​विक्रमशिला सेतु संकट पर बरसे सांसद पप्पू यादव: मुफ्त फेरी सेवा की मांग, जनता के लिए खुद चलाएंगे पांच नाव और स्टीमर

भागलपुर। भागलपुर के बरारी घाट पर गुरुवार को सियासी सरगर्मी उस समय सातवें आसमान पर पहुंच गई जब पूर्णिया के नवनिर्वाचित सांसद पप्पू यादव अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ जलमार्ग से गंगा पार कर पहुंचे। बरारी घाट पर कदम रखते ही उनके तेवर पूरी तरह तल्ख नजर आए और उन्होंने विक्रमशिला सेतु की मरम्मत में हो रही देरी को लेकर सरकार और प्रशासनिक तंत्र को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जिस पुल पर लाखों लोगों का आवागमन निर्भर है, उसकी मरम्मत में इतना लंबा समय लगना सरकारी उदासीनता का जीता-जागता सबूत है। इस संकट की घड़ी में जब जनता त्रस्त है, तब प्रशासन कछुए की गति से काम कर रहा है। सांसद ने साफ शब्दों में कहा कि अगर प्रशासनिक नीतियां सही होतीं तो यह मार्ग सात दिनों के भीतर बहाल हो जाना चाहिए था।

चीन की निर्माण गति से तुलना और सरकारी तंत्र पर तीखा हमला

​गंगा पार करने के बाद पत्रकारों से मुखातिब होते हुए पप्पू यादव ने वैश्विक स्तर के निर्माण कार्यों का उदाहरण देकर बिहार की व्यवस्था को घेरा। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक युग में जब तकनीक इतनी उन्नत हो चुकी है, तब हमारे यहां एक स्लैब को दुरुस्त करने में हफ्तों का समय जाया किया जा रहा है। उन्होंने पड़ोसी देश चीन का जिक्र करते हुए कहा कि वहां एक-एक दिन में दस-दस बड़े पुलों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाता है, लेकिन हमारे राज्य में एक महत्वपूर्ण सेतु की मामूली मरम्मत के लिए पूरी व्यवस्था बेबस नजर आ रही है।

​उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर हमारे सिस्टम में क्या तकनीकी या प्रशासनिक कमी है जो इतने दिनों बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है? क्या हमारे पास अभियंताओं या आधुनिक मशीनों का अभाव है? सांसद ने कहा कि यह देरी केवल तकनीकी नहीं है, बल्कि इसके पीछे इच्छाशक्ति की भारी कमी है। जब तक शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक बिहार की जनता इसी तरह बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसती रहेगी।

जनता को मिले राहत: दस-दस मुफ्त जहाजों के संचालन की मांग

​विक्रमशिला सेतु के बंद होने से दोनों ओर फंसे यात्रियों की कठिनाइयों को देखते हुए पप्पू यादव ने सरकार के सामने एक बड़ी मांग रखी। उन्होंने कहा कि जब तक पुल पूरी तरह चालू नहीं हो जाता, तब तक गंगा के दोनों किनारों के बीच कम से कम दस बड़े जहाजों का संचालन किया जाना चाहिए और यह पूरी सेवा आम जनता के लिए पूरी तरह निशुल्क होनी चाहिए।

​उन्होंने सरकार की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या सूबे के खजाने में जनता को मुफ्त यात्रा सुविधा देने के लिए पैसे कम पड़ गए हैं? सरकार का प्राथमिक दायित्व लोक कल्याण और नागरिकों को निर्बाध सुविधाएं प्रदान करना होता है, न कि संकट के समय उन्हें भाग्य के भरोसे छोड़ देना। वर्तमान में नाव चालकों द्वारा मनमाना किराया वसूले जाने और सुरक्षा मानकों की अनदेखी किए जाने पर भी उन्होंने चिंता व्यक्त की और कहा कि मुफ्त सरकारी फेरी सेवा ही इस समस्या का एकमात्र त्वरित समाधान है।

सिंगला कंपनी और समानांतर पुल के निर्माण पर गंभीर आरोप

​ढांचे के निर्माण में हो रही गड़बड़ियों की ओर इशारा करते हुए सांसद ने निर्माण कार्य में लगी सिंगला कंपनी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि इस कंपनी की कार्यप्रणाली और पूर्व में हुई दुर्घटनाओं को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार को एक या दो नहीं, बल्कि पूरे 50 पत्र लिखे हैं। इसके बावजूद कंपनी के खिलाफ कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई, जो कई तरह के संदेहों को जन्म देती है।

​उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि इतने लंबे समय के बाद भी गंगा पर समानांतर पुल का निर्माण कार्य पूरा नहीं किया जा सका। अगर वह पुल समय पर तैयार हो जाता, तो आज विक्रमशिला सेतु पर दबाव बढ़ने या उसके क्षतिग्रस्त होने से पूरा इलाका इस तरह टापू में तब्दील नहीं होता। उन्होंने निर्माणाधीन संरचना की गुणवत्ता पर उंगली उठाते हुए कहा कि जिस तरह जैसे-तैसे और आनन-फानन में ढांचा खड़ा किया जा रहा है, उसे देखकर यह साफ कहा जा सकता है कि आगे चलकर यह पुल भी भरभरा कर गिर जाएगा। उन्होंने इसके साथ ही देश भर में चर्चा का विषय बने नीट परीक्षा पेपर लीक मामले पर भी सरकार को घेरा और कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाला एक बड़ा गिरोह सक्रिय है, जिसे राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।

एनडीआरएफ की नाव से दो घंटे तक किया गंगा का सर्वेक्षण

​नवगछिया से मिली जानकारी के अनुसार, विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने से उत्पन्न हुई स्थानीय समस्याओं को गहराई से समझने के लिए पप्पू यादव ने खुद कमान संभाली। उन्होंने जाह्नवी चौक घाट से लेकर बरारी घाट तक राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की विशेष मोटर बोट पर सवार होकर लगभग दो घंटे तक गंगा नदी के जलमार्ग का व्यापक सर्वेक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नदी के जलस्तर, नावों के परिचालन के रास्तों और घाटों पर उमड़ने वाली यात्रियों की भारी भीड़ का भौतिक निरीक्षण किया।

​सर्वेक्षण के दौरान उन्होंने नावों पर सफर कर रहे दैनिक यात्रियों, सब्जी विक्रेताओं और दूध व्यवसायियों से सीधे बातचीत की और उनकी समस्याओं को सुना। यात्रियों ने उन्हें बताया कि पुल बंद होने से न केवल उनका समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि नावों के सीमित परिचालन के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी हमेशा बना रहता है। इस व्यापक निरीक्षण के बाद सांसद ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तात्कालिक राहत देने का मन बनाया।

पप्पू यादव का अपना प्रयास: पांच नाव और एक स्टीमर का होगा संचालन

​सरकारी व्यवस्था की सुस्ती को देखते हुए पूर्णिया सांसद ने केवल मांगों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि आम जनता के लिए अपनी व्यक्तिगत क्षमता से राहत पहुंचाने की एक बड़ी घोषणा कर दी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से ऐलान किया कि गंगा पार करने वाले लोगों की सहूलियत के लिए उनकी तरफ से बहुत जल्द पांच बड़ी नावें और एक आधुनिक स्टीमर का परिचालन शुरू किया जाएगा। यह सेवा पूरी तरह से उनके व्यक्तिगत प्रयासों और कोष के माध्यम से संचालित की जाएगी ताकि स्थानीय लोगों को आवागमन में हो रही घोर परेशानी से तुरंत मुक्ति मिल सके।

​इस राहत अभियान और सर्वेक्षण कार्यक्रम के दौरान उनके साथ कई स्थानीय और जिला स्तर के प्रमुख नेता व कार्यकर्ता मुस्तैद रहे। इनमें मुख्य रूप से जिला अध्यक्ष नीरज यादव, महासचिव जयप्रकाश यादव, विकास कुशवाहा, बजरंग भगत, सत्यम वर्मा और प्रियांशु सहित कई अन्य गणमान्य लोग शामिल थे। इन सभी नेताओं ने सांसद के इस लोक कल्याणकारी फैसले का स्वागत किया और कहा कि जब सरकारी तंत्र सो रहा हो, तब जनभावनाओं का सम्मान करते हुए ऐसे व्यावहारिक कदम उठाना ही एक सच्चे जनप्रतिनिधि की पहचान है। इन नावों और स्टीमर के संचालन के लिए जाह्नवी चौक और बरारी घाट पर विशेष कमेटियों का गठन किया जा रहा है ताकि सुरक्षा और सुगमता सुनिश्चित की जा सके।

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