बिहार में मौसम का महा-बदलाव: 7 जिलों में ‘येलो अलर्ट’ के साथ ठनका और आंधी का तांडव, 60 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

पटना। बिहार की तपती धरती और सूरज की आग उगलती किरणों के बीच प्रकृति ने अपनी चाल बदल ली है। पिछले कई दिनों से लू के थपेड़ों और उमस भरी गर्मी से बेहाल बिहारवासियों के लिए राहत और आफत की मिली-जुली खबर सामने आई है। मौसम विज्ञान केंद्र, पटना ने राज्य के उत्तर-पूर्वी और सीमांचल के सात महत्वपूर्ण जिलों में ‘येलो अलर्ट’ जारी करते हुए अगले 24 घंटों के भीतर भारी उथल-पुथल की चेतावनी दी है। सुपौल, अररिया, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया और कटिहार में बादलों का डेरा जमने लगा है और यहाँ न केवल मध्यम से तेज बारिश होने के आसार हैं, बल्कि 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली विनाशकारी हवाएं और आसमानी बिजली (ठनका) गिरने का भी प्रबल अंदेशा जताया गया है। बुधवार की रात से ही राज्य के मध्य और पश्चिमी हिस्सों में जो बदलाव शुरू हुआ था, उसने अब व्यापक रूप ले लिया है।

सीमांचल में ‘येलो अलर्ट’: गरज के साथ बरसेंगे बादल

​बिहार के भौगोलिक नक्शे पर नजर डालें तो सीमांचल और उत्तर-पूर्वी हिस्से हमेशा से मौसमी बदलावों के प्रवेश द्वार रहे हैं। मौसम विभाग ने जिन सात जिलों—सुपौल, अररिया, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया और कटिहार—के लिए अलर्ट जारी किया है, वहां स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन जिलों में गरज के साथ छींटे पड़ने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

​हवा की गति इस बार सबसे बड़ी चिंता का विषय है। 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं न केवल कच्चे मकानों और झोपड़ियों के लिए खतरा हैं, बल्कि खेतों में खड़ी फसलों और पेड़ों को भी नुकसान पहुँचा सकती हैं। विशेषकर आम और लीची के बागानों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। वज्रपात यानी ठनका गिरने की संभावना को देखते हुए इन जिलों के प्रशासन को सतर्क कर दिया गया है। लोगों से अपील की गई है कि वे बादलों की गर्जना सुनते ही पक्के मकानों या सुरक्षित स्थानों पर शरण लें।

बुधवार की रात: पटना से गया तक अचानक बदली फिजा

​राज्य की राजधानी पटना समेत कई जिलों में बुधवार की रात किसी फिल्मी दृश्य की तरह मौसम ने करवट ली। दिन भर की भीषण गर्मी के बाद रात के सन्नाटे को तेज आंधियों ने चीर दिया। पटना, भोजपुर, बक्सर, मुजफ्फरपुर, सारण, सीवान और वैशाली में धूलभरी हवाएं चलीं, जिससे धूल की एक चादर सड़कों पर बिछ गई। हालांकि, इन हवाओं के चलने से तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को रात में चैन की नींद आई।

​गयाजी की बात करें तो वहां का नजारा और भी डरावना लेकिन राहत देने वाला रहा। गया में अचानक बिजली कड़कने लगी और बादलों की भीषण गर्जना के साथ हल्की बूंदाबांदी हुई। दक्षिण बिहार के अन्य जिलों में भी बादलों की आवाजाही ने सूरज की तपिश को कम कर दिया है। रात के समय चली इन ठंडी हवाओं ने वातावरण में मौजूद ‘हीट वेव’ के प्रभाव को फिलहाल के लिए खत्म कर दिया है।

क्यों बिगड़ रहा है मौसम? वैज्ञानिकों का विश्लेषण

​बिहार में इस समय हो रहे मौसमी बदलाव के पीछे विशुद्ध रूप से ‘प्री-मॉनसून’ गतिविधियों का हाथ है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी वाली हवाएं बिहार के वायुमंडल में प्रवेश कर रही हैं। जब बंगाल की खाड़ी से आने वाली यह नमी स्थानीय स्तर पर बढ़े हुए तापमान (हीटिंग) से टकराती है, तो ‘लोकल कन्वेक्टिव क्लाउड्स’ यानी गरजने वाले बादलों का निर्माण होता है।

