लेकिन अब दोनों देशों के बीच तकनीक और रणनीतिक क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ा है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत और नीदरलैंड अब सेमीकंडक्टर, इनोवेशन, रक्षा तकनीक, साइबर सुरक्षा, शिक्षा और रिन्युएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में भी साथ काम कर रहे हैं। खासकर सेमीकंडक्टर सेक्टर में सहयोग को लेकर दोनों देशों के बीच काफी उम्मीदें हैं। वैश्विक स्तर पर चिप निर्माण और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच भारत इस क्षेत्र में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाना चाहता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नीदरलैंड की तकनीकी क्षमता और भारत के विशाल बाजार का संयोजन दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में भारतीय समुदाय की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि विदेशों में बसे भारतीय न केवल भारत की संस्कृति और परंपराओं का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, बल्कि वे वैश्विक अर्थव्यवस्था और समाज में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने भारतीय समुदाय को भारत और नीदरलैंड के बीच मजबूत संबंधों की बड़ी ताकत बताया।

दुनिया के मौजूदा हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी का संदेश केवल भारत या नीदरलैंड तक सीमित नहीं माना जा रहा है। उनके भाषण को वैश्विक मंच पर बढ़ते संकटों के बीच एक चेतावनी और सहयोग की अपील के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने साफ संकेत दिया कि यदि दुनिया ने समय रहते युद्ध, ऊर्जा संकट और आर्थिक अस्थिरता पर नियंत्रण नहीं किया तो आने वाले वर्षों में हालात और भयावह हो सकते हैं।

फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक और आर्थिक विशेषज्ञ इसे वैश्विक व्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका और चिंताओं के रूप में देख रहे हैं। आने वाले दिनों में उनकी पांच देशों की यात्रा से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण समझौते और घोषणाएं भी सामने आ सकती हैं।

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