
पटना। बिहार की सड़कों पर अब पेट्रोल और डीजल के धुएं की जगह बिजली की रफ़्तार दिखाई देगी। पर्यावरण को बचाने और परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में सम्राट चौधरी सरकार ने बुधवार को एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में ‘मुख्यमंत्री बिहार पर्यावरण अनुकूल परिवहन रोजगार योजना’ को विधिवत मंजूरी दे दी गई है। इस नई नीति का सबसे बड़ा आकर्षण राज्य की महिलाओं के लिए है, जिन्हें अब अपनी पसंदीदा इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर सरकार की ओर से एक लाख रुपये तक की भारी भरकम प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके साथ ही, दोपहिया वाहन खरीदने वाले आम लोगों और विशेषकर महिलाओं को भी 12 हजार रुपये तक का अनुदान मिलेगा। सरकार का यह फैसला न केवल प्रदूषण को कम करने के लिए है, बल्कि इसके जरिए राज्य में बड़े पैमाने पर स्वरोजगार के अवसर पैदा करने और महिलाओं को आवागमन में आत्मनिर्भर बनाने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
2030 तक का लक्ष्य: 30 प्रतिशत गाड़ियां होंगी इलेक्ट्रिक
बिहार सरकार ने इस योजना के माध्यम से एक दूरगामी लक्ष्य निर्धारित किया है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, राज्य सरकार का उद्देश्य वर्ष 2030 तक बिहार में बिकने वाले सभी नए वाहनों में से कम से कम 30 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की सुनिश्चित करना है। यह निर्णय वैश्विक अभियान ‘ईवी 30@30’ के अनुरूप लिया गया है, जिसका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा खपत को कम करना और पर्यावरण को शुद्ध रखना है। सरकार का मानना है कि वायु गुणवत्ता बनाए रखने और बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग के खतरों से निपटने के लिए परंपरागत ईंधन पर निर्भरता कम करना अब अनिवार्य हो गया है। इस योजना को लागू करने के लिए ‘बिहार इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2023’ के प्रावधानों को आधार बनाया गया है, ताकि एक पारदर्शी और सुव्यवस्थित ढांचे के तहत आम लोगों को लाभ पहुँचाया जा सके।
महिलाओं के लिए ‘प्रीमियम’ प्रोत्साहन: कार पर सीधी छूट
सम्राट सरकार की इस योजना में नारी शक्ति को केंद्र में रखा गया है। सरकार ने महसूस किया है कि कार्यस्थलों या सामाजिक कार्यों के लिए महिलाओं का आवागमन अब एक बुनियादी जरूरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए, केवल महिलाओं के लिए गैर-वाणिज्यिक (Personal) चारपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर एक लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि तय की गई है। यह राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी। इसके अलावा, यदि कोई महिला या अन्य लाभार्थी दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहन खरीदता है, तो उसे 12 हजार रुपये तक की मदद मिलेगी।
यह प्रोत्साहन केवल वाहन की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके निबंधन (Registration) पर भी विशेष रियायतें दी जाएंगी। इस कदम का उद्देश्य मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग की महिलाओं के लिए कार और स्कूटी जैसे सपनों को हकीकत में बदलना है, ताकि वे बिना किसी आर्थिक बोझ के अपनी यात्राएं सुरक्षित और सुगम बना सकें।
रोजगार और वाणिज्यिक वाहनों का नया मॉडल
यह योजना केवल निजी इस्तेमाल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक बड़ा हिस्सा रोजगार सृजन (Employment Generation) से जुड़ा है। ‘मुख्यमंत्री बिहार पर्यावरण अनुकूल परिवहन रोजगार योजना’ के तहत इलेक्ट्रिक मालवाहक तिपहिया वाणिज्यिक वाहनों (Electric Cargo 3-Wheelers) की खरीद पर भी भारी सब्सिडी दी जाएगी।
- ग्रामीण विकास: सरकार चाहती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में माल ढुलाई और आवागमन के लिए पर्यावरण अनुकूल साधनों का उपयोग बढ़े।
- युवाओं को अवसर: बेरोजगार युवा इन वाणिज्यिक वाहनों को खरीदकर अपना खुद का परिवहन व्यवसाय शुरू कर सकेंगे।
- कम परिचालन लागत: चूंकि बिजली से चलने वाले वाहनों का रख-रखाव और ईंधन खर्च पेट्रोल-डीजल की तुलना में बेहद कम होता है, इसलिए इन वाहनों के जरिए रोजगार करने वालों की शुद्ध आय में बढ़ोतरी होगी।
वाणिज्यिक वाहनों के माध्यम से जहाँ एक ओर लॉजिस्टिक्स व्यवस्था सुधरेगी, वहीं दूसरी ओर प्रदूषण फैलाने वाले पुराने तिपहिया वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने में भी मदद मिलेगी।
डीबीटी (DBT) से पारदर्शिता: सीधे खाते में जाएगा पैसा
अक्सर सरकारी योजनाओं में बिचौलियों और भ्रष्टाचार की शिकायतें रहती हैं, लेकिन इस योजना में सम्राट सरकार ने तकनीकी कवच का इस्तेमाल किया है। प्रोत्साहन राशि का भुगतान पूरी तरह से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer – DBT) के माध्यम से किया जाएगा। लाभार्थी को वाहन खरीदने के बाद संबंधित दस्तावेजों के साथ आवेदन करना होगा, और सत्यापन के बाद स्वीकृत राशि बिना किसी कटौती के सीधे उनके बैंक खाते में क्रेडिट कर दी जाएगी। इससे लाभार्थियों को दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी। योजना के अंतर्गत इलेक्ट्रिक वाहनों के निबंधन के समय ही लाभार्थियों को चिन्हित करने की व्यवस्था की जा रही है ताकि सहायता राशि मिलने में अनावश्यक देरी न हो।
पर्यावरण और वैश्विक लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता
वैश्विक स्तर पर चल रहे जलवायु परिवर्तन विरोधी अभियानों में बिहार अब एक अग्रणी राज्य की भूमिका में नजर आ रहा है। कैबिनेट की बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि यह योजना केवल आर्थिक लाभ के लिए नहीं है, बल्कि यह भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ वातावरण तैयार करने का निवेश है। वाहनों से निकलने वाले जहरीले धुएं के कारण पटना, गया और मुजफ्फरपुर जैसे शहरों की हवा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर सरकार ‘नेट जीरो’ कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्यों की ओर बढ़ रही है।
इसके साथ ही, सम्राट चौधरी ने हाल ही में प्रदेशवासियों से ईंधन की बचत करने की जो अपील की थी, यह योजना उसी कड़ी का एक हिस्सा है। जब सड़कों पर अधिक से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन उतरेंगे, तो देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पेट्रोल-डीजल के आयात का बोझ भी कम होगा। सरकार की इस पहल को उद्योग जगत और पर्यावरणविदों ने भी सराहा है। उनका मानना है कि सब्सिडी मिलने से नागरिकों के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति स्वीकार्यता बढ़ेगी और धीरे-धीरे लोग पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली को अपनाने की ओर अग्रसर होंगे। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए भी सरकार निजी निवेशकों के साथ मिलकर काम करने की योजना बना रही है, ताकि इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों को बीच रास्ते में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।


