बिहार में मछली पालकों के लिए खास पहल, मोबाइल ऐप बताएगा मछलियों की बीमारी

Bihar में नीली क्रांति को मजबूत करने और मछली पालकों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए Dr. Rajendra Prasad Central Agricultural University ने नई पहल शुरू की है। विश्वविद्यालय के मत्स्य विभाग ने एक खास मोबाइल ऐप विकसित किया है, जिसकी मदद से मछली पालक मछलियों की बीमारी की पहचान कर समय पर वैज्ञानिक सलाह प्राप्त कर सकेंगे।

समस्तीपुर में बड़े पैमाने पर होता है मत्स्य पालन

Samastipur जिले में सरकारी, गैर-सरकारी सहायता और निजी स्तर पर बड़े पैमाने पर मछली पालन किया जाता है। यहां नदियों, तालाबों और विभिन्न जलाशयों में कई प्रकार की मछलियों का उत्पादन होता है।

मत्स्य पालन जिले के किसानों और व्यवसायियों के लिए आय का बड़ा स्रोत बन चुका है, लेकिन अचानक फैलने वाली बीमारियों के कारण हर साल भारी आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।

बीमारियों से होता है बड़ा नुकसान

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी एक मछली में शुरू हुई बीमारी यदि समय पर पहचानी न जाए तो पूरा तालाब प्रभावित हो सकता है। कई बार गलत इलाज या जानकारी के अभाव में स्थिति और गंभीर हो जाती है।

इसी समस्या को देखते हुए विश्वविद्यालय ने NSPDT मोबाइल ऐप तैयार किया है।

फोटो अपलोड कर मिल सकेगी वैज्ञानिक सलाह

मत्स्य विभाग के वैज्ञानिक Rajeev Kumar Brahmachari ने बताया कि ऐप के जरिए मछली पालक बीमारी की शुरुआती पहचान कर सकते हैं।

अगर मछलियों में दाग, फफूंदी, घाव या किसी प्रकार का असामान्य बदलाव दिखाई देता है, तो पालक उसकी फोटो लेकर ऐप पर अपलोड कर सकते हैं। इसके बाद संबंधित वैज्ञानिक बीमारी की जांच कर उचित सलाह देंगे।

समय पर इलाज से बच सकेगी मछलियों की जान

वैज्ञानिकों का कहना है कि समय पर बीमारी की पहचान होने से मछलियों को मरने से बचाया जा सकता है। इससे उत्पादन में गिरावट और आर्थिक नुकसान दोनों कम होंगे।

विश्वविद्यालय के अनुसार, मछली पालक संस्थान के निर्धारित नियमों के तहत इस ऐप को डाउनलोड कर उपयोग कर सकते हैं।

नीली क्रांति को मिलेगी नई दिशा

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तकनीक का सही तरीके से उपयोग किया गया तो बिहार में मत्स्य उत्पादन को नई गति मिल सकती है। इससे मछली पालकों की आय बढ़ेगी और आधुनिक “स्मार्ट फिश फार्मिंग” को बढ़ावा मिलेगा।

साथ ही, सरकार और विश्वविद्यालय की योजनाओं का लाभ भी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सकेगा।

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