​चूंकि सीमांचल और उत्तर-पूर्वी बिहार की भौगोलिक स्थिति पहाड़ों और जल निकायों के करीब है, इसलिए वहां यह प्री-मॉनसून सिस्टम कहीं ज्यादा प्रभावी और मजबूत बना हुआ है। नमी और गर्मी का यह टकराव ही तेज हवाओं और ठनका का कारण बनता है। यह स्थिति अगले 48 घंटों तक बनी रह सकती है, क्योंकि समुद्र से आने वाली हवाओं का प्रवाह निरंतर जारी है।

किसानों और आम जन के लिए विशेष सावधानी

​मौसम के इस बिगड़े मिजाज ने सबसे ज्यादा चिंता किसानों की बढ़ा दी है। इस समय खेतों में कई प्रकार की फसलें तैयार हैं और अचानक आने वाली आंधी-बारिश उन्हें बर्बाद कर सकती है। कृषि विभाग और मौसम विभाग ने संयुक्त रूप से किसानों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। किसानों से कहा गया है कि वे खेतों में सिंचाई का काम फिलहाल रोक दें और कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचा दें।

​ठनका (वज्रपात) बिहार के लिए एक बड़ा अभिशाप साबित होता रहा है। खुले आसमान के नीचे काम करने वाले किसान और पशुपालक इसके सबसे आसान शिकार बनते हैं। सलाह दी गई है कि यदि आप खेत में हैं और बादल गरजने लगें, तो पेड़ों के नीचे बिल्कुल न छिपें, क्योंकि ऊंचे पेड़ बिजली को सबसे जल्दी आकर्षित करते हैं। बिजली के खंभों, मोबाइल टावर और लोहे की बाड़ से भी दूरी बनाए रखना अनिवार्य है।

अगले कुछ दिनों का पूर्वानुमान: गर्मी और बारिश की लुका-छिपी

​बिहार में मौसम का यह मिजाज बहुत लंबे समय तक टिकाऊ नहीं रहने वाला है। मौसम विभाग का अनुमान है कि एक से दो दिनों की इस राहत के बाद राज्य में एक बार फिर उमस वाली गर्मी का दौर लौटेगा। खासकर दक्षिण और पश्चिम बिहार के जिलों—जैसे रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद और नवादा—में पारा फिर से 42-43 डिग्री के पार जा सकता है। हवा में नमी की मात्रा बढ़ने के कारण लोगों को पसीने वाली गर्मी और बेचैनी झेलनी पड़ सकती है।

​सीमांचल और तराई वाले इलाकों में मिला-जुला असर रहेगा। वहां बीच-बीच में बादल छाए रहेंगे और बारिश की छिटपुट घटनाएं होती रहेंगी। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता और स्थानीय दबाव के कारण बिहार के अलग-अलग हिस्सों में तापमान और हवा के दबाव में बड़ा अंतर देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, मई का यह पखवाड़ा बिहार के लोगों को कभी ठंडी हवाओं का सुकून देगा, तो कभी उमस और लू की चुनौती पेश करेगा। लोगों को सलाह दी गई है कि वे लू और बारिश के इस उतार-चढ़ाव भरे दौर में अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें और पर्याप्त जल का सेवन करें।

क्षेत्रीय मौसम की स्थिति: जिलावार संभावना

  • पटना एवं आसपास: आसमान में आंशिक बादल छाए रहेंगे, तेज हवाओं के साथ हल्की बूंदाबांदी की संभावना। अधिकतम तापमान 36-38 डिग्री के बीच रहने की उम्मीद।
  • उत्तर बिहार (मुजफ्फरपुर, दरभंगा): धूलभरी आंधी और गरज के साथ छींटे पड़ सकते हैं। दोपहर के बाद मौसम में बदलाव की अधिक संभावना।
  • दक्षिण बिहार (भागलपुर, बांका, मुंगेर): यहाँ गर्मी का असर बना रहेगा, लेकिन शाम के समय चलने वाली ठंडी हवाएं राहत देंगी। ठनका गिरने का खतरा यहाँ भी बना हुआ है।
  • सीमांचल (पूर्णिया, किशनगंज): अगले 24 घंटे भारी बारिश और तेज अंधड़ के नाम रहेंगे। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
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